'यह कोर्ट के दखल का नतीजा', सभी के लिए नि:शुल्‍क टीकाकरण के पीएम मोदी के ऐलान पर बोले ओवैसी

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 21 जून से सभी के लिए नि:शुल्‍क टीकाकरण के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के हस्‍तक्षेप का परिणाम है।

नि:शुल्क टीकाकरण की PM की घोषणा कोर्ट के दखल का नतीजा: ओवैसी
नि:शुल्क टीकाकरण की PM की घोषणा कोर्ट के दखल का नतीजा: ओवैसी  |  तस्वीर साभार: PTI

मुख्य बातें

  • पीएम मोदी ने 21 जून से सभी के लिए नि:शुल्‍क टीकाकरण की घोषणा की है
  • ओवैसी ने कहा कि यह शीर्ष अदालत के हस्‍तक्षेप का नतीजा जान पड़ता है
  • अदालत ने केंद्र सरकार से वैक्‍सीन नीति की समीक्षा करने के लिए कहा था

नई दिल्‍ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश को संबोधित करते हुए टीकाकरण को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि टीकाकरण की जिम्‍मेदारी पूरी तरह अब केंद्र सरकार की होगी और 21 जून से सभी के लिए भारत सरकार राज्यों को नि:शुल्‍क वैक्सीन उपलब्ध कराएगी। उनकी इस घोषणा पर राजनीतिक हलके से तरह-तरह की प्रतिक्रिया है। इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप का परिणाम बताया।

'ये बदलाव सुप्रीम कोर्ट के दखल का नतीजा'

हैदराबाद के सांसद ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर कहा कि निजी अस्पतालों का 25 फीसदी कोटा जारी रहेगा, ताकि अमीर लोगों को आसानी हो, जबकि गरीबों को टीके की उपलब्धता का इंतजार करना होगा। उन्‍होंने अपने ट्वीट में कहा, 'एक और गैर-जरूरी भाषण के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद, जिसकी जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के जरिए भी दी जा सकती थी। टीका नीति को लेकर बदलाव उच्चत न्यायालय के आदेश का परिणाम जान पड़ता है। हालांकि भयानक टीका नीति का आरोप राज्यों पर मढ़ दिया गया। मोदी टीका आपूर्ति सुनिश्चित करने में नाकाम रहे।'

उन्होंने आरोप लगाया कि टीका उत्पादन बढ़ाने के लिए लेकर अप्रैल तक कोई पैसा खर्च नहीं किया गया और जुलाई तक टीके की 60 करोड़ खुराक के मुकाबले देश को प्रतिमाह केवल आठ करोड़ खुराक ही मिल पाईं।

शीर्ष अदालत ने दिया था समीक्षा का आदेश

यहां उल्‍लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में टीका नीति को 'मनमाना और अतार्किक' करार देते हुए केंद्र सरकार से इसकी समीक्षा करने को कहा था। न्यायालय ने कहा था कि राज्यों और निजी अस्पतालों को 18-44 साल के लोगों से टीके के लिए शुल्क वसूलने की अनुमति देना प्रथम दृष्टया 'मनमाना और अतार्किक' प्रतीत होता है। कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और निजी अस्पतालों के लिए वैक्‍सीन की अलग-अलग कीमतों को लेकर केंद्र सरकार से तल्ख सवाल पूछे थे।

केंद्र की टीकाकरण नीति की आलोचना करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा था कि अगर कार्यपालिका की नीतियों से नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा हो तो अदालतें मूकदर्शक नहीं बनी रह सकतीं।

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