Heat Wave: दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई इलाके लू की गिरफ्त में, क्या पड़ोसी देश पाकिस्तान है जिम्मेदार

दिल्ली- एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई इलाके लू का सामना कर रहे हैं। इसके पीछे क्या पाकिस्तान से आने वाली गर्म हवाएं जिम्मेदार हैं, या कोई और वजह है।

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दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई इलाके लू की गिरफ्त में, क्या पड़ोसी देश पाकिस्तान है जिम्मेदार 

मुख्य बातें

  • दिल्ली- एनसीआर में पारा 40 के पार, लू का सामना कर रहे हैं लोग
  • 40 से 4 डिग्री अधिक पारा लू और उससे अधिक भीषण लू
  • जमीन की सतह से करीब 5 किमी ऊपर गर्म हवाएं मानसून को कर रही हैं कमजोर

पिछले एक हफ्ते से लू के गर्म थपेड़ों से सामना कर रहे दिल्ली और एनसीआर में रहने वालों को थोड़ी राहत मिली। शुक्रवार की शाम को अंधड़ और बारिश ने तपीश से राहत दी हालांकि उमस का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली और एनसीआर में मानसून आम तौर पर जून के आखिरी हफ्ते  में आता है। लेकिन इस दफा मौसम में असामान्य बदलाव देखा जा रहा है। दिल्ली और एनसीआर लू का सामना कर रहे हैं। मौसम विभाग के जानकारों का कहना है कि अभी मानसून दिल्ली और एनसीआर के बादलों में नहीं है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर ऐसी कौन सी वजह से जिससे 

गर्मी के लिए पाक से आने वाली गर्म हवा जिम्मेदार
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश लाने वाले मौसमी तंत्र का अभाव और पाकिस्तान से आने वाली गर्म हवा उत्तर भारत के कई हिमालयी और पहाड़ी क्षेत्रों में बृहस्पतिवार को असामान्य रूप से ज्यादा तापमान का कारण हो सकती है।देश के सबसे ठंडे स्थानों में से एक लद्दाख के द्रास में तापमान जहां शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे तक चला जाता है वहां तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

उत्तर भारत के कई इलाके लू की चपेट में 
भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा बृहस्पतिवार को जारी बुलेटिन के मुताबिक उत्तर भारत के कई इलाके लू और भीषण लू जैसे स्थितियों का सामना कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के ऊना में तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से सात डिग्री सेल्सियस ज्यादा है वहीं सोलन में पारा 35.5 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से छह डिग्री ऊपर था। लद्दाख भी लू का सामना कर रहा है।

द्रास में तापमान 22.6 डिग्री तो नुब्रा के थोइसे में यह 31 डिग्री सेल्सियस रहा। बुलेटिन के मुताबिक स्ताकना में तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस,लेह में 25.7 डिग्री सेल्सियस, कारगिल में 28.5 डिग्री सेल्सियस और आधार शिविर में 23.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में आम तौर पर मानसून पूर्व के दिनों में लू या भीषण लू जैसी स्थितियां देखी जाती हैं। कई बार पहाड़ी इलाकों में भी ऐसी स्थितियां देखने को मिलती हैं।


पहाड़ी इलाकों में मानसून पहले से ही कमजोर
आम तौर पर ठंडे रहने वाले हिमालयी इलाकों में सामान्य से ज्यादा तापमान के बारे में पूछे जाने पर आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय मोहपात्रा ने कहा कि इन इलाकों के लिये लू का सामना करना असामान्य बात नहीं है। उन्होंने कहा, हालांकि इन इलाकों में दर्ज तापमान सामान्य नहीं हैं।मोहपात्रा ने कहा कि इस क्षेत्र में मानसून पहले ही कमजोर है। इसने तापमान को सामान्य से ऊपर पहुंचा दिया है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर, लद्दाख, असम और अरुणाचल प्रदेश में जून-जुलाई में अधिकतम तापमान दर्ज किया जाता है।

पश्चिमी विक्षोभ में नमी की कमी
लू पर काम कर रहे आईएमडी के वैज्ञानिक नरेश कुमार ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में तापमान सामान्य से ऊपर जाने की संभावित वजह पाकिस्तान से आने वाली गर्म हवाएं हो सकती हैं। उदिन्होंने कहा कि अगर हवाएं ऊपरी स्तर पर पांच से छह किलोमीटर पर बह रही हों तब पहाड़ी क्षेत्रों में मौजूदा लू जैसे हालात की एक वजह यह हो सकती है। कुमार ने कहा कि यह हवा मैदानी इलाकों में तापमान बढ़ने की वजह है। आईएमडी ने बृहस्पतिवार को अगले दो दिनों के लिये लू की चेतावनी जारी की थी।मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने वाली निजी एजेंसी स्काइमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पालावत ने कहा कि लद्दाख में कम बारिश हुई और वहां फिलहाल कोई मौसमी तंत्र सक्रिय नहीं है जिससे उत्तर भारत में नमी आए।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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