Covid के छह महीने, 75.8 फीसदी लोग बोले- मोदी सरकार ने स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला

देश
आईएएनएस
Updated Sep 13, 2020 | 15:33 IST

12 सितंबर को आईं नई रीडिंग के अनुसार, तीन चौथाई लोगों ने कहा है कि मोदी सरकार ने कोरोना के बाद पैदा हुए हालातों को अच्छी तरह से संभाला है।

Over 75 % people in India say Modi govt handling COVID-19 crisis well Survey
Covid: 75.8 % लोग बोले PM मोदी ने सही तरीके से संभाले हालात 

मुख्य बातें

  • 75.8 फीसदी लोगों ने किया मोदी के महामारी से निपटने के तरीके का समर्थन
  • आईएएनएस सी वोटर कोविड -19 ट्रैकर ने भारत में किया एक तरह का पोल
  • 52.7 प्रतिशत लोगों ने तीन सप्ताह से अधिक राशन और दवाओं पर स्टॉक किया- सर्वे

नई दिल्ली: पिछले छह महीनों में 'आईएएनएस सी वोटर कोविड -19 ट्रैकर' ने इतिहास की सबसे खतरनाक महामारी के दौरान भारत के मूड को जाना और अब उसके डेटा और विश्लेषण को आपके साथ साझा कर रहा है। बता दें कि आईएएनएस सी वोटर कोविड -19 ट्रैकर भारत में किया गया एक तरह का पोल और ट्रैकर है जो महामारी, उसके प्रभाव और लोगों के मूड को कवर करता है। इन 6 महीनों के दौरान हफ्ते-दर-हफ्ते हम भारत के मूड में हो रहे बदलाव और उनकी तुलनाएं आपके लिए सामने लेकर आए। ये परिवर्तन हमने सरकार पर भरोसे, तैयारी का सूचकांक, आय और रोजगार में परिवर्तन और कोविड-19 लक्षणों के प्रसार जैसे पहलुओं पर आंके हैं।

सरकार को मिली हाई अप्रूवल रेटिंग 

पिछले छह महीनों के दौरान ट्रैकर में एक चीज स्थिर पाई गई और वो है कोविड -19 महामारी से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मिली हाई अप्रूवल रेटिंग। 12 सितंबर को आईं नई रीडिंग के अनुसार, तीन चौथाई लोगों ने कहा है कि मोदी सरकार ने इस स्थिति को अच्छी तरह से संभाला है। साथ ही सरकारी सूचकांक में लोगों का विश्वास भी मजबूत बना हुआ है। इसके मुताबिक 75.8 फीसदी उत्तरदाता मोदी सरकार के कामकाज से सहमत हैं जबकि 20.5 फीसदी उत्तरदाता असहमत हैं। इस तरह नेट सहमति का प्रतिशत 55.5 फीसदी है।

हालांकि, महामारी के पहले के महीनों में अप्रूवल रेटिंग अधिक नहीं रही और आर्थिक कठिनाई का दौर भी लंबे समय तक जारी रहा। इन महीनों के नंबर अप्रैल, मई और जून के महीनों में आए 80 और 90 प्रतिशत की ऊंचाई से बहुत दूर रहे। एक प्रश्न, "मुझे डर है कि मुझे या मेरे परिवार में किसी व्यक्ति को कोरोनावायरस हो सकता है" इस पर डर का सूचकांक 49.8 प्रतिशत सहमति में और 46.1 प्रतिशत की असहमति वाला है। इसका मतलब है कि वायरस का संक्रमण होने का डर ज्यादा लोगों में है।

लोगों में कोरोना का डर हुआ कम

यह संख्या अब पिछले महीनों की तुलना में बहुत कम है जो यह दर्शाती है कि लोगों में अब इसे लेकर डर कम है। बता दें कि नए ट्रैकर के लिए सैंपल साइज 4,853 है।हाल के महीनों में कोविड -19 मामले तेजी से बढ़े हैं और एक दिन में दर्ज हुए मामलों का नया रिकॉर्ड तो 95 हजार से अधिक मामले का है। ट्रैकर के एक अन्य सवाल, "मेरा मानना है कि कोरोनावायरस से खतरा अतिरंजित है", इस पर 56 प्रतिशत ने सहमति और 33.5 प्रतिशत ने असहमति जताई है। इसका मतलब है कि कुल मिलाकर 22.5 प्रतिशत इस बात से सहमत हैं कि खतरा अतिरंजित है। हालांकि कुल मामलों की संख्या 46.6 लाख के पार होने के बाद लोगों की ऐसी सोच आश्चर्यचकितकरने वाली है लेकिन रिकवरी दर मजबूत होने से लोग अब महामारी के साथ जीने लगे हैं।

इंडेक्स ऑफ प्रिपेयर्डनेस से पता चलता है कि 52.7 प्रतिशत लोगों ने तीन सप्ताह से अधिक राशन और दवाओं पर स्टॉक किया और 47.7 प्रतिशत ने इससे कम समय के लिए स्टॉक किया। हालांकि, रोजगार और आय के ²ष्टिकोण से खबर बहुत सकारात्मक नहीं है। उत्तरदाताओं में से 17.43 प्रतिशत ने कहा कि वे पूरी तरह से काम से बाहर हैं, 2.77 प्रतिशत ने कहा कि वे पूर्णकालिक काम कर रहे थे लेकिन अब अंशकालिक काम कर रहे हैं, वहीं 4.73 प्रतिशत ने कहा कि वे बिना वेतन के छुट्टी पर हैं या उनका काम रुका हुआ है और उन्हे कोई आय नहीं हो रही है।

6.88 प्रतिशत ने कहा कि वे घर से कर रहे हैं काम

 लगभग एक चौथाई या 22.94 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे नियमों के तहत काम कर रहे हैं, लेकिन उनके वेतन/आय में कमी आई है, 2.36 प्रतिशत ने कहा कि वे काम कर रहे हैं, लेकिन कोई वेतन या आय नहीं है, 1.52 प्रतिशत ने कहा कि उनके वेतन में कटौती हुई और 6.88 प्रतिशत ने कहा कि वे घर से काम कर रहे हैं लेकिन उनकी आय/वेतन कम हो गया है। वहीं आधे या 51.75 प्रतिशत से अधिक के परिवार के कामकाजी सदस्यों के वेतन और आय कम हो गई है। 5.42 प्रतिशत ने कहा कि वे घर से काम कर रहे हैं और समान वेतन या आय प्राप्त कर रहे हैं, जबकि 22.14 प्रतिशत ने कहा कि वे नियमों और सुरक्षा उपायों के तहत कार्यस्थल पर काम कर रहे हैं और उनका आय/वेतन पूर्ववत है।

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