कभी सेना में जाना चाहते थे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पिता की मौत ने तोड़ दिया था सपना

राजनाथ सिंह के साथ सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे भी इस दौरे पर साथ थे। यहां रक्षा मंत्री ने सैनिकों से भी मुलाकात की।

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सेना के जवानों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह   |  तस्वीर साभार: Twitter
मुख्य बातें
  • सेना में जाने के लिए राजनाथ सिंह ने दी थी परीक्षा
  • सैन्य कर्मियों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कही ये बात
  • राजनाथ सिंह ने भारत-चीन गतिरोध के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा दिखाई गई वीरता को भी किया याद

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि उनका बचपन का सपना था कि वो सेना में जाएं, इसके लिए उन्होंने बकायदा परीक्षा भी दी थी, लेकिन पारिवारिक समस्याओं के कारण यह सपना पूरा नहीं हो सका।

इम्फाल में असम राइफल्स और भारतीय सेना के 57वें माउंटेन डिवीजन के कर्मियों को संबोधित करते हुए, राजनाथ सिंह ने ये बातें बताई। उन्होंने कहा- "मैं अपने बचपन की एक कहानी साझा करना चाहता हूं। मैं भी सेना में शामिल होना चाहता था और एक बार मैंने शॉर्ट सर्विस कमीशन की परीक्षा भी दी थी। मैंने लिखित परीक्षा दी थी, लेकिन मेरे परिवार में कुछ स्थितियों के कारण, जिसमें मेरे पिता की मृत्यु भी शामिल है, मैं सेना में शामिल नहीं हो सका।"

उन्होंने आगे कहा कि वर्दी का मतलब ही अलग होता है। इस वर्दी में काफी ताकत है। उन्होंने कहा- "आप देखेंगे, अगर आप किसी बच्चे को सेना की वर्दी देते हैं, तो उसका व्यक्तित्व बदल जाता है। इस वर्दी में एक करिश्मा है।"

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ इस दौरे के दौरान सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे भी थे। यहां उन्होंने सैनिकों के साथ मुलाकात की और उनका हौसला भी बढ़ाया। इस दौरान राजनाथ सिंह ने भारत-चीन गतिरोध के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा दिखाई गई वीरता को भी याद किया। उन्होंने कहा- "जब भारत-चीन गतिरोध चल रहा था, आप सभी नहीं जानते होंगे, लेकिन मुझे पता है और उस समय के सेना प्रमुख हमारे जवानों द्वारा दिखाई गई वीरता और साहस को जानते हैं, देश हमेशा आपका ऋणी रहेगा।"

रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि उन्हें जब भी मौका मिलता है, वो सैनिकों से मिलते रहे हैं। उन्होंने कहा कि वो जहां भी जाते हैं, ये सुनिश्चत करते हैं कि सैन्य कर्मियों से मुलाकात जरूर हो। उन्होंने कहा कि सेना के जवानों से मिलना उन्हें गर्व की अनुभूति कराता है।

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रक्षा मंत्री ने कहा- "हालांकि डॉक्टर, इंजीनियर और चार्टर्ड अकाउंटेंट किसी न किसी रूप में देश के लिए योगदान दे रहे हैं, लेकिन मेरा मानना ​​है कि आपका पेशा एक पेशे से बढ़कर एक सेवा है।"

उन्होंने कहा कि असम राइफल्स कई लोगों को मुख्यधारा में लाने में एक प्रमुख भूमिका निभाता रहा है। राजनाथ सिंह ने कहा कि इसलिए इस बल को पूर्वोत्तर का प्रहरी कहा जाता है। 

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