Delhi: केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री ने खोली मनीष सिसोदिया के दावों की पोल, कहा- 'शिक्षा के क्षेत्र में काम कम और प्रचार ज्यादा करती है दिल्ली सरकार'

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jun 4, 2022, 08:36 AM IST

Delhi: केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने शुक्रवार को कहा कि नेशनल अचीवमेंट सर्वे 2021 की प्रदर्शन रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में पढ़ने वाले बच्चों का शिक्षा स्तर राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।

Delhi: केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री ने खोली मनीष सिसोदिया के दावों की पोल, कहा- 'शिक्षा के क्षेत्र में काम कम और प्रचार ज्यादा करती है दिल्ली सरकार'
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Delhi: गुजरात के सरकारी स्कूलों पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के हालिया ट्वीट का जवाब देते हुए केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी (MoS Annapurna Devi) ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार पर शिक्षा के क्षेत्र में काम कम और प्रचार ज्यादा करने का आरोप लगाया। एक वीडियो मैसेज में शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि नेशनल अचीवमेंट सर्वे 2021 की प्रदर्शन रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में पढ़ने वाले बच्चों का शिक्षा स्तर राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए।

'दिल्ली में पढ़ने वाले बच्चों का शिक्षा स्तर राष्ट्रीय औसत से काफी कम'

उन्होंने आगे कहा कि मैं आपको (सिसोदिया) सलाह देती हूं कि वोट के लिए इधर-उधर भागने के बजाए आपको राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही कहा कि जब ​​भी मुश्किल समय आता है, तो ये एक परंपरा है कि आम आदमी पार्टी सामना करने के बजाए समस्याओं से दूर भागने की कोशिश करती है।

'सामना करने के बजाए समस्याओं से दूर भागने की कोशिश करती है आम आदमी पार्टी'

शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने ट्वीट कर कहा कि आत्ममुग्धता लाइलाज बीमारी है, जिससे "आप" ग्रसित हैं। धूल आपके चेहरे पर है और आपके दर्पण को दोष दिया जा रहा है। नेशनल अचीवमेंट सर्वे को जो दिखा, वही दिखाया और "आप" खफा हुए जा रहे हैं। उन्होंने आगे एक ट्वीट में कहा कि दरअसल नेशनल अचीवमेंट सर्वे 2021 की रिपोर्ट में दिल्ली का प्रदर्शन कई विषयों और कई कक्षाओं में राष्ट्रीय औसत की तुलना में बहुत खराब था। कुछ मामलों में वे नीचे की रेखा पर संघर्ष कर रहे हैं। करोड़ों के विज्ञापनों से चमके चेहरे पर एक धब्बा था, इसलिए अब वे  नेशनल अचीवमेंट सर्वे को दोष दे रहे हैं।

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