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खेल-खेल में मासूम निगल गया LED बल्ब, फेफड़े में फंसा में आने लगी उल्टियां; दो ऑपरेशंस के बाद निकल सका

Ahemdabad Latest News: हालांकि, इस तरह की खबरें आपको और हमें चौंकाने के साथ सचेत करती हैं कि जिन घरों में छोटे बच्चे हैं, वहां पर पैरेंट्स को अधिक सावधान रहना चाहिए।

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नौ महीने का यही मासूम खेलते-खेलते एलइडी बल्ब निगल गया था।

Photo : टाइम्स नाउ ब्यूरो

Ahemdabad Latest News: नजर हटी और दुर्घटना घटी! हाल ही में ऐसा एक परिवार के साथ हुआ। हंसते-खेलते परिवार में नौ माह का मासूम था, जो खेल-खेल में एलइडी बल्ब निगल गया था। चूंकि, घर वालों की नजर इस दौरान उस पर नहीं थी और न ही वह इस बारे में उन्हें बता सकता था। ऐसे में जब उसकी तबीयत बिगड़ी और उसे उल्टियां आने लगीं तो घर वाले परेशान हुए। आनन फानन वह उसे लेकर अस्पताल लेकर दौड़े तो पता चला कि फेफड़ों में यह चीज अटकी है। स्थानीय डॉक्टर ने जब इलाज से हाथ खड़े किए तो उन्हें पड़ोसी सूबे जाकर सर्जरी करानी पड़ी।

यह पूरा मामला मूल रूप से मध्य प्रदेश के रहने वाले परिवार से जुड़ा है, जो कि रतलाम से ताल्लुक रखता है। नौ माह का उनका बच्चा एलइडी बल्ब निगल गया था। वह इसके बाद उल्टियां करने लगा और उसे इस दौरान सांस लेने में भी तकलीफ हुई। पीड़ित परिजन इसके बाद उसे रतलाम के स्थानीय अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टर ने प्राथमिक तौर पर एक्स-रे किया और फेफड़ों में एलईडी बल्ब होने की पुष्टि की।

चूंकि, रतलाम में डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए और बच्चे को कहीं और दिखाने की सलाह दी। नतीजतन पीड़ित परिवार को गुजरात के अहमदाबाद स्थित सिविल अस्पताल का रुख करना पड़ा और वहां उसका दोबारा एक्स-रे किया गया। बच्चे की रिपोर्ट से पता चला कि एलईडी बल्ब फेफड़ों में फंसा है, जिसके बाद सर्जरी की गई। अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल के डॉ राकेश जोशी और उनकी टीम का पहला प्रयास विफल रहा।

पहली कोशिश में मासूम के थोड़ी सी ब्लीडिंग भी हुई और सूजन भी आ गई। ऐसे में उसे दवाइयां दी गईं और चार दिन के बाद दूसरी सर्जरी की गई, जो कि सफल रही। मासूम को इसके बाद हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई और वह फिलहाल स्वस्थ है। हालांकि, इस तरह की खबरें आपको और हमें चौंकाने के साथ सचेत करती हैं कि जिन घरों में छोटे बच्चे हैं, वहां पर पैरेंट्स को अधिक सावधान रहना चाहिए।

सिद्धार्थ पंड्या
Siddharth Pandyaauthor

Siddharth has covered a wide range of topics in his 15-year career as a journalist, from political issues to social matters. He has reported on political developments not only in Gujarat but also in Madhya Pradesh. He does reporting and anchoring in Hindi, English, and Gujarati languages in Gujarat. From live reporting on various issues to the controversies surrounding fake encounters, the 2017 Patidar movement in Gujarat, the state's elections, lockdown, and the exodus during the COVID-19 pandemic, Siddharth has touched upon various topics.

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