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पहले थे पाकिस्तानी, अब हो गए हिंदुस्तानी...158 लोगों को मिली भारतीय नागरिकता, हिंदू लड़कियों बोलीं- पड़ोसी मुल्क में जबरन...

Harsh Sanghavi Citizenship Certificates Ahmedabad: अहमदाबाद में डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने 158 शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता के प्रमाण पत्र सौंपे। सीएए (CAA) के तहत मिले प्रमाणपत्रों के बाद 18 साल का संघर्ष और 'पाकिस्तानी' होने का ठप्पा मिट गया।

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पहले कहलाते थे पाकिस्तानी, अब हो गए हिंदुस्तानी...हटा पड़ोसी मुल्क का ठप्पा, 158 लोग को मिली भारतीय नागरिकता

Ahmedabad Indian Citizenship 158 Refugees CAA: गुजरात के अहमदाबाद में मंगलवार को 158 शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। सोला स्थित SAL इंस्टीट्यूट में अहमदाबाद जिला प्रशासन की ओर से आयोजित समारोह में उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने लाभार्थियों को प्रमाणपत्र सौंपे। इनमें नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत 126 लाभार्थी और कलेक्टर कार्यालय के माध्यम से पंजीकृत 32 लाभार्थी शामिल हैं। कार्यक्रम में शहरी विकास एवं शहरी आवास राज्य मंत्री दर्शना वाघेला के साथ शहर के मेयर, सांसद और विधायक भी मौजूद रहे।

नागरिकता मिलने के बाद लाभार्थियों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। इनमें कई ऐसे परिवार हैं, जो वर्षों पहले पाकिस्तान से भारत आए थे और लंबे समय से भारतीय नागरिकता मिलने का इंतजार कर रहे थे। कुछ लाभार्थियों ने Times Now Navbharat से बातचीत में पाकिस्तान में अपने अनुभवों, भारत में शुरुआती संघर्ष और नागरिकता मिलने के बाद अपनी भावनाओं को साझा किया।

'आज का दिन हमारे लिए दिवाली जैसा है': हर्ष संघवी

उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि पाकिस्तान में हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन समुदायों के कुछ परिवारों को अपनी सुरक्षा की चिंता के चलते भारत आकर बसना पड़ा। उन्होंने बताया कि ऐसे 158 परिवारों को भारतीय नागरिकता प्रदान की गई है।

संघवी के मुताबिक, लाभार्थियों ने पाकिस्तान में अपने साथ हुए कथित दुर्व्यवहार और परेशानियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि एक बुजुर्ग लाभार्थी ने इस दिन को अपने परिवार के लिए दिवाली के समान बताया। उपमुख्यमंत्री ने नागरिकता पाने वाले परिवारों को बधाई देते हुए कहा कि अब वे भारत के नागरिक हैं।

18 साल से अहमदाबाद में रह रहीं कमल और सावी को मिली नागरिकता

नागरिकता पाने वालों में कमल घेरा राजपूत और सावी घेरा राजपूत भी शामिल हैं। दोनों की उम्र 31 वर्ष बताई गई है। वे रिश्तेदार हैं और कमल के भाई की शादी सावी से हुई है। दोनों ने Times Now Navbharat से बातचीत में पाकिस्तान में अपने अनुभव और भारत में बसने के शुरुआती संघर्ष साझा किए।

कमल और सावी ने बताया कि उनका परिवार वर्ष 2008 में वीजा लेकर ट्रेन से भारत आया था। इसके बाद वे समय-समय पर लॉन्ग टर्म वीजा (LTV) का विस्तार करवाते रहे। भारत आने के शुरुआती दिनों में उन्हें घर किराए पर लेने में परेशानी हुई। उनके मुताबिक, कुछ लोगों ने उनके पाकिस्तानी मूल के कारण उन पर संदेह किया और एक बार परिवार को रात में घर खाली करना पड़ा। उस दौरान परिवार की महिलाओं ने एक छोटे कमरे में और पुरुषों ने छत पर रात बिताई, जबकि बारिश हो रही थी।

दोनों महिलाओं ने पाकिस्तान में लड़कियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां लड़कियों को बहला-फुसलाकर या जबरन अपने साथ ले जाने की कोशिशें होती थीं। सावी ने अपनी बहन का उदाहरण देते हुए कहा कि उसे कथित तौर पर जबरन ले जाया गया, उसका धर्म परिवर्तन कराया गया और उसका नाम बदलकर जोया रख दिया गया। सावी के मुताबिक, उनकी बहन अब बच्चों के साथ वहीं रहने को मजबूर है और परिवार को धमकियों का सामना करना पड़ता है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

कमल और सावी ने कहा कि भारतीय नागरिकता मिलने के बाद उन्हें लंबे समय से अपने साथ जुड़े ‘पाकिस्तानी’ होने के ठप्पे से मुक्ति मिलने का एहसास हो रहा है। उन्होंने बताया कि अहमदाबाद में शुरुआत में कुछ लोग उन्हें पाकिस्तानी कहकर पुकारते थे, जिससे उन्हें बुरा लगता था। अब नागरिकता मिलने से उन्हें राहत और खुशी महसूस हो रही है। कमल ने बताया कि उनका ब्यूटी सैलून है और वे सिलाई का काम भी करती हैं। उनके तीन बच्चे हैं।

'भारत में शिक्षा और करियर के बेहतर अवसर मिले': कोमल माहेश्वरी

नागरिकता प्रमाणपत्र पाने वाली कोमल माहेश्वरी ने बताया कि उनका जन्म पाकिस्तान में हुआ था और उनका परिवार करीब 10 से 12 साल पहले भारत आया था। उन्होंने कहा कि भारत में उन्हें शिक्षा और करियर के बेहतर अवसर मिले हैं। कोमल फिलहाल माइक्रोबायोलॉजी ऑनर्स में बीएससी कर रही हैं और आगे एमएससी की पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं। उनकी छोटी बहन बीकॉम की पढ़ाई कर रही हैं।

कोमल ने कहा कि पाकिस्तान के कुछ स्थानीय इलाकों में लड़कियों की सुरक्षा को लेकर स्थिति अच्छी नहीं थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि वहां की सरकार महिलाओं की सुरक्षा और उन्हें अपने करियर में आगे बढ़ने के अवसर देने पर काम करेगी।

भारत में शुरुआती संघर्ष के बारे में बात करते हुए कोमल ने बताया कि उनके परिवार को यहां आकर शून्य से शुरुआत करनी पड़ी। उनके पिता ने काफी मेहनत की और परिवार अब अहमदाबाद में बस चुका है। उन्होंने भारतीय नागरिकता मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और नागरिकता प्रक्रिया में मदद करने वाले लोगों का आभार जताया।

कोमल ने भारत में रह रहे परिवारों से अलग पाकिस्तान में रह रहे अपने रिश्तेदारों का भी जिक्र किया। उन्होंने भारतीय सरकार से वीजा संबंधी समस्याओं को दूर करने और उनके परिवार के सदस्यों को भारत आने में मदद करने की अपील की।

नागरिकता से क्या बदलता है? वोटिंग से भारतीय पासपोर्ट तक के अधिकार

पाकिस्तानी हिंदू एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश माहेश्वरी ने बताया कि अहमदाबाद जिले में पाकिस्तान से आए हिंदू प्रवासियों को नागरिकता दिलाने की प्रक्रिया में सहायता की जाती है। उनके अनुसार, एसोसिएशन की टीमें उन इलाकों में काम करती हैं, जहां ऐसे परिवार रहते हैं। ये टीमें दस्तावेज तैयार करने, संबंधित कार्यालयों से संपर्क कराने, बच्चों के स्कूल में दाखिले, घर तलाशने और जरूरत पड़ने पर राशन जैसी मदद उपलब्ध कराने में सहयोग करती हैं।

राजेश माहेश्वरी के मुताबिक, नागरिकता मिलने से पहले उपलब्ध सीमित सुविधाओं के अलावा भारतीय नागरिकता मिलने पर लाभार्थियों को मतदान का अधिकार और भारतीय पासपोर्ट बनवाने की पात्रता मिलती है। इससे शिक्षा और विदेश यात्रा जैसे मामलों में भी अवसर बढ़ सकते हैं।

उन्होंने दावा किया कि पिछले करीब 10 वर्षों में अहमदाबाद में पाकिस्तान से आए लगभग 5,000 हिंदू प्रवासियों को भारतीय नागरिकता मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि अहमदाबाद में नागरिकता से जुड़े कई आवेदन प्रक्रिया में हैं। ये आंकड़े एसोसिएशन के अध्यक्ष द्वारा बताए गए हैं।

2017 से 2025 के बीच 1,200 से अधिक लोगों को मिली नागरिकता

जिला प्रशासन के अनुसार, भारत सरकार ने 2016 और 2018 की अधिसूचनाओं के जरिए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदायों के कुछ पात्र लोगों को भारतीय नागरिकता देने के लिए जिला कलेक्टरों को अधिकार सौंपे थे।

प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 से 2025 के बीच अहमदाबाद जिले में 1,200 से अधिक आवेदकों को भारतीय नागरिकता प्रमाणपत्र जारी किए गए।

मंगलवार को नागरिकता पाने वाले 158 लोगों के लिए यह समारोह वर्षों के इंतजार के बाद एक अहम पड़ाव बना। लाभार्थियों ने इसे नई पहचान, सुरक्षा और भारत में अपने भविष्य को लेकर उम्मीद से जुड़ा दिन बताया।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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