Awadh Ojha Exclusive: देश के जाने माने शिक्षक अवध ओझा सर ने टाइम्स नाउ नवभारत के साथ बात करते हुए जीवन में गुरु की महत्ता, देश की राजनीति, खुद का संघर्ष और युवा वर्ग की समस्याओं पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि जीवन में गुरु सबसे जरूरी है। इस क्रम में उन्होंने अपना भी उदाहरण दिया कि कैसे गुरु ने उनका बिगड़ा हुई जीवन संवार दिया। उन्होंने कहा कि उनका बस एक गोल है कि भारत के ज्ञान और ध्यान को पूरी दुनिया में प्रसार करना।
गुरु की महत्ता
डॉ. रमा सोलंकी के साथ खास पॉडकॉस्ट EYE Opener में बात करते हुए ओझा सर ने कहा कि इस देश में भगवान से ऊपर गुरु को रखा गया है। जब मुझे नहीं समझ में आता था क्या करना है, कहां जाना है, ऐसी एक परिस्थिति में मेरा इलाहाबाद,यूनिवर्सिटी में एडमिशन होता है। मतलब मेरी जिंदगी के एजुकेशन के दो पार्ट हैं, एक प्री इलाहाबाद और एक पोस्ट इलाहाबाद। प्री इलाहाबाद में मुझे पढ़ाई से कोई लेना देना नहीं है। दो चार शिक्षक को छोड़ दीजिए तो हर कोई कहता था कि ये कुछ नहीं करेगा और सत्य ही कहते थे वो। लेकिन जब इलाहाबाद पहुंचा यूनिवर्सिटी में, जो मुझे माहौल मिला जो टीचर्स मिले...। वहां मुझे एक टीचर मिले, मतलब उस आदमी की क्लास में मुझे बैठ के पता चला कि यार पढ़ाई एक मजेदार चीज है। अच्छा मजेदार कब होती है पढ़ाई, जब आप कनेक्ट करते हो, जैसे अभी आपने महाभारत का नाम लिया अर्जुन शरणागति है, चेतना कितना उसे कमांड देती है। ऐसे हर आदमी के हृदय में उसका कृष्ण बैठा हुआ है। तुम अपने शरीर के शैतान से कमांड लेते हो। हम बॉडी में दो सेंटर है ना। एक शैतान का सेंटर है। एक भगवान का सेंटर है।
देखिए अवध ओझा सर का पूरा इंटरव्यू
अवझ ओझा और राजनीति
अवध ओझा सर राजनीति में आने के सवाल पर कहते हैं कि नेतागिरी हमारा जो क्षेत्र है उत्तर भारत, हर घर में एक युवा नेता है। ऐसा कोई घर ही नहीं जहां युवा नेता ना हो। मेरा बचपन जो पला तो मेरे एक मित्र हैं पंकज पांडे, उनके पिताजी अच्छे नेता हुआ करते थे पंडित दीपनारायण पांडे, पंडित दीपनारायण पांडे के मित्र होते थे मंगलदेव सिंह, तुलसीपुर के और पंडित दीपनारायण पांडे के साथ यूपी के एक बड़े शानदार बाहुबली नेता हुआ करते थे, पंडित हरिशंकर तिवारी, मैं इन सारे नेताओं को देखकर पला, तो सोशलाइजेशन ऐसा हुआ कि पॉलिटिक्स एक तरह से मेरे दिमाग में थी कि राजनीति करनी है। सौभाग्य से ऑफर आ गया तो मुझे लगा ये तो शानदार मौका है और वो भी चुनौती ज्यादा थी, क्योंकि अगर सिर्फ मुझे जीतना होता तो मैं तो विनिंग पार्टियों की तरफ चला जाता वो भी मुझे बुला लेते।
आप से नेताओं के छोड़ने पर क्या बोले अवध ओझा
आम आदमी पार्टी से नेताओं के छोड़ने पर अवध ओझा सर ने कहा कि जितने लोग चले गए वो उनकी अपनी चॉइस थी। भाई आप किसी को जबरदस्ती कहीं थोड़ी रोक सकते हो। मेरा मन करेगा तो मैं भी चला जाऊंगा। मेरा कोई हार्ड एंड फास्ट रूल लाइफ में नहीं है।
पीएम मोदी और देश के बाकी नेताओं पर क्या बोले अवध ओझा
अवध ओझा ने पीएम मोदी को सुपरस्टार बताते हुए कहा कि वो तो अश्वमेघ कर रहे हैं। उनका घोड़ा रोकने की क्षमता किसी में नहीं है। योगी आदित्यनाथ को समय की मांग बताते हुए ओझा सर ने कहा कि बाबा जी का जो तरीका है वो भले ही एक एंगल से एंटी डेमोक्रेटिक दिखता हो। पर समय की जरूरत है। वहीं अखिलेश यादव को ओझा सर ने देश का भविष्य बताया। अरविंद केजरीवाल को लेकर उन्होंने कहा कि वो उनके प्रिय हैं। हर टाइम जब मैं उस आदमी से मिला हूं जब भी मिलने गया हूं उस आदमी ने कभी मना नहीं किया। एक बार मैंने उनसे कहा भी पंजाब से राज्यसभा जाना है, आप हम ही को भेज दो। अगर वो भेज देते तो शायद उनको आज ये दिन नहीं देखना पड़ता।