राम मंदिर भूमि पूजन के लिए कर्नाटक के पुजारी ने निकाली थीं 5 तारीखें, 5 अगस्त पर लगी मुहर

NR Vijayendra Sharma: कर्नाटक के बेलगावी के पंडित एनआर विजयेंद्र शर्मा ने राम मंदिर भूमि पूजन के लिए 5 तारीखें दी थीं। आखिर में जाकर 5 अगस्त को भूमि पूजन होने जा रहा है।

Ram Mandir Bhoomi Pujan
Ram Mandir BHoomi Pujan राम मंदिर की नींव में रखी जाएगी चांदी की ईंट 

मुख्य बातें

  • भूमि पूजन के लिए अप्रैल में अक्षय तृतीया को भी चुना गया था
  • लॉकडाउन के कारण इस दिन नहीं हो सका भूमि पूजन
  • भूमि पूजन के लिए 29 जुलाई, 31 जुलाई, 1 अगस्त और 5 अगस्त की तारीखें निकाली गईं

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन करेंगे। भूमि पूजन में चांदी की ईंट रखी जाएगी। राम मंदिर का भूमि पूजन एवं शिलान्यास एक खास शुभ मुहूर्त में होगा। मुहूर्त का 32 सेकेंड का समय बेहद शुभ एवं मांगलिक माना जा रहा है। दोपहर के समय मंदिर की आधारशिला रखी जाएगी। भूमि पूजन की तारीफ कर्नाटक के बेलगावी के पंडित एनआर विजयेंद्र शर्मा ने निर्धारित की है।

'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' की खबर के अनुसार, 75 वर्षीय पंडित शर्मा पिछले कई वर्षों से रामजन्म भूमि आंदोलन से जुड़े हुए हैं। उनसे इस साल फरवरी में आयोजकों द्वारा आयोजन की तारीख निर्धारित करने के लिए संपर्क किया गया था। आधारशिला रखने की रस्म के लिए उन्होंने इस साल अप्रैल में पड़ने वाली अक्षय तृतीया को चुना था। लेकिन कोविड महामारी की वजह से लॉकडाउन की घोषणा की गई और इस आयोजन को रोकना पड़ा।

पंडित शर्मा ने 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' को बताया, 'मैंने 29 जुलाई, 31 जुलाई, 1 अगस्त और 5 अगस्त समेत चार और तिथियां दी थीं। सभी चार मुहूर्त शुभ हैं और श्रावण मास में पड़ते हैं, जो हिंदू कैलेंडर में एक शुभ माह है। 5 अगस्त वास्तु मुहूर्त के लिए उपयुक्त है और भूमि पूजा के लिए आदर्श है। दोपहर 12 बजे से पहले नींव रखी जानी है, इसके बाद राहु काल में प्रवेश होता है।' 

पंडित शर्मा ने कहा कि वह स्वामी गोविंद देव गिरिजी के करीबी सहयोगी रहे हैं, जो राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों में से एक हैं। वह कई प्रमुख राजनेताओं के जाने-माने ज्योतिषी रहे हैं। उन्होंने पूर्व पीएम मोरारजी देसाई और अटल बिहारी वाजपेयी को भी सलाह दी है। एन आर विजयेंद्र शर्मा ने बताया, 'वास्तव में वाजपेयी के जन्मदिन के आधार पर मैंने उनके लिए पीएम के रूप में शपथ लेने की तारीख बताई थी।'

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के विद्वान और स्वर्ण पदक विजेता शर्मा आठ भाषाओं को जानते हैं। उन्होंने अपने शुरुआती दिन विजयपुरा में बिताए। वे उच्च शिक्षा के लिए वाराणसी गए और विद्वान गोपालचार्य गुरुजी के शिष्य बने, जिनके साथ उन्होंने देश भर में यात्रा की। उन्होंने कहा, 'मेरे गुरु आज यहां नहीं हैं, लेकिन मैंने जो कुछ भी हासिल किया है, वह उनकी वजह से है।'

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