अमित शाह ने श्रीनगर में मंच पर से बुलेट प्रूफ शीशा हटवाया और लोगों से मिलने भीड़ में पहुंचे

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Oct 25, 2021, 04:50 PM IST

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर का दौरा किया। उन्होंने ने श्रीनगर की जनसभा में मंच पर पहुंचते बुलेट प्रूफ शीशा हटवाया और जनसभा में आए लोगों से मिलने उनके पास चले गए।

अमित शाह ने श्रीनगर में मंच पर से बुलेट प्रूफ शीशा हटवाया और लोगों से मिलने भीड़ में पहुंचे
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श्रीनगर : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर का दौरा किया। दौरे के आखिरी दिन उन्होंने ने श्रीनगर की जनसभा में मंच पर पहुंचते ही सबसे पहले bullet proof शीशा हटवाया। ये कश्मीर की जनता में उनके विश्वास और कश्मीर के हालात बदलने के लिए मोदी सरकार के संकल्प को दर्शाता है। जैसे ही जनसभा समाप्त हुई अमित शाह जनसभा में आए लोगों से मिलने के लिए चले गए। उन्होंने आज श्रीनगर में विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया और जनसभा को सम्बोधित किया।

उन्होंने कहा कि पिछले 7 वर्षों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार एक समृद्ध व पूर्ण विकसित नए जम्मू-कश्मीर की रचना के लिए निरंतर समर्पित भावना से कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में आज जम्मू-कश्मीर शांति, स्थिरता, विकास व समृद्धि के मार्ग पर चलकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में बढ़चढ़कर अपना योगदान दे रहा है। J&K की गरीब जनता को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर उनके जीवन में परिवर्तन लाने हेतु मोदी सरकार वचनबद्ध है।

इससे पहले उन्होंने आज गंदेरबल जिले में खीर भवानी मंदिर में पूजा-अर्चना की। मध्य कश्मीर जिले के तुल्लामुल्ला इलाके में चिनार के पेड़ों से घिरे मंदिर परिसर में गए। माता रागन्या देवी के मंदिर में पूजा-अर्चना की। 

उन्होंने कहा कि माता खीर भवानी मंदिर में मां के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। देशभर के कश्मीरी पंडित भाईयो-बहनों की आस्था का ये एक ऐसा अटूट केंद्र है जो पूरे राष्ट्र को प्रेरणा देता है। इस पवित्र स्थल में एक अद्भुत शक्ति है जिसकी अनुभूति यहां आकर निश्चित रूप से होती है। जय मां खीर भवानी!

उन्होंने कहा कि कश्मीर शुरू से ही भारत की समृद्ध विरासत का केंद्र बिंदु रहा है। सूफी संस्कृति भी उसी समृद्धता का एक भाग है, जो शांति और उदारवाद की प्रतीक है। आज उसी कड़ी में श्रीनगर में सूफी संतों से भेंट कर कश्मीर की शांति और सहअस्तित्व को पुनर्स्थापित करने के लिए एक व्यापक चर्चा की।

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