केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की सलाह, गुलामनबी आजाद और कपिल सिब्बल को बीजेपी में शामिल होना चाहिए

देश
ललित राय
Updated Sep 02, 2020 | 07:13 IST

Ramdas Athawale advise: केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने गुलामनबी आजाद और कपिल सिब्बल को सलाह दी है जिसके बाद एक बार फिर सियासी तीर चलने की संभावना बढ़ गई है।

 केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की सलाह, गुलामनबी आजाद और कपिल सिब्बल को बीजेपी में शामिल होना चाहिए
रामदास अठावले, केंद्रीय मंत्री और आरपीआई के अध्यक्ष 

मुख्य बातें

  • गुलाननबी आजाद और कपिल सिब्बल को कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल होना चाहिए- रामदास अठावले
  • अगर ऐसा होता है तो एनडीए एक बार फिर सत्ता में वापसी करेगी
  • दोनों लोगों की चिट्ठी से साफ है कि कांग्रेस में विरोध वाले विचार का सम्मान नहीं होता

नई दिल्ली। कांग्रेस के अंदर अब उस खत पर चर्चा करीब करीब खत्म हो चुकी है जिस पर 23 दिग्गजों ने दस्तखत किए थे। उस खत के जरिए गुलामनबी आजाद और कपिल सिब्बल की घेरेबंदी की गई। कांग्रेस की तरफ से सफाई आई कि हम तो लोकतांत्रिक पार्टी हैं और उसमें मतभेदों का भी सम्मान होता है। इस तरह के बयानों के जरिए कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की सबकुछ ठीक है। लेकिन केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने जो कुछ कहा उसके बाद सियासत गरमा सकती है। 

आजाद-सिब्बल को 'अठावले' सलाह
रामदास अठावले ने सुझाव दिया है कि गुलामनबी आजाद और कपिल सिब्ब्ल को कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो जाना चाहिए। वो कहते हैं कि अगर गुलामनबी आजाद, कपिल सिब्बल और दूसरे नेता जिन लोगों पर बीजेपी के साथ संबंध रखने का आरोप है अगर वो पार्टी का हिस्सा बनते हैं तो निश्चित तौर पर एनडीए फिर सत्ता में आ जाएगी। उन्होंने कहा कि इन नेताओं को ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो जाना चाहिए।

राहुल गांधी ने आजाद-सिब्बल का सम्मान नहीं किया
अठावले अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि यह एक सच है कि कांग्रेस के अंदर अध्यक्ष पद को लेकर विवाद है। राहुल गांधी इन दोनों नेताओं को आरोपित कर चुके हैं। ऐसे में बेहतर यही होगा दोनों लोग कांग्रेस छोड़ दे। यह बात सच है कि कांग्रेस के विस्तार में दोनों नेताओं की बड़ी भूमिका रही है लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। अगर दोनों को लगता है कि अब कांग्रेस में सम्मान नहीं है तो ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह अलग रास्ता चुनना चाहिए। वैसे तो सचिन पायलट ने भी कोशिश की थी। लेकिन वो समझौते के रास्ते पर चले गए। राहुल गांधी गलत हैं कि अगर वो इन लोगों की निष्ठा पर सवाल उठाते हैं। 

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