Captain Amarinder singh: कैप्टन अमरिंदर सिंह का हटना क्या कांग्रेस के लिए घातक साबित होगा, खास नजर

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Sep 21, 2021, 01:33 PM IST

पंजाब में अब कैप्टन अमरिंदर का राज नहीं है। नए सीएम चरणजीत सिंह चन्नी की ताजपोशी के बाद किसानों के संबंध में उनके सवाल को सियासी तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Captain Amarinder singh: कैप्टन अमरिंदर सिंह का हटना क्या कांग्रेस के लिए घातक साबित होगा, खास नजर

सियासत की बाउंड्री भले ही तय होती हो। लेकिन सियासी शब्दों की गूंज किसी सरहद तक सिमटी नहीं रहती। पंजाब में बड़ा बदलाव हो चुका है। इसके संकेत भले ही कई महीने पहले से मिलते रहे हों। लेकिन जब उस फैसले को कांग्रेस के आलाकमान ने जमीन पर उतारा तो पंजाब में हलचल मची। पंजाब में सियासी हलचल के बीच कैप्टन अमरिंदर ने अपने दर्द को बयां किया तो गुस्से में भी नजर आए। उन्होंने कहा था कि मसलन जिस तरह से दो महीने के अंदर तीन बार सीएलपी की बैठक बुलाई गई वो अपमानजनक था। नवजोत सिंह सिद्धू को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा तक बता डाला तो दर्द यह था कि किसान आंदोलन के दौरान जिन लोगों की जान गई उनके परिवार के लिए कुछ खास नहीं कर सके। इन सभी मुद्दों पर खास नजरिये को राजनीतिक और सामाजिक मामलों के जानकार शिवम त्यागी से सवालों और जवाबों के जरिए जानेंगे।

सवाल-पंजाब से कैप्टन अमरिंदर सिंह की विदाई हो चुकी है इस फैसले का कांग्रेस पर कितना असर पड़ेगा क्या कांग्रेस ने कोई बड़ी रणनीतिक भूल कर दी है?

जवाब-पंजाब से कैप्टन अमरिंदर सिंह की विदाई के साथ ही कांग्रेस अपने ही बुने जाल में बुरी तरह फंसने के बाद अब उस जाल को ख़ुद ही खोलने की कोशिश कर रही है। इस बीच पार्टी ने एक तरफ़ अपना कीमती वक़्त खोया और अपनी छवि को ख़ुद ही नुक़सान पहुंचाया, तो दूसरी तरफ़ साल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों में जीत हासिल कर सरकार बना सकने की संभावना को भी ख़तरे में डाल दिया है। कांग्रेस को पंजाब में मजबूत करने में कैप्टन अमरिंदर सिंह का अहम रोल रहा है। पार्टी 2002 और 2017 में कैप्टन का चेहरा आगे कर ही सत्ता तक पहुंची। पंजाब कांग्रेस की मौजूदा लीडरशिप पर नजर डाली जाए तो कैप्टन इकलौते ऐसे लीडर हैं, जिन्हें खुद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी सियासत में लेकर आए। कैप्टन एक बार पहले कांग्रेस छोड़ चुके हैं, मगर उसके 14 साल बाद वह सोनिया गांधी के आग्रह पर दोबारा पार्टी में लौटे और वो भी कांग्रेस को मजबूत करने के नाम पर।

सवाल-कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री नहीं है और एक तरीके से इशारा भी कर रहे हैं कि उनका अगला कदम क्या होगा तो क्या पंजाब में बीजेपी के लिए यह एक बेहतर अवसर होगा।

जवाब-अमरिंदर सिंह के इस्तीफे से बीजेपी को आगामी चुनावों में डबल फायदा होगा, जिसमें पहला फायदा ये की बीजेपी पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रहे कलह औऱ पार्टी के नेतृत्व पर सवालिया निशान खड़ा करके उसे सबके सामने परोसेगी। वहीं दूसरा फायदा बीजेपी को यह होगा की पंजाब कांग्रेस में जो फूट हुई और अमरिंदर सिंह ने जो सीएम पद से इस्तीफा दिया इससे कांग्रेस पार्टी की साख में बट्टा लगा है, साथ ही पंजाब में कांग्रेस पार्टी कमजोर हो गई। अमरिंदर के इस्तीफे से पंजाब कांग्रेस दो गुटों में बट गई है। ऐसे हालात में अगर अमरिंदर बीजेपी के साथ जाते हैं तो बीजेपी के लिए यह मास्टरस्ट्रोक साबित होगा।

सवाल- जैसा कि आप जानते हैं कि राज्य स्तर पर कांग्रेस के दिग्गज नेताओं मैं मतभेद है अब सवाल है कि जिस तरीके से पंजाब में कांग्रेस आलाकमान ने फैसला किया है क्या उसी फैसले को छत्तीसगढ़ और राजस्थान में दोहराया जाएगा।

जवाब- छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी कांग्रेस का यही हाल है। छत्तीसगढ़ में मौजूदा सीएम भूपेश बघेल और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएम सिंह देव के बीच सीएम कुर्सी को लेकर आए दिन रंजिश देखने को मिलती है तो वहीं राजस्थान में भी कांग्रेस का यही हाल है वहां भी सीएम अशोक गहलोत औऱ सचिन पायलट के बीच सीएम कुर्सी को लेकर हमेशा विवाद बने रहते हैं। गौरतलब करने वाली बात यह है कि कांग्रेस शासित राज्य में सीएम पद की 50-50 की नीति क्यों बनाई गई है। आधा कार्यकाल कोई एक सीएम रहेगा फिर आधा कार्यकाल कोई औऱ। क्या कोई कांग्रेस का एक सीएम अपने राज्य में पूरा कार्यकाल जिम्मेदारी नहीं संभाल सकता है या फिर यूं कहें की कांग्रेस का उच्चस्तरीय नेतृत्व कमजोर है।

सवाल-पंजाब सहित उत्तर प्रदेश के लिए एक सवाल जिस तरीके से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन का फैला हुआ है खासतौर से जाटलैंड में तो क्या उसका प्रभाव बीजेपी पर अगले विधानसभा चुनाव में पड़ेगा क्योंकि आप जानते भी हैं कि 2017 के विधानसभा चुनाव में जाटलैंड में बीजेपी ने करीब-करीब स्वीप किया था।

जवाब-किसान आंदोलन का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ खास असर  देखने को नहीं  मिलेगा, रही बात किसानों की तो बीजेपी औऱ पीएम दोनों इस मुद्दे पर सक्रिय हैं औऱ शुरू दिन से लगे हुए हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गैर-जाट ओबीसी जाति जो है जिसमें गुर्जर, सैनी, लोधी समेत सारे अन्य वर्ग बीजेपी के साथ हैं। बीते परिदृश्य पर नजर डाला जाए जिसमें सपा के कार्यकाल में ही ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपराधी मफियाओं का बोलबाला था, लेकिन यूपी की कमान योगी आदित्यनाथ के संभालने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्राइम फ्री हो गया। इतना ही नहीं बीजेपी ने गरीब किसानों के लिए कई जनहितैषी योजना भी लाई जिसमें हर गरीब किसान भाई को किसान सम्मान निधि, हर गरीब किसान को पक्के छत प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत, उज्जवला योजना जैसे अनेकों योजनाओं से बीजेपी ने गरीब किसानों को मजबूती प्रदान किया।

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