Subhash Chandra Bose Jayati: इंडिया गेट पर नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का पीएम मोदी आज करेंगे अनावरण, जानें खासियत

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 23, 2022, 05:45 AM IST

Subhash Chandra Bose Jayanti 2022: पीएम मोदी आज इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण करेंगे। यह प्रतिमा उसी जगह लगेगी, जहां कभी किंग जॉर्ज पंचम की प्रतिमा लगी थी। जानिये क्‍या है होलोग्राफी तकनीक? 

Subhash Chandra Bose Jayati: इंडिया गेट पर नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का पीएम मोदी आज करेंगे अनावरण, जानें खासियत
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Subhash Chandra Bose statue at India Gate: देश आज (रविवार, 23 जनवरी, 2022) नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती मना रहा है। इस मौके पर इंडिया गेट पर उनकी होलोग्राम प्रतिमा लगाई जाएगी, जिसका अनावरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। नेताजी की यह प्रतिमा देश के महान सपूत के प्रति आभार के प्रतीक के तौर पर लगाई जा रही है। यहां नेताजी की ग्रेनाइट की प्रतिमा लगाई जानी है, लेकिन जब तक यह तैयार नहीं हो जाती, यहां होलोग्राम प्रतिमा लगाई जा रही है।

पीएम मोदी ने शुक्रवार को अपने ट्विटर अकाउंट के जरिये इसकी घोषणा की थी, जब उन्‍होंने कहा था कि नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का लोकार्पण वह 23 जनवरी को उनकी जयंती के अवसर पर करेंगे। उन्‍होंने नेताजी की ग्रेनाइट और होलोग्राम प्रतिमा की तस्‍वीरें भी शेयर की थीं। उन्‍होंने लिखा था, यह उनके प्रति देश के आभार का प्रतीक होगी। जब तक नेताजी की ग्रेनाइट की प्रतिमा बनकर तैयार नहीं हो जाती, तब तक वहां होलोग्राम प्रतिमा लगाई जाएगी।

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इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जो ग्रेनाइट की प्रतिमा लगाई जानी है, वह 28 फुट ऊंची और 6 फुट चौड़ी होगी। उसे इंडिया गेट पर उसी स्‍थान पर लगाया जाएगा, जहां कभी ब्रिटिश राजा जॉर्ज पंचम की प्रतिमा थी। किंग जॉर्ज पंचम की प्रतिमा वहां से 1968 में हटा दी गई थी। 

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क्‍या है होलोग्राम प्रतिमा?

होलोग्राम या होलोग्राफी एक तरह की डिजिटल तकनीक है। यह प्रोजेक्टर की तरह काम करता है, जिसमें किसी भी चीज को 3D आकार दिया जा सकता है। यह कई बार किसी भी चीज के असली होने का भ्रम भी देती है। इसे स्टेटिक किरणों के जरिये पेश किया जाता है। होलोग्राम तकनीक से बनी नेताजी की प्रतिमा को छुआ नहीं जा सकेगा। इसे सिर्फ देखा जा सकेगा। अगर इसे हाथों से छूने की कोशिश होती है तो आपको आपके हाथ हवा में लहराते नजर आएंगे, क्‍योंकि वहां प्रतिमा नहीं होगी। हालांकि कुछ दूरी से देखने पर वहां प्रतिमा के होने का एहसास होगा।

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