Migrant Workers: अर्थशास्त्रियों के बाद अब प्रवासी मजदूरों से बातचीत करेंगे राहुल गांधी, टीजर जारी

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शनिवार को प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर बातचीत करेंगे। कांग्रेस ने इस पर टीजर भी जारी किया है,वीडियो में केंद्र सरकार की नीतियों पर निशाना भी साधा गया है।

Migrant Workers: अर्थशास्त्रियों के बाद अब प्रवासी मजदूरों से बातचीत करेंगे राहुल गांधी, टीजर जारी
राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद 

मुख्य बातें

  • प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर शनिवार को बात करेंगे राहुल गांधी
  • राहुल गांधी के यू ट्यूब चैनल पर शनिवार को कार्यक्रम प्रसारित होगा
  • रघुराम राजन और अभिजीत बनर्जी से पहले ही हो चुके हैं रूबरू

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी एक बार फिर शनिवार सुबह 9 बजे प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर रूबरू होंगे। इसके लिए उन्होंने टीजर भी जारी किया है जिसमें वो प्रवासी श्रमिकों से उनकी दिक्कतों के बारे में पूछते हैं रास्ता पूछते हैं और उसका समाधान भी बताते हैं। यहां यह जानना जरूरी है कि जब राहुल गांधी हाल ही में दिल्ली में कुछ प्रवासी मजदूरों के साथ बैठकर बातचीत की तो वो समाचारों की सुर्खियां बनीं और इसके साथ ही बीजेपी ने उन्हें खासतौर पर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने निशाना साधा। निर्मला सीतारमण ने तो यहां तक कहा कि अच्छा होता कि वो उन मजदूरों का बैग लेकर कुछ कदम भी चले होते। लेकिन फोटो सेशन और जमीन पर काम करने में फर्क होता है।

प्रवासी श्रमिकों से रूबरू होंगे राहुल गांधी

केंद्र सरकार के 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इसे कोई राहत का पैकेज कैसे कह सकता है यह तो कर्ज वाला पैकेज है। आज जब लोगों को कैश की जरूरत है तो सरकार कर्ज बांट रही है। शनिवार को औपचारिक प्रसारण से पहले कुछ दिनों पहले वो प्रवासी श्रमिकों के एक समूह से मिले थे जो हरियाणा से अपने घर यूपी के झांसी जा रहे थे। वो उन प्रवासी मजदूरों के साहस, संघर्ष के बारे में बातचीत करेंगे और आम लोगों के सामने मजदूरों की पीड़ा बयान करेंगे। 

 
केंद्र के आर्थिक पैकेज पर कांग्रेस को है ऐतराज

कोरोना काल में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई चरणों मे एमएसएमई से लेकर अलग अलग क्षेत्रों के लिए ऐलान किया । लेकिन कांग्रेस का कहना है कि आखिर जब लोगों के पास पैसे नहीं हैं तो सामान कौन खरीदेगा। इसके साथ ही आज लोगों के हाथों में पैसे की जरूरत है। सरकार को डॉयरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए आम लोगों को मदद पहुंचाने की जरूरत है। लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो रहा है और उसका असर दिखाई भी दे रहा है। 

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