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कोर्ट में रो पड़ीं स्वाति मालीवाल, मारपीट केस में बिभव कुमार की जमानत पर फैसला सुरक्षित

Swati Maliwal Assault Case: स्वाति मालीवाल मारपीट मामले में बिभव कुमार की जमानत याचिका पर दिल्ली की एक अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिका का विरोध करते हुए मालीवाल ने कहा है कि अगर बिभव को जमानत दी जाती है तो उनको और उनके परिवार को खतरा है।

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Bibhav Kumar- Swati Maliwal

Photo : BCCL

Swati Maliwal Assault Case: आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ हुई मारपीट मामले में आरोपी बिभव कुमार की जमानत याचिका पर आज दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में सुनवाई हुई। बिभव कुमार ने 25 मई को कोर्ट में याचिका लगाई थी। इस दौरान स्वाति मालीवाल भी कोर्ट में मौजूद रहीं। बिभव कुमार की जमानत को लेकर दोनों पक्षों की ओर से तीखी बहस देखने को मिली। सुनवाई के दौरान स्वाति मालीवाल रो भी पड़ीं, उन्होंने बिभव कुमार से जान का खतरा होने के साथ-साथ आम आदमी पार्टी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।

उधर, लंबी बहस और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने बिभव कुमार की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। सनवाई के दौरान बिभव कुमार की ओर से वरिष्ठ वकील हरिहन ने कहा कि स्वाति मालीवाल ने पूरी प्लानिंग करके तीन दिन बाद एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा, स्वाति मालीवाल के सेंसटिव बॉडी पार्टस पर चोट के कोई निशान नहीं मिले हैं, ऐसे में गैर इरादतन हत्या का कोई सवाल नही नहीं उठता है। उन्होंने कहा, न ही बिभव कुमार को स्वाति को निर्वस्त्र करने का कोई इरादा था।

मालीवाल ने किया जमानत याचिका का विरोध

वहीं, सुनवाई के दौरान स्वाति मालीवाल ने बिभव कुमार की जमानत याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा, अगर बिभव कुमार को जमानत दी गई तो वह मेरे और मेरे परिवार के लिए खतरा बन जाएगा। उन्होंने कहा, बिभव कुमार कोई आम आदमी नहीं है, उसे मंत्रियों को मिलने वाली सुविधाएं मिली हुई हैं। मालीवाल ने कोर्ट को बताया कि जब मैंने अपना बयान दर्ज कराया तो आम आदमी पार्टी के नेताओं ने प्रेस कांफ्रेंस की और मुझे बीजेपी का एजेंट बताया। इन लोगों के पास एक बड़ी ट्रोल मशीनरी है, जिसमें मेरे खिलाफ हवा भर दी गई है। मालीवाल ने कहा, घटना के बाद आम आदमी पार्टी के नेता आरोपी को अपने साथ लेकर घूम रहे थे, उसे मुंबई लेकर गए।

मालीवाल ने सीएम आवास में जबरन घुसने की कोशिश की

स्वाति मालीवाल की दलीलों का विरोध करते हुए बिभव कुमार के वकील ने कहा, स्वाति मालीवाल को सीएम आवास पर नहीं बुलाया गया था, उन्होंने जबरन मुख्यमंत्री आवास के अंदर घुसने की कोशिश की। वहां मौजूद सिक्योरिटी स्टाफ ने उन्हें बाहर इंतजार करने को कहा, लेकिन वो अंदर घुस गईं। इसके बाद बिभव ने पूछा कि किसके निर्देश पर उन्हें अंदर आने की इजाजत मिली है। बिभव का यह पूछना बनता है क्योंकि मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर जवाबदेही उनकी भी है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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