Bharat Tiwari Encounter Case:बिहार के भोजपुर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर गोरखपुर से भाजपा सांसद रवि किशन ने अपने पुराने बयान पर उठे विवाद के बाद सफाई दी है। सांसद ने एक वीडियो जारी कर कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया और सोशल मीडिया पर तोड़-मरोड़कर वायरल किया गया।
'मैंने भरत तिवारी को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की थीट
रवि किशन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने भरत तिवारी को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की थी। उनके मुताबिक, उनका बयान उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव सरकार के दौरान अपराध और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर था, लेकिन उसे अलग संदर्भ में पेश किया गया।
सांसद ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के बयान को काट-छांटकर या भ्रामक तरीके से सोशल मीडिया पर प्रसारित करना उचित नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस तरह की गतिविधियां जारी रहती हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
'अगर निर्दोष के साथ हुआ अन्या तो हो निष्पक्ष जांच'
रवि किशन ने यह भी कहा कि अगर किसी निर्दोष के साथ अन्याय हुआ है तो मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जानी चाहिए। भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है, जबकि मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
क्या है एनकाउंटर मामला?
भरत भूषण तिवारी मामला बिहार के भोजपुर जिले में जून 2026 में हुई एक पुलिस मुठभेड़ (एनकाउंटर) से जुड़ा है, जिसने राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा कर दिया। 17 जून 2026 को भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम एक ऑपरेशन के लिए पहुंची। पुलिस का दावा है कि भरत तिवारी के पास हथियार था और कार्रवाई के दौरान उन्होंने पुलिस पर फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने कार्रवाई की और उनकी मौत हो गई।
परिवार और कुछ स्थानीय लोगों ने पुलिस के दावे पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण करने की कोशिश की थी और इसके बावजूद गोली चलाई गई। इसी वजह से मामले को लेकर “फर्जी एनकाउंटर” के आरोप भी लगाए गए।
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