Army Chief Gen Dhiraj Seth: सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ को बुधवार को चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ के रूप में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। यह सम्मान प्राप्त करने के बाद सेना प्रमुख ने वहां मौजूद अपने पिता लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) केएम सेठ को सैल्यूट किया। यह एक भावुक पल था। इस मौके पर आगे बढ़कर सेना प्रमुख के भाई रियर एडमिरल रवनीश सेठ ने उन्हें बधाई दी। फिर दोनों भाइयों ने एक दूसरे को सैल्यूट कर एक दूसरे से हाथ मिलाया। इस समारोह में सेना प्रमुख का परिवार भी उपस्थित था।
जनरल सेठ के नाम है विशेष उपलब्धि
इससे पहले जनरल सेठ ने मंगलवार को नए सेनाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाल लिया। उनके नाम पश्चिमी मोर्चे पर सेना की दो अभियानगत सैन्य कमान के नेतृत्व की विशिष्ट उपलब्धि दर्ज है। जनरल सेठ ने 13 लाख सैनिकों वाली सेना की कमान ऐसे समय में संभाली है जब वह सीमाओं पर चुनौतियों का सामना करते हुए खुद को आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
एनडीए के पूर्व छात्र हैं जनरल सेठ
जनरल सेठ ने जनरल उपेंद्र द्विवेदी की जगह ली है जो सशस्त्र बलों में 40 साल से अधिक के शानदार करियर के बाद मंगलवार को सेवानिवृत्त हुए। जनरल सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं। उन्हें दिसंबर 1986 में ’आर्मर्ड कोर’ में शामिल किया गया था। 31वें सेनाध्यक्ष (सीओएएस) बनने से पहले उन्होंने उप सेना प्रमुख के तौर पर सेवाएं दी थी। जनरल सेठ ने ऐसे समय में सेनाध्यक्ष का पद संभाला है जब वैश्विक भू-रणनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। प्रौद्योगिकी में तरक्की और आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप की वजह से सुरक्षा के क्षेत्र में चुनौतियां और भी गंभीर होती जा रही हैं।
जनरल सेठ के पास व्यापक अनुभव
रक्षा मंत्रालय ने पहले बताया था कि सैन्य कमांडर के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने साउथ वेस्टर्न कमांड (जयपुर में स्थित) और सदर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर काम किया। इस तरह उन्हें पश्चिमी मोर्चे पर दो अभियानगत कमान का नेतृत्व करने का दुर्लभ गौरव प्राप्त है। लगभग चार दशकों के अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने अभियानगत, रणनीतिक, दक्षता विकास और संस्थागत क्षेत्रों में व्यापक अनुभव प्राप्त किया जिससे भारतीय सेना की युद्ध-क्षमता और दीर्घकालिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान मिला है।
अहम विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं
सेना मुख्यालय में रणनीतिक योजना और दक्षता विकास जैसे अहम विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने सेना के आधुनिकीकरण की दिशा, दक्षता विकास की रूपरेखा और सेना की संरचना से जुड़ी दीर्घकालिक पहलों को आकार दिया। एक अप्रैल को उप सेना प्रमुख के तौर पर नियुक्ति से पहले वह पुणे स्थित सदर्न कमांड के प्रमुख थे। उनके नेतृत्व में इस विशिष्ट कमान ने पिछले साल ’ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अभियान के लिए उच्च स्तर पर तत्परता बनाए रखी।
