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PAK के बांधों का सूखने लगा 'गला', चिनाब नदी के प्रवाह में 21% की कमी, अब दाने-दाने को तरसेगा पाकिस्तान

झेलम नदी के मंगला बंधी और सिंधु नदी के तरबेला बांध में पानी का बहाव में उल्लेखनीय कमी आई है। दरअसल, अपने हिस्से का पानी नियंत्रित करने के बाद चिनाब नदी में पानी का बहाव कम हो गया है। पहलगाम में बीते 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई प्रतिबंधात्मक कदम उठाए।

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पाकिस्तान के बांधों में पानी की मात्रा कम हुई।

Pakistan Dam : सिंधु नदी जल समझौता स्थगित करने का असर पाकिस्तान पर दिखने लगा है। उसके बांधों में पानी की मात्रा काफी कम हो गई है, इससे खरीफ फसलों की बुवाई पर संकट गहराने लगा है। झेलम नदी के मंगला बंधी और सिंधु नदी के तरबेला बांध में पानी का बहाव में उल्लेखनीय कमी आई है। दरअसल, अपने हिस्से का पानी नियंत्रित करने के बाद चिनाब नदी में पानी का बहाव कम हो गया है। पहलगाम में बीते 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई प्रतिबंधात्मक कदम उठाए। उनमें से एक सिंधु नदी जल समझौते को स्थगित करना भी है।

पाकिस्तान में बढ़ने लगी है बेचैनी

सिंधु नदी जल समझौते को स्थगित किए जाने के बाद से पाकिस्तान में बेचैनी बढ़ रही है। बांधों में पानी की कमी होने से खरीफ फसलों की बुवाई पर गहरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ कई मौकों पर इसका जिक्र कर चुके हैं। पिछले सप्ताह ताजिकिस्तान के दुशांबे में एक कार्यक्रम के दौरान शहबाज ने दुनिया का ध्यान इस तरफ खींचने की कोशिश की।

पाक के दो बांधों में 50 फीसद पानी कम हुआ

पाकिस्तान के इंडस रिविर सिस्टम अथॉरिटी (IRSA) के ताजा अनुमान के मुताबिक नदी प्रवाह में 21 प्रतिशत की कमी और दो बांधों के पानी में करीब 50 प्रतिशत की कमी आ चुकी है। पंजाब और सिंध प्रांतों में खेती और सिंचाई में इन दोनों बांधों की प्रमुख भूमिका रहती है। यही नहीं बांधों से पाकिस्तान के लिए बिजली भी पैदा होती है। मई से लेकर सितंबर में पाकिस्तान में होने वाली बुवाई पर आईआरएसए का कहना है कि बांधों में पानी की कमी पर वह चिंतित है। नदी और बांधों में पानी की कमी से खरीफ की खेती प्रभावित होगी।

अपने बांधों के जरिए पानी को नियंत्रित करेगा भारत

हालांकि, पाकिस्तान का कहना है कि अगले महीने से मानसून की बारिश होने से स्थिति थोड़ी सुधर सकती है। यही नहीं, मानसून के सीजन में भारत नदियों के बहाव को कितना नियंत्रित कर पाएगा, यह इस बात पर भी निर्भर करेगा। जम्मू-कश्मीर के चिनाव पर बने बगलिहार और सलाल बांध के जरिए भारत जल को नियंत्रित कर सकता है। ज्यादा पानी नियंत्रित करने के लिए भारत को प्रबंध करने होंगे जिसमें कुछ समय लग सकता है।

1960 में हुआ था सिंधु नदी जल समझौता

भारत का कहना है कि यह संधि सौहार्दपूर्ण माहौल में 1960 में हुई थी। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। दूसरा, भारत के हिस्से वाले डैम पुराने पड़ चुके हैं जिनकी मरम्मत करने की जरूरत है। बांधों मे नई तकनीक लगाई जानी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ शब्दों में कहा है कि पानी और खून और आतंकवाद और बातचीत दोनों साथ-साथ नहीं चल सकते। बीते दिनों बिहार में रैली को संबोधिक करते हुए पीएम ने कहा कि 'अभी तो हमने कुछ किया ही नहीं, केवल पानी रोका है, उधर पसीने छूटने लगे।'

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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