ECI Notice TMC: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर छिड़ा अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी पर नियंत्रण और खुद को 'असली तृणमूल' साबित करने की यह लड़ाई अब देश के निर्वाचन सदन यानी चुनाव आयोग के दरवाजे तक पहुंच चुकी है।
इस मामले में बड़ा कदम उठाते हुए चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी, दोनों को ही आधिकारिक नोटिस जारी कर दिया है। आयोग ने दोनों पक्षों को सख्त निर्देश दिया है कि वे सोमवार, 6 जुलाई 2026 की शाम 5:30 बजे तक अपना-अपना लिखित जवाब और दावे के समर्थन में दस्तावेज सौंपें।
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क्यों आपस में भिड़े TMC के नेता?
दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की करारी शिकस्त और BJP के सत्ता में आने के बाद हुई। चुनाव हारते ही पार्टी के भीतर ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को लेकर असंतोष पनपने लगा।
इस नाराजगी को हवा देते हुए वरिष्ठ नेता ऋतब्रत बनर्जी ने एक अलग धड़ा बना लिया। बागी गुट का दावा है कि पार्टी के कुल 80 विधायकों में से 65 से ज्यादा उनके साथ हैं। इसी बहुमत के दम पर ऋतब्रत बनर्जी को बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी चुन लिया गया है।
विधायक दल बनाम सांगठनिक ढांचा
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी गुट जहां विधायी दल में अपने भारी बहुमत को आधार बनाकर खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बता रहा है, वहीं ममता बनर्जी के प्रति वफादार नेताओं का तर्क बिल्कुल अलग है। ममता गुट का कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल का असली पावर सेंटर उसका सांगठनिक ढांचा होता है, और संगठन पर आज भी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पकड़ पूरी तरह मजबूत है।
फिलहाल, चुनाव आयोग अब इस बात की पड़ताल करेगा कि पार्टी के नाम, सिंबल (चुनाव चिह्न), अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और बैंक खातों पर असल हक किसका है। 6 जुलाई को दोनों पक्षों के जवाब आने के बाद ही इस सियासी लड़ाई की अगली दिशा तय होगी।
