'मानसिक रूप से दिवालिया' हैं कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद : बीजेपी नेता

देश
रामानुज सिंह
Updated Sep 26, 2019 | 17:43 IST

बीजेपी ने कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद पर जोरदार हमला किया करते हुए कहा कि वह मानसिक रूप से दिवालिया हो गए हैं।

Ghulam Nabi Azad
Ghulam Nabi Azad  |  तस्वीर साभार: PTI

मुख्य बातें

  • कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि जम्मू और कश्मीर में लोकतंत्र नहीं है
  • उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 5 अगस्त को स्पेशल स्टेट्स का दर्जा देने वाला अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद यहां के लोग डर के साये में जी रहे हैं
  • इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सीनियर बीजेपी नेता और एमएलसी रमेश अरोड़ा ने कहा कि गुलाम नबी आजाद मानसिक रूप से दिवालिया हैं

जम्मू: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस के सीनियर नेता गुलाम नबी आजाद 'मानसिक रूप से दिवालिया' हैं। बीजेपी के तरफ से यह बयान उसके बाद आया जब आजाद ने कहा कि जम्मू और कश्मीर में लोकतंत्र नहीं है। गुलाम नबी आजाद ने बुधवार को कहा था कि जम्मू-कश्मीर में कोई लोकतंत्र नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पांच अगस्त को स्पेशल स्टेट्स का दर्जा देने वाला अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद यहां के लोग भय में जी रहे हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सीनियर बीजेपी नेता और एमएलसी रमेश अरोड़ा ने कहा कि गुलाम नबी आजाद मानसिक रूप से दिवालिया हैं क्योंकि वे कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र नहीं है।

उन्होंने कहा कि आजाद को बहुमत के फैसले का सम्मान करना चाहिए जिसने जम्मू-कश्मीर को स्पेशल स्टेट्स के दर्जे को खत्म किया और राज्य के दो संघ शासित प्रदेशों के विभाजन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वास्तव में, आजाद ऐसे शब्द बोल रहे हैं, जो लोकतंत्र की मूल भावना को खत्म करता है। पाकिस्तान इस दृष्टिकोण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश कर रहा है, क्योंकि यह उनके लिए उपयुक्त है। बीजेपी नेता ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व इस स्थिति की गंभीरता को समझने में विफल है।

उन्होंने कहा कि आजाद को यह बताना चाहिए कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में क्यों लेकर गए और और उनकी पार्टी में आंतरिक मुद्दे को सुलझाने की हिम्मत क्यों नहीं थी? अरोड़ा ने कहा कि आजाद को यह बताना चाहिए कि 1975 में लोकतंत्र की हत्या क्यों की गई जब शेख अब्दुल्ला को जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित किया गया था, जब सैयद मीर कासिम के नेतृत्व वाली कांग्रेस सत्ता में थी। यह लोकतंत्र की हत्या थी। 

उन्होंने 1975 में केंद्र की कांग्रेस सरकार द्वारा इमरजेंसी लागू करने पर भी आजाद पर आरोप लगाए। अरोड़ा ने कहा कि बीजेपी सरकार ने "कांग्रेस नेतृत्व द्वारा समय-समय पर किए गए बलंडर को ठीक करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि देश ने अनुच्छेद 370 को खत्म करने का स्वागत किया है।

आजाद ने बुधवार को राज्य के अपने छह दिवसीय दौरे का समापन करने पर मीडिया से बात करते हुए कहा था कि स्पेशल स्टेट्स में बदलाव के बाद राज्य में कहीं भी लोकतंत्र नहीं है। यह राज्य से गायब हो गया है। 

आजाद मंगलवार को श्रीनगर से जम्मू पहुंचे थे और मीडिया से बात करते हुए कहा था कि कश्मीर में निराशा है और जम्मू प्रांत में लोगों में भी निराशा व्याप्त है। अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और राज्य के दो संघों के विभाजन के कारण सत्तारूढ़ दल (बीजेपी) के 100 या 200 लोगों को छोड़कर, कोई भी खुश नहीं है। 

वह जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म किए जाने के बाद कश्मीर घाटी की अपनी पहली यात्रा पर शुक्रवार को राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी पहुंचे थे।

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