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Jammu Kashmir: घाटी में बढ़ते आतंक को लेकर रक्षामंत्री राजनाथ ने बुलाई अहम बैठक, डोभाल से लेकर आर्मी चीफ भी मौजूद

Jammu Kashmir: बीते कुछ दिनों में जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाएं बढ़ गई हैं। आतंकियों ने विशेष तौर पर जम्मू को निशाना बनाया है। इस बाबत रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एक अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में अजीत डोभाल से लेकर आर्मी चीफ भी मौजूद हैं। एक आंकड़े के मुताबिक, इस साल 21 जुलाई तक आतंकवादियों ने 11 हिट-एंड-रन हमलों में सेना, सुरक्षाबलों और नागरिकों समेत 28 लोगों की हत्या कर दी।

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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह।

Photo : BCCL

Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर में बीते कुछ दिनों में बढ़ी आतंकी घटनाओं को लेकर केंद्र सख्त हो गया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एक अहम बैठक बुलाई है। जानकारी के मुताबिक, यह बैठक साउथ ब्लॉक में चल रही है। इसमें नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से लेकर अन्य सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख भी मौजूद हैं। इसके अलावा बैठक में रक्षा सचिव और डीजीएमओ (सैन्य संचालन महानिदेशक) भी मौजूद हैं।

बता दें, बीते कुछ दिनों में जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाएं बढ़ी हैं। आतंकियों ने विशेष तौर पर जम्मू को निशाना बनाया है और एक के बाद एक यहां कई हमले किए हैं। आतंकवादी जम्मू डिवीजन के पहाड़ी जिलों में सेना, सुरक्षा बलों और नागरिकों पर घात लगाकर हमले कर रहे हैं। एक आंकड़े के मुताबिक, इस साल 21 जुलाई तक आतंकवादियों ने 11 हिट-एंड-रन हमलों में सेना, सुरक्षाबलों और नागरिकों समेत 28 लोगों की हत्या कर दी है, जबकि सुरक्षाबलों ने 28 आतंकवाद-रोधी अभियान चलाए हैं।

सेना ने तैनात किए पैरा कमांडो

जम्मू डिवीजन के पर्वतीय क्षेत्रों में 40-50 कट्टर विदेशी आतंकियों के सक्रिय होने की सूचना मिलने के बाद, सेना ने डिवीजन के पर्वतीय जिलों पुंछ, राजौरी, डोडा, उधमपुर, कठुआ और रियासी में 4,000 से अधिक पैरा कमांडो और पर्वतीय युद्ध में प्रशिक्षित सैनिकों को तैनात किया है। इन सुरक्षाबलों को आतंकवादियों की किसी भी तरह के हिट-एंड-रन हमलों को विफल करने के लिए पहाड़ों की चोटियों पर तैनात किया गया है। इन क्षेत्रों में पहले घात लगाकर अचानक हमले किए गए थे और फिर इन जिलों के घने जंगलों वाले इलाकों में गायब हो गए। सेना की रणनीति का उद्देश्य आतंकवादियों को इन पहाड़ी जिलों के घने जंगलों और हरियाली वाले क्षेत्रों से बाहर निकालना है।

उधमपुर में हुई मुठभेड़

उधर, जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में बुधवार को सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई। अधिकारियों ने बताया कि आतंकवाद विरोधी अभियान मंगलवार शाम को उधमपुर जिले में पटनीटॉप पर्यटन स्थल के पास अकर के जंगलों में शुरू किया गया। बुधवार सुबह सुरक्षा बलों ने वन क्षेत्र में छिपे आतंकवादियों का पता लगया। इसी दौरान फायरिंग शुरू हो गई।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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