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डीपफेक मामले में नया कानून बना सकती है सरकार, बैठक के बाद आईटी मिनिस्टर ने दिए संकेत

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Nov 23, 2023, 01:11 PM IST

DeepFake Video: अश्विनी वैष्णव ने कहा कि हम आज ही विनियमन का मसौदा तैयार करना शुरू कर देंगे और कुछ ही समय में हमारे पास डीपफेक से निपटने के लिए नए नियम होंगे...यह मौजूदा ढांचे में संशोधन या नए नियम या नया कानून लाने के रूप में हो सकता है।

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आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव

Photo : ANI

DeepFake Video: देश में बढ़ते डीपफेक मामलों को लेकर केंद्र सरकार एक्शन में आ गई है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज इस मुद्दे को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक के बाद उन्होंने इस बात के संकेत दिए हैं कि सरकार डीपफेक वीडियो मामले में नया नियम या कानून बना सकती है।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सभी शसोशल मीडिया कंपनियां डीपफेक का पता लगाने, इससे निपटने, इसकी सूचना देने के तंत्र को मजबूत करने और उपयोगकर्ताओं में जागरूकता बढ़ाने जैसी स्पष्ट कार्रवाइयां करने पर सहमत हुईं। हम आज ही विनियमन का मसौदा तैयार करना शुरू कर देंगे और कुछ ही समय में हमारे पास डीपफेक से निपटने के लिए नए नियम होंगे...यह मौजूदा ढांचे में संशोधन या नए नियम या नया कानून लाने के रूप में हो सकता है। उन्होंने डीपफेक को लोकतंत्र के लिए एक नया खतरा करार दिया।

दिसंबर में होगी दूसरी बैठक

आईटी मिनिस्टर ने कहा कि इस मुद्दे पर हमारी अगली बैठक दिसंबर के पहले सप्ताह में होगी। आज किए गए फैसलों पर उसमें आगे की चर्चा होगी। मसौदा विनियमन में क्या शामिल किया जाना चाहिए, इस पर भी चर्चा की जाएगी। जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में सचिव एमईआईटीवाई, सरकारी अधिकारी और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब 18 नवंबर को केंद्रीय मंत्री ने इस बात का खुलासा किया था कि सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को डीपफेक मुद्दे को लेकर नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस में इन प्लेटफार्मों को डीपफेक सामग्री की पहचान करने और उसे हटाने के लिए तत्काल और प्रभावी उपाय करने का निर्देश दिया गया है।

सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से संरक्षण वापस ले सकती है सरकार

बता दें, केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव ने बताया था कि अगर सोशल मीडिया प्लेटफार्म डीपफेक मामले में आवश्यक कार्यवाई नहीं करते हैं तो सरकार उनसे संरक्षण भी वापस लेने पर विचार कर ही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि सेफ हार्बर क्लॉज, जो पारंपरिक रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को सुरक्षित रखता है, अगर वे अपने प्लेटफॉर्म पर डीपफेक के खिलाफ पर्याप्त उपाय करने में विफल रहते हैं, तो यह लागू नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा, ज्यादातर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जिस सेफ हार्बर क्लॉज का आनंद ले रहे हैं। हालांकि, अगर वे डीपफेक को हटाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाते हैं तो यह लागू नहीं होगा।

पीएम मोदी ने भी जताई थी चिंता

बता दें, डीपफेक मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चिंता जाहिर की थी। दरअसल, पीएम मोदी का भी एक डीपफेक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्हें गरबा करते और गाना गाते हुए दिखाया गया था। इसके बाद पीएम मोदी ने कहा था कि डीपफेक वीडियो समाज में अशांति पैदा कर सकते हैं। इससे पहले फिल्म अभिनेत्री रश्मिका मंदाना का भी डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था, जिसको लेकर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की थी। इस मामले को लेकर अमिताभ बच्चन समेत कई बॉलीवुड हस्तियों ने भी चिंता जाहिर की थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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