गुवाहाटी : नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर बुधवार को जहां संसद के दूसरे सदन राज्यसभा में चर्चा जारी है, वहीं असम में इस पर विरोध रुकने का नाम नहीं ले रहा है। लोकसभा से विधेयक के सोमवार को पारित होने के बाद से ही इसके विरोध में सड़कों के उतरे लोगों का आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है और यह आज तीसरे दिन भी जारी है। इस बीच जम्मू-कश्मीर से कुछ अर्धसैनिक बलों को यहां बुलाने की रिपोर्ट भी है।
राज्यसभा में जहां इस पर बहस हो रही है, वहीं असम में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं, जिनमें से अधिकांश युवा छात्र प्रदर्शनकारी। कैब का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस के बीच बुधवार को राज्य सचिवालय के पास झड़प भी हुई।
राज्य के विभिन्न हिस्सों से छात्र राज्य सचिवालय की तरफ बढ़ रहे थे। छात्रों का एक समूह सचिवालय से करीब 500 मीटर दूर गणेशगुड़ी इलाके में पहुंच गया, जिसके बाद बेकाबू भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बलप्रयोग किया। प्रदर्शनकारी छात्रों की भीड़ ने जीएस रोड पर पुलिस की नाकेबंदी तोड़ दी, जिसके बाद पुलिस ने लाठी चार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी दागे। हालांकि प्रदर्शनकारी छात्र इससे पीछे नहीं हटे और उन्होंने भी पलटकर पुलिस पर आंसू गैस के गोले छोड़े।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि पुलिस के लाठीचार्ज में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। उन्होंने इसे राज्य में बीजेपी की अगुवाली वाली मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल सरकार की बर्बर कार्रवाई करार देते हुए साफ कहा कि वे तब तक किसी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे, जब तक कि नागरिकता संशोधन विधेयक को वापस नहीं लिया जाता।
गुवाहाटी में राज्य सचिवालय के पास पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प के अलावे डिब्रूगढ़ जिले से भी पुलिस व प्रदर्शनकारियों की झड़प की रिपोर्ट है, जहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले और रबड़ की गोलियां भी दागी। यहां पथराव की भी रिपोर्ट है, जिसमें एक पत्रकार घायल हो गए। इस बीच, जम्मू-कश्मीर से कुछ अर्धसैनिक बलों को यहां बुलाने की बात हो रही है।
माना जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य होने को देखते हुए सीआरपीएफ की कुछ कंपनियों को यहां से हटाने और असम में तैनात करने का फैसला लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, सीआरपीएफ की 10 कंपनियां जम्मू-कश्मीर से रवाना हो चुकी हैं, जबकि अन्य 20 कंपनियां असम में तैनात की जाएंंगी। इसके लिए एक विशेष ट्रेन भी शुरू करने की बात सामने आई है, ताकि सुरक्षाकर्मी आसानी से पूर्वोत्तर के इस राज्य पहुंच सकें।
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