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भारत में 5 साल में 13.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले, यूपी सहित ये पांच राज्य रहे सबसे आगे

  • Edited by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Jul 17, 2023, 06:11 PM IST

रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों की संख्या में सबसे अधिक कमी आई है। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों की संख्या 32.59 प्रतिशत से घटकर 19.28 प्रतिशत पर आ गई है।

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Povety in India

Photo : PTI

NITI Aayog Report: भारत में 2015-16 से 2019-21 के बीच 13.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। नीति आयोग की सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा तथा राजस्थान में गरीबों की संख्या में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बहुआयामी गरीबों की संख्या में उल्लेखनीय रूप से 9.89 प्रतिशत अंक की कमी आई है। यह 2015-16 में 24.85 प्रतिशत थी और 2019-21 में कम होकर 14.96 प्रतिशत पर आ गई।

ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों की संख्या घटी

रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों की संख्या में सबसे अधिक कमी आई है। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों की संख्या 32.59 प्रतिशत से घटकर 19.28 प्रतिशत पर आ गई है। वहीं शहरी क्षेत्रों में गरीबों की संख्या 8.65 प्रतिशत से घटकर 5.27 प्रतिशत रह गई है। नीति अयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने सोमवार को आयोग की ‘राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक: एक प्रगति संबंधी समीक्षा 2023’ रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में कहा गया कि 2015-16 से 2019-21 के बीच रिकॉर्ड 13.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।

राष्ट्रीय एमपीआई (बहुआयामी गरीबी सूचकांक) स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवनस्तर के तीन समान रूप से भारित आयामों में आभावों को मापता है। इन्हें 12 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) से जुड़े संकेतकों से दर्शाया गया है। नीति आयोग के अनुसार सभी 12 मापदंडों में सुधार हुआ है। ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (पीएचआई) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की ओर से जारी वैश्विक एमपीआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार 2005-06 से 2019-21 तक केवल 15 साल में भारत में 41.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले।

12 मापदंडों में उल्लेखनीय सुधार

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार सरकार के स्वच्छता, पोषण, रसोई गैस, वित्तीय समावेशन, पेयजल और बिजली तक पहुंच में सुधार पर ध्यान देने से इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। एमपीआई के सभी 12 मापदंडों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान में गरीबों की संख्या में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। एमपीआई मूल्य पांच वर्ष में 0.117 से घटकर 0.066 हो गया और 2015-16 से 2019-21 के बीच गरीबी की गहनता 47 प्रतिशत से घटकर 44 प्रतिशत पर आ गई।

नीति आयोग मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बी. वी. आर. सुब्रमण्यम ने कहा कि भारत 2023 की निर्धारित समयसीमा की तुलना से काफी पहले एसडीजी (सतत विकास लक्ष्य) 1.2 (बहुआयामी गरीबी को कम से कम आधा घटाने के लक्ष्य) को हासिल करने की दिशा में बढ़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि पोषण अभियान और एनीमिया मुक्त भारत जैसी योजनाओं ने स्वास्थ्य के मोर्चे पर कमियों को दूर करने में योगदान दिया है। (Bhasha)

अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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