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मनाली में विरोध हुआ तो छलका कंगना का 'दर्द', बोलीं- मेरे रेस्टोरेंट की एक दिन की कमाई सिर्फ Rs 50, सैलरी पर खर्च 15 लाख

बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू-मनाली के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। भारी बारिश की वजह से 25 और 26 अगस्त को कुल्लू और मनाली के कई स्थानों पर भूस्खलन और अचानक बाढ़ का कारण बना जिससे भारी तबाही हुई।

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हिमाचल में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों में सांसद कंगना रनौत जायजा लेने पहुंचीं (फोटो - ट्विटर)

नई दिल्ली: बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू-मनाली के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। भारी बारिश की वजह से 25 और 26 अगस्त को कुल्लू और मनाली के कई स्थानों पर भूस्खलन और अचानक बाढ़ का कारण बना जिससे भारी तबाही हुई।

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के पतलीकूहल में गुरुवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने पहुंचीं सांसद कंगना रनौत को विरोध का सामना करना पड़ा। लोगों की नाराजगी वाले वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गए। कंगना नग्गर पुल के पास क्षतिग्रस्त सड़क का जायजा लेने जैसे ही पहुंचीं, वहां मौजूद युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें काले झंडे दिखाए और नारेबाजी करते हुए 'कंगना गो बैक' के नारे लगाए।

कैफे को लेकर छलका कंगना का दर्द

बॉलीवुड अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत का बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर काले झंडों और 'जाओ वापस... तुम लेट हो' के नारों के साथ स्वागत किया गया। कंगना ने कहा कि उन्हें भी नुकसान हुआ है। कंगना रनौत ने कहा कि वह हिमाचल में चलाए जा रहे अपने रेस्तरां में एक दिन में केवल 50 रुपए की कमाई कर पाईं, जबकि उन्हें 15 लाख रुपए की सैलरी देनी है। कंगना ने कहा कि मेरी पीड़ा को भी समझें... मैं भी एक इंसान हूं। कल्पना कीजिए कि मैं किस दौर से गुजर रही हूं।'

कंगना ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया

गौर हो कि गुरुवार को कंगना ने मनाली उपखंड के सोलंग और पालचान के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और हाल की त्रासदी से प्रभावित लोगों से बातचीत की। कंगना रनौत को बताया गया कि पूरा सोलंग गांव फिसलने के कगार पर है क्योंकि ब्यास नदी उस पहाड़ी को काट रही है जिस पर गांव स्थित है। चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग और मनाली-लेह राजमार्ग के कुछ हिस्से ब्यास नदी के बढ़ते जल स्तर के कारण बह गए। कुल्लू शहर, बस स्टैंड और बिंदु धंक को जोड़ने वाला मनाली का दाहिना बैंक रोड भी व्यापक नुकसान का सामना कर रहा है।

कंगना का हुआ विरोध प्रदर्शन

विरोध प्रदर्शन के दौरान भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर धक्का-मुक्की भी हुई। स्थिति बिगड़ने से पहले पुलिस ने मोर्चा संभाला और मौके पर मौजूद तीन प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। मनाली यूथ कांग्रेस अध्यक्ष मनीष ठाकुर ने कहा कि आपदा के समय जब कुल्लू-मनाली में भारी तबाही हुई थी, उस दौरान सांसद कंगना रनौत अपने क्षेत्र से नदारद रहीं। जब लोग संकट से जूझ रहे थे, तब सांसद को क्षेत्र का हाल जानने की जरूरत महसूस नहीं हुई, लेकिन अब जब हालात कुछ हद तक सामान्य हुए हैं, तब वह राजनीति चमकाने के लिए दौरे पर आई हैं। (एजेंसी इनपुट के साथ)
Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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