नई दिल्ली/गुवाहाटी : नागरिकता संशोधन बिल 2019 में पर राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस चल रही है। इसी बीच असम समेत पूरे नॉर्थ ईस्ट बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। सरकार ने असम समेत पूर्वोत्तर राज्यों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 5,000 अर्धसैनिक बल के जवानों की तैनाती के लिए एयरलिफ्ट किया है। करीब 20 कंपनियों (2,000 जवान) को कश्मीर से वापस ले लिया गया है। इन जवानों 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 प्रावधानों को निरस्त करने के केंद्र के फैसले से ठीक पहले जम्मू-कश्मीर में तैनात किया गया था। जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया है।
अधिकारियों ने कहा कि शेष 30 कंपनियों को अन्य स्थानों से हटाकर पूर्वोत्तर राज्यों में ले जाया गया। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों को नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में तैनाती के लिए भेजा गया है।
गुवाहाटी के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सस्पेंड कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक असम के 10 जिलों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। प्रदर्शन की वजह से असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनेवाल एयरपोर्ट पर फंसे हुए हैं। असम में मौजूदा स्थिति को देखते हुए, असम सरकार लखीमपुर, धेमाजी, तिनसुकिया, डिब्रूगढ़, चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट, गोलाघाट, कामरूप मेट्रो, असम के कामरूप जिले में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं को निलंबित कर देगी, जो 11 दिसंबर को शाम 7 बजे से 12 दिसंबर, 2019 की शाम 7 बजे तक 24 घंटे के लिए होगी।
नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ बुधवार को हजारों लोग असम में सड़कों पर उतरे। राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प से राज्य में अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई है। हालांकि, किसी भी पार्टी या छात्र संगठन ने बंद, प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया है। सचिवालय के पास प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा बलों के साथ भिड़ंत हो गई। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के विज्ञापन वाले बैनरों को भी फाड़ दिया गया और सचिवालय के सामने उसमें आग लगा दी ।
गुवाहाटी में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठियां चलायीं और आंसू गैस के गोले छोड़े। छात्र नेताओं के मुताबिक, सचिवालय के सामने पुलिस की कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए। प्रशासन या पुलिस के अधिकारियों ने पुष्टि नहीं हो सकी, लेकिन खबरें मिली हैं कि गुवाहाटी, डिब्रूगढ़ और जोरहाट जैसे स्थानों पर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।
छात्रों ने जीएस रोड पर अवरोधक को तोड़ दिया जिसके बाद पुलिस ने लाठी चार्ज किया। छात्रों पर आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए जिसे पुलिसकर्मियों पर छात्रों ने उठाकर फेंका। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठियां चलायीं। प्रदर्शनकारियों ने रविवार को पीएम नरेंद्र मोदी और उनके जापानी समकक्ष शिंजो आबे के बीच होने वाली शिखर बैठक के लिए सड़क पर लगाए गए एक मंच को भी तोड़ दिया।
डिब्रूगढ़ शहर में एक पॉलिटेक्निक संस्थान के निकट प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। प्रदर्शनकारियों द्वारा की जा रही पत्थरबाजी में एक पत्रकार भी घायल हो गया। हालांकि, बुधवार को किसी भी संगठन ने बंद नहीं बुलाया है। लेकिन, जोरहाट, गोलाघाट, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, शिवसागर, बोंगाईगांव, नगांव, सोणितपुर और कई अन्य जिलों में सुबह लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर निकले।
अधिकारियों ने बताया कि सड़कों पर टायर जलाए गए हैं। वाहनों और ट्रेन की आवाजाही रोकने के लिए सड़कों और पटरियों पर लकड़ियों के कुन्दे रख दिए गये हैं। डिब्रूगढ़ में चौलखोवा में रेलवे पटरियों और सड़कों से प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज भी किया। जिले के मोरन में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया और रबड़ की गोलियां चलाई गईं। मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के गृह नगर चाबुआ में नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ मोटरसाइकिल रैली निकाली गई।
गुवाहाटी यूनिवर्सिटी, कॉटन यूनिवर्सिटी, और डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी, में बुधवार को होने वाली परीक्षाएं टाल दी गयीं। शैक्षाणिक संस्थानों के कैंपस सुनसान दिख रहे थे। कॉटन यूनिवर्सिटी के छात्र सोमवार रात से ही राज्य की राजधानी में अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे हैं। बुधवार की सुबह असम इंजीनियरिंग कॉलेज के भी छात्र उनके साथ आ जुड़े। जोरहाट और डिब्रूगढ़ में सारी दुकानें बंद हैं और सड़कों से वाहन नदारद रहे। लोगों ने दोनों जिलों के कई स्थानों पर रेल पटरी पर धरना दिया। शिवसागर के लकवा नगर में मोटरसाइकिल रैली निकाली गई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने लकवा में तेल के कुएं वाले इलाके में घुसने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
बिल के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने बुधवार को कई ट्रेनें रद्द कर दीं और राज्य से चलने वाली कई ट्रेनों की समय-सारिणी बदल दी। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुभानन चंदा ने एक बयान में कहा कि कम से कम 14 ट्रेनों को या तो रद्द कर दिया गया है या गंतव्य स्थान से पहले ही रोक दिया गया है या फिर ट्रेन परिचालन में बाधा को देखते हुए उनके रास्ते बदल दिए गए हैं।
दिल्ली में भी, पूर्वोत्तर के राज्यों के लोगों का एक समूह नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ बुधवार को प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर पहुंचा। प्रदर्शनकारियों ने विधेयक पर सरकार की आलोचना की और हम नागरिकता संशोधन बिल का करते हैं विरोध, हमें चाहिए न्याय जैसे नारे लगाए।
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