UP से सर्वाधिक 7 राज्य मंत्री, 3+3+1 फॉर्मूले से ओबीसी, दलित, ब्राह्मण समुदाय को साधने की कोशिश

कैबिनेट विस्तार से पहले यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि आगामी विधानसभा चुनाव और राज्य में ब्राह्मण की नाराजगी दूर करने के लिए राज्य से ब्राह्मण समुदाय के किसी बड़े नेता को मंत्री बनाया जा सकता है।

Modi Cabinet reshuffle: Seven ministers from Uttar Pradesh BL Verma Anupriya patel
मोदी मंत्रिमंडल में UP से सर्वाधिक 7 राज्य मंत्री। 

मुख्य बातें

  • मोदी मंत्रिमंडल का बुधवार को हुआ विस्तार, कुल 43 मंत्रियों ने शपथ ली
  • यूपी से सर्वाधिक 7 राज्य मंत्री बनाए गए, राज्य में अगले साल होने हैं चुनाव
  • 7 मंत्रियों में तीन ओबीसी, 3 दलित और 1 ब्राह्मण समुदाय से बना मंत्री

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में बुधवार शाम हुए विस्तार में 15 सांसदों को कैबिनेट एवं 28 सांसदों को राज्य मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। कुल 43 मंत्रियों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। खास बात यह है कि सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से इस मंत्रिमंडल विस्तार में किसी को कैबिनेट मंत्री नहीं बनाया गया है। हालांकि, राज्य मंत्री के रूप में शपथ लेने वाला कुल 28 मंत्रियों में सात मंत्री उत्तर प्रदेश से हैं। इस कैबिनेट विस्तार में राज्य मंत्रियों की सर्वाधिक संख्या यूपी से ही है। यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। कैबिनेट विस्तार में मोदी सरकार ने इस बात का पूरा ख्याल रखा है। जातिगत समीकरण वाले इस राज्य में मंत्रियों की नुमाइंदगी पर फैसला काफी सोच-विचारकर लिया गया है। 

यूपी से बनाए गए 7 राज्य मंत्री
यूपी से बनाए गए राज्य मंत्रियों में तीन सांसद पिछड़े वर्ग से आते हैं, जबकि तीन सांसद दलित समुदाय और एक ब्राह्मण समुदाय से हैं। उत्तर प्रदेश से सांसद पंकज चौधरी, अनुप्रिया पटेल, बीएल वर्मा, सत्यपाल सिंह बघेल, भानु प्रताप वर्मा, कौशल किशोर और अजय कुमार को राज्य मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई है। अभी इन मंत्रियों को विभागों का बंटवारा होना है। 

जितिन प्रसाद को नहीं मिली जिम्मेदारी
कैबिनेट विस्तार से पहले यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि आगामी विधानसभा चुनाव और राज्य में ब्राह्मण की नाराजगी दूर करने के लिए राज्य से ब्राह्मण समुदाय के किसी बड़े नेता को मंत्री बनाया जा सकता है। चर्चा कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए जितिन प्रसाद को मंत्री बनाए जाने की थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भाजपा ने उनकी जगह लखीमपुर खीरी क्षेत्र से दूसरी बार के सांसद अजय कुमार मिश्र टेनी को मंत्री बनाया है। अजय कुमार जमीनी एवं जुझारू नेता माने जाते हैं। 

पंकज चौधरी 
चौधरी यूपी के महराजगंज से सांसद हैं। सांसद के रूप में उनका यह छठवां कार्यकाल है। महराजगंज यूपी की प्रतिष्ठित सीट गोरखपुर के पास है। पंकज चौधरी को केंद्र में संतोष गंगवार के इस्तीफा देने के बाद मौका मिला है क्योंकि गंगवार भी कुर्मी समाज के हैं। यूपी में यादव समाज के बाद अन्य पिछड़ा वर्ग में कुर्मी बिरादरी की मजबूत भागीदारी है। चौधरी गोरखपुर के डिप्‍टी मेयर भी रह चुके हैं।

कौशल किशोर
कौशल यूपी के मोहनलालगंज से सांसद हैं। सांसद के रूप में उनका यह दूसरा कार्यकाल है। कौशल किशोर लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र से भाजपा से दूसरी बार सांसद हैं और पार्टी ने उन्हें दूसरी बार राज्य में अनुसूचित मोर्चा का अध्यक्ष भी बनाया है। वामपंथी पृष्ठभूमि से शुरुआती राजनीति करने वाले किशोर की पासी समाज में अच्छी पकड़ है। राज्‍य में गैर जाटव दलितों में पासी समाज की अच्छी तादाद है। 

एसपी बघेल
सत्यपाल सिंह बघेल आगरा से सांसद हैं। सांसद के रूप में उनका यह पांचवा कार्यकाल है। सांसद सत्यपाल सिंह बघेल इस बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित आगरा संसदीय क्षेत्र से भाजपा के सांसद चुने गये। इसके पहले वह 2017 में फिरोजाबाद की टूंडला सीट से विधानसभा के लिए चुने गये और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार में मंत्री भी रहे। बघेल इससे पहले समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी में भी रह चुके हैं।

बीएल वर्मा
वर्मा उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। सांसद के रूप में इनका यह पहला कार्यकाल है। उत्तर प्रदेश की पिछड़ी जातियों में लोधी समाज का भी प्रभाव काफी माना जाता है। भाजपा ने इस बार संगठन में प्रदेश उपाध्‍यक्ष रह चुके राज्‍यसभा सदस्‍य बीएल वर्मा को मौका दिया है क्योंकि बीएल वर्मा भी लोध समाज में अपनी मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं। भाजपा ने कल्‍याण सिंह के विकल्प के तौर पर बीएल वर्मा को हमेशा बढ़ावा दिया है। 

अजय कुमार
अजय कुमार यूपी के खीरी से सांसद हैं। इस सीट से वह दूसरी बार चुने गए हैं। लखीमपुर खीरी क्षेत्र से भाजपा के दूसरी बार के सांसद अजय कुमार मिश्र टेनी के राज्य मंत्री बनाकर भाजपा ने ब्राह्मण समुदाय में संदेश दिया है। अजय पार्टी के कैडर बेस कार्यकर्ता माने जाते हैं। पार्टी ने अपने कैडर बेस कार्यकर्ता को महत्व देकर ब्राह्मणों के साथ-साथ कार्यकर्ताओं को भी महत्व दिया है।

भानू प्रताप सिंह वर्मा
भानू प्रताप सिंह वर्मा यूपी की जालौन सीट से सांसद हैं। सांसद के रूप में उनका यह पांचवा कार्यकाल है। जालौन के भाजपा सांसद भानु प्रताप वर्मा अनुसूचित वर्ग के कोरी समाज से आते हैं। भानु प्रताप वर्मा कानपुर-बुंदेलखंड के प्रतिनिधित्व के तौर पर भी एक प्रमुख चेहरा हैं। विश्लेषक मानते हैं कि दलित चेहरों में पासी, कोरी और धनगर को मौका देकर भाजपा ने गैर जाटवों को महत्व देने का संदेश दिया है।

अनुप्रिया पटेल
पटेल यूपी की लोकप्रिय मिर्जापुर सीट से सांसद हैं। सांसद के रूप में उनका यह दूसरा कार्यकाल है। मिर्जापुर से भाजपा की सहयोगी अपना दल (एस) से दूसरी बार की सांसद अनुप्रिया पटेल पिछड़े वर्ग के कुर्मी समाज से हैं। मिर्जापुर इलाके सहित पूर्वांचल में कुर्मी समाज की तादाद काफी ज्यादा है। अनुप्रिया पटेल अपने पिता सोनेलाल पटेल के बाद अपने समाज की एक बड़ी नेता के रूप में उभरी हैं। 


 

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