जम्मू-कश्मीर पुलिस में हेड कांस्टेबल रहे अब्दुल राशिद कलास को कीर्ति चक्र, बिलाल अहमद माग्रे को भी मरणोपरांत शौर्य चक्र

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Nov 23, 2021, 06:41 PM IST

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में लेफ्टिनेंट जनरल सीपी मोहंती को परम विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया। लेफ्टिनेंट जनरल कंवल जीत सिंह ढिल्लों को उत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया गया।

जम्मू-कश्मीर पुलिस में हेड कांस्टेबल रहे अब्दुल राशिद कलास को कीर्ति चक्र, बिलाल अहमद माग्रे को भी मरणोपरांत शौर्य चक्र
Photo Credit: ANI

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर पुलिस के हेड कांस्टेबल अब्दुल राशिद कलास को 2019 में पुलवामा में एक ऑपरेशन के दौरान आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शामिल होने और उन्हें खत्म करने में अनुकरणीय साहस दिखाने के लिए मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। उनकी पत्नी तसलीमा बेगम ने दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से पुरस्कार प्राप्त किया। 

जम्मू-कश्मीर के एसपीओ बिलाल अहमद माग्रे को भी 2019 में बारामूला में एक आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद नागरिकों को निकालने और आतंकवादियों को उलझाने में अदम्य साहस दिखाने के लिए मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। उनकी मां सारा बेगम ने पुरस्कार प्राप्त किया। 

इसके अलावा लेफ्टिनेंट जनरल सीपी मोहंती ने नई दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से परम विशिष्ट सेवा पदक प्राप्त किया। लेफ्टिनेंट जनरल कंवल जीत सिंह ढिल्लों ने उत्तम युद्ध सेवा पदक प्राप्त किया। 

इससे पहले पिछले साल जून में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीन के हमले के खिलाफ भारतीय सैनिकों का नेतृत्व करने वाले 16वीं बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग अधिकारी कर्नल बिकुमल्ला संतोष बाबू को मरणोपरांत महावीर चक्र से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सम्मानित किया। बाबू की पत्नी बी संतोषी और मां मंजुला ने पुरस्कार ग्रहण किया। परमवीर चक्र के बाद महावीर चक्र युद्धकाल का दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। चार अन्य सैनिकों, नायब सूबेदार नुदुरम सोरेन, हवलदार (गुन्नूर) के पलानी, नायक दीपक सिंह और सिपाही गुरतेज सिंह को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया। उन्होंने पिछले साल 15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में चीनी सैनिकों से लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। 3 मीडियम रेजिमेंट के हवलदार तेजिंदर सिंह गलवान घाटी में हुई झड़प में भारतीय थल सेना की टीम का हिस्सा थे। उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया है। वीर चक्र युद्धकाल के लिए देश का तीसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। 

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