मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलेगी कुछ इस तरह की बुलेट ट्रेन, पहली झलक आई सामने [PICS]

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Dec 19, 2020, 06:38 AM IST

मुंबई-अहमदाबाद के बीच प्रस्‍तावित हाई स्‍पीड रेल परियोजना को रफ्तार मिलती दिख रही है। जापानी दूतावास ने E5 सीरीज की बुलेट ट्रेनों की तस्‍वीरें जारी की हैं, जिसमें कुछ बदलाव भारतीय परियोजना के लिए किए जाएंगे।

मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलेगी कुछ इस तरह की बुलेट ट्रेन, पहली झलक आई सामने [PICS]
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नई दिल्ली : देश में मुंबई और अहमदाबाद के बीच प्रस्‍तावित पहली बुलेट ट्रेन परियोजना को रफ्तार मिलती दिख रही है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'ड्रीम प्रोजेक्‍ट' बताया जाता है। इस परियोजना को पूरा करने के लिए 2023 तक का समय निर्धारित किया गया है। इस बीच जापानी दूतावास ने E5 Series Shinkansen बुलेट ट्रेन की तस्‍वीरें जारी की हैं, जिससे इसकी झलक मिलती है कि मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन किस तरह की होगी।

नई दिल्‍ली स्थित जापानी दूतावास ने बुलेट ट्रेन की जो तस्वीरें शेयर की हैं, उसमें कुछ बदलाव किए जाएंगे, ताकि इनका इस्‍तेमाल मुंबई-अहमदाबाद के बीच प्रस्‍तावित हाई स्‍पीड रेल परियोजना में रोलिंग स्टॉक के तौर पर किया जा सके। इस परियोजना के पूरा हो जाने के बाद यहां भारतीय रेल व्यवस्था को और रफ्तार मिलने की उम्‍मीद जताई जा रही है। इस परियोजना के पूरा हो जाने के बाद अहमदाबाद से मुंबई के बीच का सफर 2 घंटे 7 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।

मुंबई से अहमदाबाद के बीच हैं 12 स्‍टेशन

मुंबई-अहमदाबाद के बीच इस परियोजना पर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। 508 किलोमीटर की इस लंबी परियोजना के अंतर्गत 12 स्‍टेशन बांद्रा-कुर्ला कॉम्‍प्‍लेक्‍स, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, विल्लिमोरा, सूरत, भरूच, बड़ौदा, आनंद/नंदिया, अहमदाबाद और साबरमती तय किए गए हैं। इस बुलेट ट्रेन मार्ग की महाराष्‍ट्र में दूरी जहां 155.64 किलोमीटर होगी, वहीं दादर व नागर हवेली में 2 किलोमीटर और गुजरात में 350.53 किलोमीटर होगी।

इस परियोजना के पूरा हो जाने के बाद मुंबई से अहमदाबाद का सफर 2 घंटे 7 मिनट में किया जा सकेगा, जिस दौरान ट्रेन की गति 320 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी। हालांकि इस मार्ग पर निर्धारित सभी 12 स्टेशनों पर अगर ट्रेन रुकती है तो यात्रा पूरी करने में 2 घंटे 58 मिनट का समय लगेगा। इस परियोजना को 2023 तक पूरा करने का लक्ष्‍य निर्धारित किया गया है। महाराष्‍ट्र में इसके लिए भूमि अधिग्रहण पर किसानों के विरोध के कारण यह परियोजना विवादों में भी रही।

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