असम के नए मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा के सामने कई चुनौतियां, कुछ मुद्दों पर स्पष्ट की आगे की रणनीति

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Updated May 10, 2021 | 16:24 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

Himanta Biswa Sarma: असम के नए मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा के सामने कई चुनौतियां है। सबसे पहले उन्हें कोरोना वायरस महामारी से निपटना होगा। कई मुद्दों को लेकर उन्होंने अपना पक्ष भी सामने रखा है।

Himanta Biswa Sarma
हेमंत बिस्वा सरमा, असम के मुख्यमंत्री 

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता  और पूर्वोत्तर प्रजातांत्रिक गठबंधन के संयोजक हेमंत बिस्वा सरमा ने आज असम के 15वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल जगदीश मुखी ने उन्हें श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। उन्होंने असमी भाषा में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। कोविड-19 के सख्त प्रोटोकॉल के बीच उनके साथ 14 और विधायकों ने शपथ ली। असम की 126 सदस्यीय विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन को 75 सीटें मिली हैं। भाजपा को 60 सीटें मिली हैं जबकि उसके गठबंधन साझेदार असम गण परिषद (एजीपी) व यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) को क्रमश: नौ और छह सीटें मिली हैं।

अभी कोरोना सबसे बड़ी चुनौती

सत्ता में वापसी के बाद भी बीजेपी ने अपना मुख्यमंत्री बदला है। ऐसे में सवाल है कि आखिर हेमंत बिस्वा सरमा के सामने कौन-कौन सी चुनौती हैं, जिनसे उन्हें पार पाना है। सबसे पहले उन्हें कोविड 19 संकट से उभरना होगा। उन्होंने कहा भी है कि असम में कोविड की स्थिति चिंताजनक है। हमने देखा है कि हर दिन आने वाले नए मामले लगभग 5000 को पार कर चुके हैं। कल जब हम कैबिनेट की पहली बैठक करेंगे तो हम सभी दृष्टिकोण से कोविड की स्थिति पर चर्चा करेंगे और हम कोविड प्रकोप को रोकने के लिए आवश्यक सभी उपाय करेंगे।

उन्होंने कहा, 'जब तक असम में कोविड की स्थिति नियंत्रित नहीं होगी, तब तक नॉर्थ ईस्ट की स्थिति कभी भी नियंत्रण में नहीं आएगी। हमने अपने नागरिकों और पूरे पूर्वोत्तर के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई है। इसलिए, असम सरकार अपना सर्वश्रेष्ठ और करेगी और कल होने वाली कैबिनेट मीटिंग के बाद मैं हमारी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दूंगा।'

विद्रोही गुटों से शांति की अपील

इसके अलावा उन्होंने अपना लक्ष्य बताते हुए कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य अगले पांच सालों में प्रदेश को देश के शीर्ष पांच राज्यों में से एक बनाना है। सरमा ने कहा कि असम में दूसरी बार बनी भाजपा की सरकार का मुख्य ध्यान कोविड-19 महामारी को नियंत्रित करने, सभी वादों को पूरा करने तथा राज्य को वार्षिक बाढ़ के संकट से मुक्त करने पर है। वहीं सरमा ने राज्य में शांति के लिए विद्रोही गुटों, खासकर उल्फा (आई) से हथियार डालकर मुख्य धारा का हिस्सा बनने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा, 'मैं परेश बरुआ से अनुरोध करता हूं कि बातचीत की मेज पर आएं और मुद्दों को सुलझाएं। अपहरण और हत्याओं से समस्याएं जटिल बनती हैं, सुलझती नहीं हैं। मुझे उम्मीद है कि हम अगले पांच वर्षों में भूमिगत विद्रोहियों को मुख्यधारा में लौटने के लिये तैयार कर लेंगे।'

NRC पर रखा पक्ष

विवादास्पद राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार असम के सीमावर्ती जिलों में 20 प्रतिशत नामों और अन्य इलाकों में 10 प्रतिशत नामों का पुन: सत्यापन चाहती है। उन्होंने कहा कि अगर बेहद नगण्य गलतियां पाई गईं तब हम मौजूदा एनआरसी के साथ आगे की कार्यवाही कर सकते हैं। लेकिन, अगर व्यापक विसंगतियां हैं तो मुझे लगता है कि अदालत संज्ञान लेगी और नए दृष्टिकोण के साथ आगे का काम करेगी। 

और भी हैं चुनौतियां

इन सभी मुद्दों के अलावा उनके सामने नॉर्थ ईस्ट में बीजेपी के विस्तार को और बढ़ाना भी चुनौती है। पिछले कुछ सालों में उन्होंने इस ओर काफी काम किया है, जिससे बीजेपी को काफी लाभ हुआ है। इसी के लिए वो पूर्वोत्तर प्रजातांत्रिक गठबंधन के संयोजक भी है। ऐसे में उनके सामने सरकार और पार्टी को लेकर काफी चुनौतियां हैं। अब देखना है कि वो किस तरह आगे बढ़ते हैं और उनकी कार्यशैली किस तरह असम को फायदा पहुंचाती है।
 

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