भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा पर तनाव के बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने सीमा पर बाड़ लगाने के लिए तीन और जगहों पर बीएसएफ को जमीन सौंपने का फैसला किया है। जलपाईगुड़ी बिन्नागुड़ी में करीब 0.05 एकड़, मालदा नारायणपुर में 19.73 एकड़। इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने नादिया जिले के करीमपुर में बीएसएफ को जमीन सौंपी थी। पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ 2,216 किलोमीटर लंबी सीमा है। इस खुली सीमा के कुछ हिस्सों में बाड़ नहीं लगी है और वहां घुसपैठ और तस्करी का खतरा बना रहता है।
सरकार लगा रही है बाड़
इससे पहले केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि सीमा की सुरक्षा के लिए बाड़ लगाना एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है। बाड़ लगाने से सीमा पार आपराधिक गतिविधियों, तस्करी, अपराधियों की आवाजाही और तस्करी की चुनौतियों पर प्रभावी ढंग से काम करके अपराध मुक्त सीमा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। बांग्लादेश सरकार को यह बता दिया गया है कि सीमा पर बाड़ लगाने सहित सुरक्षा उपायों के संबंध में, भारत दोनों सरकारों और सीमा सुरक्षा बल और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के बीच सभी प्रोटोकॉल और समझौतों का पालन करता है। भारत सरकार की यह अपेक्षा कि बांग्लादेश की ओर से पहले की सभी सहमतियों को लागू किया जाएगा और सीमा पार अपराधों से निपटने के लिए एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा, बांग्लादेश सरकार को भी बता दिया गया है।
भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ की स्थिति
भारत-बांग्लादेश सीमा की 864.482 किलोमीटर की लंबाई में बाड़ लगाना अभी बाकी है जिसमें 174.514 किलोमीटर की गैर-व्यवहार्य दूरी शामिल है। बाड़ लगाने की परियोजनाओं के संभावित हिस्सों को पूरा करने में आने वाली चुनौतियां भूमि अधिग्रहण, बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) की आपत्तियों, कार्य हेतु सीमित मौसम और भूस्खलन/ दलदल भूमि से संबंधित हैं।
