बेहद महत्वपूर्ण है मोदी और पुतिन के बीच हुई मुलाकात, भारत के लिए है बेहद अहम, जानें इसका महत्व

देश
कुंवर हरिओम
Updated Dec 06, 2021 | 20:31 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय वार्ता में विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओ पर चर्चा की गई, जिससे दोनों देशों के मध्य स्थापित संबंधों को और बेहतर तरीके से सुधारा जा सके।

Modi-Putin Meeting
मोदी-पुतिन मुलाकात 
मुख्य बातें
  • प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ शिखर वार्ता की
  • कोविड-19 महामारी के बावजूद भारत और रूस के बीच संबंधों की गति में कोई बदलाव नहीं हुआ: मोदी
  • बैठक के लिए पुतिन एक संक्षिप्त यात्रा पर भारत आए हैं

देश की राजधानी दिल्ली में 21वें भारत-रशिया शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, जिसका प्रतिनिधित्व भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। इस सम्मेलन में 2+2 डायलॉग वार्ता में रूस के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन ने शिरकत की। विगत वर्ष इस सम्मेलन को कोरोना महामारी के भयंकर प्रकोप के कारण स्थगित कर दिया गया था। 2019 में ब्रासीलिया में हुए ब्रिक्स सम्मेलन के पश्चात दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के मध्य यह पहली मुलाकात थी। दोनों देशों के नेताओं के मध्य मुलाकातों का दौर एक सुव्यवस्थित श्रंखला में संपन्न हुआ, जिसमें दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ साथ रक्षा मंत्री व विदेश मंत्री भी शामिल रहे। भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। वहीं रूसी विदेश मंत्री सर्गे लवरोव और रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु इस वार्ता का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे।

इस द्विपक्षीय वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओ पर चर्चा की गई, जिससे दोनों देशों के मध्य स्थापित संबंधों को और बेहतर तरीके से सुधारा जा सके। शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के पारस्परिक हित से जुड़े महत्वूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया, जिसमें शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान एवं तकनीकी, अंतरिक्ष व सैन्य तकनीकी अभ्यास जैसे मुद्दों को शामिल किया गया। इसी के साथ एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक एग्रीमेंट पर भी वैश्विक स्तर पर चर्चा की गई व एक अन्य महत्वपूर्ण समझौता जो कि दस साल के लिए रक्षा सहयोग जारी रखने पर भी किया गया है।  

इस द्विपक्षीय वार्ता का मुख्य आकर्षण व्लादिमीर पुतिन द्वारा यात्रा से पहले ही एस-400 भारतीय रक्षा प्रणाली की 2 बैटरी भारत को सौंपना व इग्ला एस शाल्डर फायर्ड मिसाइल पर निर्णय लेना है। इसी के साथ आने वाले महीनों में इस क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों में साझेदारी में भी बढ़ोतरी मिलने की उम्मीद है क्योंकि जनवरी महीने में वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन में रूस के 11 गवर्नर भाग लेने आ रहे हैं। अगर देखा जाए तो वैश्विक स्तर पर दोनों देशों के मध्य व्यापारिक संबंध पुख्ता होने की संभावनाएं है।

रूस से संबंध अच्छे होना जरूरी

अब यह सवाल उठना लाजमी है कि क्यों यह मुलाकात पहले के मुकाबले ज्यादा महत्वपूर्ण व सफल मानी जा रही है? अगर तथ्यपूर्ण रूप से देखा जाए तो पुतिन के विगत पांच-छह वर्षों की यात्राओं की तुलना में इसे इसीलिए सफल माना जा रहा है, क्योंकि भारत अब यह समझने लगा है कि अमेरिका के साथ संबंध भविष्य में शायद पूर्णतया निर्भर नहीं रह सकते क्योंकि अमेरिका का क्वाड से औकस में स्थांतरित हो जाना भारत को यह दर्शाता है कि हमें समय रहते सचेत होना ही पड़ेगा। भारत कहीं ना कहीं यह भी जानता है अगर समय रहते रूस के साथ संबंधों को बेहतर नहीं किया गया तो रूस के चीन के साथ संबंध बेहतर हो सकते हैं जो कि भविष्य में भारत के लिए बेहद घातक सिद्ध होगा।

बेहद खास है S-400 मिसाइल सिस्टम

इसके अतिरिक्त रूस और भारत के मध्य एस-400  मिसाइल प्रणाली पर संपूर्ण विश्व भर की नजर है। 5.4 बिलियन डॉलर की यह डील 2018 में संपन्न हुई थी, जिसके अनुसार रूस इस मिसाइल की पांच यूनिट भारत को जल्द ही सौंपेगा। अगर इसकी खासियत पर गौर किया जाए तो यह मिसाइल दुनिया की सबसे ताकतवर मिसाइलों में से एक है, जो कि चार सौ किलोमीटर तक शत्रुओं को मार गिराने में सक्षम है और दुश्मनी ठिकानों को नेस्तनाबूत करने में इसे महारथ हासिल है। तभी अक्टूबर में अपनी पहली भारत यात्रा के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री वेंडी शेरमेन ने कहा था कि एस-400 किसी भी देश के सुरक्षा हितों के लिए खतरनाक है। इसके अलावा ये एंटी बैलेस्टिक मिसाइल है, यानी आवाज की गति से भी तेज रफ्तार से यह हमला कर सकती है व एक साथ मल्टी टारगेट निशाना लगाने में सक्षम है यानी एक साथ दुश्मन के लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर व क्रूज मिसाइल को निशाना बना सकती है।

अमेठी में बनेगी एके-203 असॉल्ट राइफल

लेकिन अब अमेरिका भी भारत के ओर नरम रुख अपना रहा है। अगर 2 दिसंबर को भारत देश द्वारा अपनाए गए रुख पर दृष्टि डाली जाए तो भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा हित पर ही रक्षा खरीद निर्भर रहेगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची  की तरफ से गुरुवार को जारी किए गए बयान में यह बात कही गई कि भारत एक स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है और उसकी रक्षा खरीद में 'राष्ट्रीय सुरक्षा हितों' को प्राथमिकता दी जाएगी। दोनों देशों के मध्य हुई इस वार्ता में एके-203 असॉल्ट राइफलों पर भी जिक्र किया गया क्योंकि 7.5 लाख एके-203 असॉल्ट राइफलों की सप्लाई का सौदा किया गया था जिसे सुरक्षा संबंधी कैबिनेट कमेटी से अंतिम मंजूरी समेत सभी जरूरी मंजूरियां मिल गई हैं। रूस द्वारा डिजाइन की गई एके-203 असॉल्ट राइफलों को उत्तर प्रदेश के अमेठी में एक कारखाने में बनाया जाएगा। उत्पादन प्रक्रिया शुरू होने के 32 महीने बाद इन्हें सेना के हाथों सौंप दिया जाएगा। इसके साथ ही दोनों नेताओं के बीच रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर होते ही रूस, भारत के साथ ये सौदा करने वाला सातवां देश होगा।

इसकी खूबियों की बात करे तो AK-203 भारतीय सेना में INSAS राइफल की जगह लेगी, जो तीन दशक पुरानी रायफल है। वर्ष 1990 में पहली बार इसे भारतीय सेना के बेड़े में शामिल किया गया था। AK-203, INSAS के मामले में काफी हल्की, छोटी और आधुनिक रायफल है। इसका वजन मात्र 3.8 किलोग्राम व लम्बाई 960 मिलीमीटर व  800 मीटर तक लक्ष्य भेदने में कारगर है इसी के साथ इस से एक मिनट में 600 गोलियां दागी जा सकती हैं।

मुलाकात से हुई पाकिस्तान को दिक्कत

इस शिखर सम्मेलन का सीधा प्रभाव कहीं ना कहीं पाकिस्तान पर नकारात्मक रूप से पड़ता नजर आ रहा है क्योंकि लक्ष्य को भेदने में पाकिस्तानी मिसाइलों का (एके-203 ) से कोई मुकाबला नहीं। शायद इसी वजह से इस डील के सफल होने पर पाकिस्तान बौखला गया है। अब भारत को और नजर साधने के लिए पाकिस्तानी ने तुर्की से एमपीटी-76 रायफल खरीदने का फैसला किया और ऐसी एक लाख रायफल खरीदने के सपने संजोए बैठा है। संपूर्ण शिखर सम्मेलन पर एक दृष्टि डाली जाये तो यह सम्मेलन भारत रूस के आपसी संबंधों को  विभिन्न रुपरेखाओं पर बेहतर बनाने में कारगर साबित हुआ। 

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