ज्ञानवापी पर बोले असदुद्दीन ओवैसी, हम दूसरी मस्जिद नहीं खोने देंगे

ज्ञानवापी का उदाहरण देते हुए असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि सच तो यह है कि सभी पार्टियां मुसलमानों को डराने में जुटी हुई हैं।

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बाबरी मस्जिद पहले ही खो चुके हैं- असदुद्दीन ओवैसी 
मुख्य बातें
  • ज्ञानवापी के मुद्दे पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने साधी चुप्पी- ओवैसी
  • हम किसी भी कीमत पर अब दूसरी मस्जिदों को नहीं खोने देंगे
  • बाबरी मस्जिद पहले ही खो चुके हैं।

अदालत के आदेश पर ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सर्वे का काम शुरू हो चुका है। सर्वे के पहले दिन दो बड़े बयान आए। हिंदू पक्ष के वकील का कहना है कि कल्पना से ज्यादा है, यानी कि सर्वे में जो कुछ मिला है वो सोच से अधिक है तो दूसरी तरफ एआईएमआईएम मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि हम दूसरी मस्जिद नहीं खोने देंगे। हम बाबरी मस्जिद पहले ही खो चुके हैं। सभी पार्टियां मुस्लिमों को डराने में लगी हैं। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों चुप हैं। उन्होंने कहा कि देश में जिस तरह से नफरत का माहौल बनाया गया है उसकी वजह से आने वाले समय में सौहार्द को गंभीर खतरा पैदा होने वाला है। वोट बैंक की राजनीति के लिए एक वर्ग मुस्लिम समाज को डरा रहा है तो दूसरे धड़े जो अल्पसंख्यकों के दम पर सरकार में आने का सपना देखते हैं उनकी चुप्पी हैरान करने वाली है। 


कल्पना से ज्यादा सबूत

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में प्रवेश करने से पहले हिंदू पक्ष के अधिवक्ता मदन मोहन यादव ने कहा कि अधिवक्ता आयुक्त अजय मिश्रा ने सर्वे टीम के सभी सदस्योंको सुबह 7.30 बजे विश्वनाथ मंदिर परिसर के गेट नंबर-4 पर हाजिर होने का निर्देश दिया था।अधिकारियों के अनुसार परिसर की वीडियोग्राफी के लिए विशेष लाइट और कैमरे की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही सोहनलाल आर्या ने कहा कि वो ज्यादा कुछ कहेंगे तो अदालत की अवमानना होगी। लेकिन वो इतना जरूर कह सकते हैं कि जितना सोचा गया था उससे कहीं अधिक है। 

यथास्थिति रहे बरकरार-कांग्रेस
पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कांग्रेस के चिंतन शिविर से इतर संवाददाताओं से यह भी कहा कि धर्म सर्वेक्षण अधिनियम, 1991 को तत्कालीन पी वी नरसिंह राव सरकार ने इसी टकराव से बचने के लिए पारित किया था।उन्होंने ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी परिसर के वीडियोग्राफी सर्वेक्षण के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘धर्म स्थल अधिनियम, 1991 को गहन विचार-विमर्श करके पारित किया गया था। इससे रामजन्मभूमि को अलग रखा गया था। हमारा मानना है कि धार्मिक स्थल जिस स्थिति में हैं और थे, उसी स्थिति में रहने चाहिए। इनमें किसी तरह का बदलाव नहीं होना चाहिए अन्यथा बड़ा टकराव होगा। इसी टकराव को खत्म करने के लिए तत्कालीन नरसिंह राव सरकार ने इसे पारित किया था।

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