डराने वाला है ये अनुमान, फरवरी 2021 तक देश की आधी आबादी हो सकती हो कोरोना से संक्रमित

भारत सरकार द्वारा गठित समिति के अनुसार, अगले साल फरवरी तक भारत की आधी आबादी कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकती है। वर्तमान में 30 प्रतिशत आबादी के कोरोना से संक्रमित होने की आशंका है।

Coronavirus
भात में कोरोना वायरस  |  तस्वीर साभार: AP

मुख्य बातें

  • देश में कुल संक्रमितों की संख्या 75,50,273 है
  • इस महामारी से मृतकों की संख्या 1,14,610 है
  • विश्व भर में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की कुल संख्या चार करोड़ से अधिक

नई दिल्ली: कोरोना वायरस को लेकर चिंता बढ़ाने वाली बात सामने आई है। अगले साल फरवरी तक देश की आधी आबादी इस महामारी से संक्रमित हो सकती है। ऐसा सरकारी पैनल का अनुमान है। हालांकि यह बीमारी के प्रसार को धीमा करने में मदद कर सकता है। इसका मतलब ये हुआ कि फरवरी 2021 तक 65 करोड़ भारतीयों कोरोना वायरस हो चुका होगा। 

वर्तमान में देश में कोरोना वायरस के कुल मामले 75 लाख से अधिक हैं। संक्रमण के कुल मामलों में भारत दूसरे स्थान पर है, पहले पर अमेरिका है। हालांकि, भारत में कोरोनो वायरस संक्रमण के मामले कम हो रहे हैं।

कानपुर में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रोफेसर और समिति के सदस्य मनिंद्र अग्रवाल ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया, 'हमारे गणितीय मॉडल का अनुमान है कि वर्तमान में लगभग 30% आबादी संक्रमित है और फरवरी तक यह 50% तक जा सकती है।' समिति का अनुमान है कि केंद्र सरकार के सीरोलॉजिकल सर्वेक्षणों की तुलना में वायरस का मौजूदा प्रसार बहुत अधिक है। सीरो सर्वे में में दिखाया गया कि सितंबर तक केवल 14 प्रतिशत आबादी संक्रमित थी। 
 
वहीं सरकार द्वारा कोविड-19 पर नियुक्त एक समिति के अनुसार, यदि सभी प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है तो अगले साल की शुरुआत तक इस महामारी को नियंत्रित किया जा सकता है। दस सदस्यीय समिति ने कहा कि यदि हम सभी इन प्रोटोकॉल का पालन करते हैं, तो महामारी को अगले साल की शुरुआत में फरवरी के अंत तक संक्रमण के मामलों को कम से कम रखकर नियंत्रित किया जा सकता है। हम अभी तक इस महामारी के बारे में यह नहीं जानते कि यह किस विशेष मौसम में कैसा बर्ताव करेगा। समिति ने कहा कि आगामी त्यौहार और सर्दी का मौसम संक्रमण की संवेदनशीलता को बढ़ा सकता है। 

इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि बिना लॉकडाउन के कोरोना भारत को बुरी तरह से प्रभावित करता और जून तक मामलों की संख्या 1.40 करोड़ से अधिक हो गई होती। यदि भारत लॉकडाउन लागू करने के लिए मई तक इंतजार करता था, तो जून तक सक्रिय मामलों की संख्या लगभग 50 लाख हो गई होती।
 

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