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EXPLAINED: अखिलेश के PDA के खिलाफ BJP ने बिछाई बिसात, 27 के रण में सपा कैसे करेगी काट?

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान हो गया है। इस टीम में यूपी के 8 नेताओं को जगह मिली है। यह समझना जरूरी है कि नितिन नवीन की नई टीम में यूपी की इतनी बड़ी भागीदारी क्यों? और अगर बीजेपी की रणनीति में ब्राह्मण से लेकर ओबीसी, दलित, यादव और अल्पसंख्यक चेहरों को जगह दी गई है, तो सपा और अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले के सामने यह कितनी बड़ी चुनौती है?

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बीजेपी ने रचा 27 का चक्रव्यूह- अखिलेश के PDA को चुनौती?
Authored by: कुलदीप राघव
Updated Aug 18, 2026, 14:23 IST
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UP Election 2027, Uttar Pradesh Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। संगठन से लेकर सरकार तक, हर मोर्च पर बीजेपी ने कमर कस ली है। एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिलों के दौरे कर करोड़ों रुपयों की सौगात बांट रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संगठन को दुरुस्त करने का काम चल रहा है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान किया। इस टीम में शामिल होने के लिए महीनों से नेता दिल्ली की परिक्रमा कर रहे थे। नितिन नवीन की टीम में यूपी के आठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। सवाल ये है कि नितिन नवीन की नई टीम में यूपी की इतनी बड़ी भागीदारी क्यों? क्या बीजेपी ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है? और अगर बीजेपी की रणनीति में ब्राह्मण से लेकर ओबीसी, दलित, यादव और अल्पसंख्यक चेहरों को जगह दी गई है, तो समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले के सामने यह कितनी बड़ी चुनौती है?

यूपी से किन नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह

बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उत्तर प्रदेश से दो राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, दो राष्ट्रीय महामंत्री, दो राष्ट्रीय मंत्री और दो मोर्चों के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए हैं। पूर्व सांसद रेखा वर्मा और प्रोफेसर तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है। राष्ट्रीय मंत्री के तौर पर बुलंदशहर के सांसद भोला सिंह और संगीता यादव को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, अमर पाल मौर्य को ओबीसी मोर्चा और कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है।

नितिन नवीन की टीम में यूपी से आठ चेहरे

नितिन नवीन की टीम में यूपी से आठ चेहरे

बीजेपी ने कैसे साधे समीकरण

पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी ब्राह्मण समाज से आते हैं। उन्हें महामंत्री बनाकर बीजेपी ने यूपी के ब्राह्मण समीकरण को साधने की कोशिश की है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ समय पहले समाजवार्टी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने यूपी में PDA में P की नई परिभाषा देकर पंडितों की बात कही थी। दूसरी तरफ रेखा वर्मा ओबीसी समाज से आती हैं और उनकी नियुक्ति से कुर्मी समाज के साथ साथ पिछड़ा वर्ग को मजबूत भागीदारी देने का प्रयास किया गया है। एक तरफ सवर्ण प्रतिनिधित्व, दूसरी तरफ ओबीसी प्रतिनिधित्व- बीजेपी की टीम में दोनों समीकरणों को जगह मिलती है।

नितिन नवीन के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

नितिन नवीन के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

बीजेपी के सामने 2027 में सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ सत्ता विरोधी माहौल या विपक्ष से मुकाबला नहीं है, बल्कि अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपने समर्थन को बनाए रखना भी है। खासकर 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी के प्रदर्शन के बाद पार्टी के सामने यह सवाल रहा है कि किन सामाजिक समूहों में उसकी पकड़ मजबूत है और किन वर्गों तक नए सिरे से पहुंच बनाने की जरूरत है। यहीं से नई राष्ट्रीय टीम के मायने समझ में आते हैं।

दलित समाज को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व

राष्ट्रीय मंत्री बनाए गए भोला सिंह दलित समाज से आते हैं और बुलंदशहर से तीन बार सांसद रह चुके हैं। 2014, 2019 के बाद 2024 में लगातार उन्होंने जीत दर्ज की है। उनकी नियुक्ति से बीजेपी संदेश देना चाहती है कि संगठन में अनुसूचित जाति को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व दिया जा रहा है। बीजेपी ने संगीता यादव को राष्ट्रीय मंत्री बनाया है। इससे पूर्वांचल और यादव समाज को यह संदेश दिया गया है कि बीजेपी के लिए यादव गैर नहीं हैं।

बुलंदशहर सांसद भोला सिंह

बुलंदशहर सांसद भोला सिंह

यादव वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश

राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि क्या बीजेपी यादव वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है? इसका जवाब अभी देना जल्दबाजी होगी लेकिन संगठन की सूची में यादव चेहरों को जगह देकर बीजेपी ने निश्चित तौर पर एक संदेश दिया है। बीजेपी की यह रणनीति समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर सकती है।

दो मुस्लिम नेताओं को जगह

खासबात ये है कि नई सूची में बीजेपी ने अल्पसंख्यक समीकरण को तरीके से साधा है। नई टीम में प्रोफेसर तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चे की जिम्मेदारी दी गई है। संगठन के भीतर मुस्लिम चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना पार्टी की व्यापक सामाजिक पहुंच की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

तारिक मंसूर और बासित अली

तारिक मंसूर और बासित अली

बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम का संदेश क्या है?

भारतीय जनता पार्टी का संदेश यह है कि PDA के सामाजिक विस्तार का जवाब सामाजिक प्रतिनिधित्व के जरिए देने की कोशिश की जा रही है। ओबीसी के लिए रेखा वर्मा और अमर पाल मौर्य, दलित समाज के लिए भोला सिंह, यादव समाज के लिए संगीता यादव, अल्पसंख्यक समुदाय के लिए तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली, ब्राह्मण समाज के लिए हरीश द्विवेदी और महिला प्रतिनिधित्व के लिहाज से स्मृति ईरानी, संगीता यादव और रेखा वर्मा जैसे चेहरे, इन सभी नियुक्तियों को एक साथ रखकर देखें तो बीजेपी की रणनीति ज्यादा स्पष्ट दिखाई देती है।

PDA फॉर्मूले की काट तैयार

अखिलेश यादव की राजनीति में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण एक महत्वपूर्ण राजनीतिक फॉर्मूला रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने इसी सामाजिक गठजोड़ को मजबूत करने की कोशिश की थी और पार्टी ने यूपी में बीजेपी के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। अब 2027 के विधानसभा चुनाव में भी सपा की कोशिश इसी आधार को और मजबूत करने की होगी।

अखिलेश यादव

अखिलेश यादव

सपा के सामने अब क्या चुनौतियां

सपा के सामने अब चुनौती ये है कि अगर बीजेपी अलग-अलग सामाजिक वर्गों में अपने संगठनात्मक चेहरे खड़े करती है और इन चेहरों को जमीन पर सक्रिय करती है, तो PDA के मुकाबले सपा को अपनी सामाजिक रणनीति और ज्यादा स्पष्ट करनी होगी। सिर्फ यादव और मुस्लिम समीकरण पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। सपा को गैर-यादव पिछड़ी जातियों, दलितों और सवर्णों के बीच भी अपनी पहुंच बढ़ानी होगी। यही वजह है कि बीजेपी की नई नियुक्तियों का सबसे बड़ा असर शायद चुनावी मैदान में नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों की लड़ाई में दिखाई देगा।

यूपी विधानसभा चुनाव

यूपी विधानसभा चुनाव

नितिन नवीन की नई टीम में यूपी के आठ चेहरों की मौजूदगी बताती है कि बीजेपी ने राष्ट्रीय संगठन के स्तर पर भी यूपी को कितनी अहमियत दी है। लेकिन क्या ये चेहरे 2027 में जमीन पर बीजेपी के लिए वही असर पैदा कर पाएंगे, जिसकी पार्टी उम्मीद कर रही है? और दूसरी तरफ सबसे बड़ा सवाल अखिलेश यादव के सामने है। क्या समाजवादी पार्टी बीजेपी के इस नए सामाजिक चक्रव्यूह का जवाब अपने PDA फॉर्मूले को और विस्तार देकर देगी या फिर कोई नया सियासी समीकरण तैयार करेगी? फिलहाल इतना साफ है कि 2027 का चुनाव अभी हुआ नहीं है, लेकिन उसकी रणनीतिक लड़ाई शुरू हो चुकी है और नितिन नवीन की नई टीम में यूपी की भागीदारी इस लड़ाई का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन चुकी है।

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