जारी रहेगा आंदोलन, किसान नेता दर्शन पाल बोले- 29 नवंबर को संसद तक निकाला जाएगा ट्रैक्टर मार्च 

देश
किशोर जोशी
Updated Nov 20, 2021 | 16:42 IST

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शुक्रवार को ही तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान करते हुए किसानों से अपने घर लौटने की अपील की थी। ऐसा लगता है कि किसान अभी इस पर राजी होने को तैयार नहीं हैं।

Farmer leaders Darshan Pal says proposed tractor march to Parliament not withdrawn yet, agitation will continue
जारी रहेगा किसानों का आंदोलन, संसद तक निकलेगा ट्रैक्टर मार्च 
मुख्य बातें
  • तीन विवादित कानून वापस लेने के बाद भी अपने प्लान पर कायम हैं किसान
  • लखनऊ में होगी महापंचायत और 29 नवंबर को संसद तक निकलेगा ट्रैक्टर मार्च भी
  • एमएसपी पर लिखित गारंटी नहीं मिलती, ये आंदोलन जारी रहेगा - दर्शन पाल, किसान नेता

नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार ने तीन विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर लिया है लेकिन किसानों का आंदोलन जारी है और भविष्य में भी इसके खत्म होने के आसार कम हैं। किसानों ने अपनी 22 नवंबर की लखनऊ में प्रस्तावित महापंचायत और 29 नवंबर को प्रस्तावित ट्रैक्टर मार्च को जारी रखने का फैसला किया है। किसानों ने साफ कहा है कि अभी एमएसपी सहित कुछ और मांगें हैं जिनका समाधान होना जरूरी है।

जारी रहेगा आंदोलन

संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक के बाद किसान नेता और क्रांतिकारी किसान यूनियन के दर्शन पाल सिंह ने कहा, 'आज की बैठक में फैसला लिया गया कि हमारे 22, 26 और 29 नवंबर को जो कार्यक्रम होने वाले हैं वो जारी रहेंगे। 22 को लखनऊ रैली, 26 को पूरे देश में किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने पर जश्न मनाया जाएगा और 29 को ट्रैक्टर मार्च (संसद तक) होगा। आंदोलन जारी रहेगा।'

कई मुद्दे अभी लंबित

दर्शन पाल ने आगे कहा, 'कृषि कानूनों के अलावा हमारे और भी मुद्दे हैं, विशेष रूप से एमएसपी, हमारे खिलाफ मामलों को वापस लेना, बिजली विधेयक 2020 और वायु गुणवत्ता अध्यादेश को वापस लेना, और हमारे मरने वाले दोस्तों के लिए एक स्मारक हेतु एक स्थान का आवंटन लंबित है। हमें उम्मीद है कि सरकार मुद्दों को हल करने के लिए बैठक बुलाएगी।'

शुक्रवार को पीएम ने की थी घोषणा

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस लेगी और इस तरह सरकार ने किसानों की मांग को मान लिया। संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रधानमंत्री के फैसले का स्वागत किया लेकिन कहा कि वे इस घोषणा के संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से प्रभाव में आने तक की प्रतीक्षा करेंगे। उसने यह संकेत भी दिया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की वैधानिक गारंटी और विद्युत संशोधन विधेयक को वापस लेने की मांग के लिए उसका आंदोलन जारी रहेगा।
 

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