पंजाब कांग्रेस में सिद्धू के लिए मुश्किल होती राह? कैप्टन और बाजवा के साथ आने से बदले सियासी हालात

देश
किशोर जोशी
Updated Jun 21, 2021 | 13:16 IST

पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर कांग्रेस की आंतरिक कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। सियासी घमासान के बीच कैप्टन के धुर विरोधी भी साथ आ गए हैं।

Political situation changed for Navjot singh sidhu after Captain and Bajwa's togetherness
तो पंजाब कांग्रेस में सिद्धू के लिए मुश्किल हो रही है राह?  
मुख्य बातें
  • विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में सिद्धू को लेकर बनी है तनातनी
  • सिद्धू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिखा दिए अपने तेवर
  • पंजाब में गुटबाजी खत्म करने के तमाम प्रयास कर रहा है आलाकमान

नई दिल्ली: पंजाब में कांग्रेस आलाकमान आंतरिक कलह को खत्म करने के तमाम प्रयास कर रहा है लेकिन उसके बावजूद भी हालात वैसे ही बने हुए हैं। नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर कांग्रेस अभी तक कोई फैसला नहीं कर पाई है और विधानसभा चुनाव से पहले सिद्धू को अहम जिम्मेदारी देने के कयासों के बीच सीएम कैप्टन के धुर विरोधी माने जाने वाले राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा भी उनके साथ हो गए हैं।

सिद्धू के तेवर बरकरार

इस बीच बदलते राजनीतिक हालातों के बीच सिद्धू के तेवर भी तीखे हो गए हैं। सिद्धू भले ही खुलकर कुछ ना बोल रहे हों लेकिन इशारों ही इशारों में उन्होंने साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाले नहीं है। सिद्धू ने रविवार को कहा कि वह सिर्फ चुनाव में जीत के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शोपीस नहीं हैं। इतना ही नहीं सिद्धू ने कहा कि ब सिस्टम ने खुद को बदलने से इनकार कर दिया, तो मैंने सिस्टम ही ठुकरा दिया। सिद्धू के ये बयान यकीनन कांग्रेस आलाकमान के लिए भी चिंता का विषय रहेंगे। सिद्धू का यह बयान तब आया जब कांग्रेस आलाकमान पंजाब में गुटबाजी खत्म करने के तमाम प्रयास कर रहा है।

धुर विरोधी आए साथ
विधानसभा चुनाव से पहले सिद्धू को कोई बड़ा पद दिए जाने से पहले ही कांग्रेस के धुर विरोधी नेता एक हो गए हैं। राज्यसभा सांसद और सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के धुर विरोधी माने जाने वाले प्रताप सिंह बाजवा ने जो बयान दिया है उससे साफ प्रतीत होता है कि सिद्धू के खिलाफ लामबंदी शुरू हो गई है। बाजवा ने दो टूक कहा आप पार्टी में आए हैं तो कुछ समय दीजिए। पार्टी जो जिम्मेदारी आपको देती है उसे निभाइए। हालांकि बाजवा ने ये भी कहा कि वह यह नहीं कह रहे हैं कि सिद्धू को कोई ना दिया जाए। बाजवा ही नहीं कई कांग्रेस नेता जो कैप्टन के धुर विरोधी थे वो सिद्धू के मुद्दे पर कैप्टन के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।

क्या करेंगे सिद्धू
ऐसे समय जब सिद्धू के साथ कांग्रेस का कोई बड़ा खड़ा हुआ नहीं दिख रहा है, तो ऐसे में वह आगे क्या फैसला लेंगे यह देखना दिलचस्प होगा। इतना हीं नहीं तमाम अड़चनों के बाद कांग्रेस आलाकमान सिद्धू को विधानसभा चुनाव से पहले क्या जिम्मेदारी देता है इस पर भी सबकी नजर रहेगी। फिलहाल मंगलवार को कैप्टन अमरिंदर सिंह एक बार फिर आलाकमान से मिलने वाले हैं और इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के भी मौजूद रहने की उम्मीद है।

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