Tiger Shroff Firing Case: बॉलीवुड के मशहूर एक्टर टाइगर श्रॉफ की BMW कार पर बीते 18 अक्टूबर को हुई फायरिंग के मामले में आरोपियों के फरार होने की पूरी कहानी सामने आई है। पुलिस से बचने के लिए शूटर्स ने मोबाइल फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल लगभग बंद कर दिया था। हालांकि, इस दौरान की गई एक रेगुलर फोन कॉल पुलिस के लिए सबसे अहम सुराग बन गई। इसी कॉल के जरिए पुलिस को आरोपियों के बोरीवली से सूरत तक के सफर का पता चला और जांच आगे बढ़ते हुए राजस्थान के कोटा तक पहुंच गई। टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें: Tiger Shroff Firing Case में Mumbai Crime Branch ने सूरत से रिकवर हुईं 2 पिस्तौलें
इंटरनेट कॉलिंग के जरिए हैंडलर्स से संपर्क
सूत्रों के मुताबिक, टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग की घटना के बाद आरोपी पुलिस की पकड़ से बचने के लिए बेहद सावधानी बरत रहे थे। उन्होंने अपने मोबाइल फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल बंद कर दिया था। पूरी साजिश के दौरान शूटर्स और उनके हैंडलर्स इंटरनेट कॉलिंग यानी वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VOIP) के जरिए संपर्क में थे। हालांकि, आरोपियों ने एक रेगुलर फोन कॉल भी की थी। यही कॉल पुलिस की जांच में सबसे बड़ा सुराग साबित हुई। टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें: Mika Singh ने खत्म किया Daler Mehndi विवाद, CM धामी संग बातचीत पर बोले- कलाकार सम्मान के हकदार हैं...
कैब से सूरत पहुंचे आरोपी
पुलिस की जांच में सामने आया कि टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के तुरंत बाद आरोपी अंधेरी से लोकल ट्रेन पकड़कर बोरीवली पहुंचे। इसके बाद उन्होंने सूरत जाने के लिए एक प्राइवेट कैब बुक की। सूत्रों के अनुसार, कैब ड्राइवर को की गई एक फोन कॉल पुलिस की जांच के दायरे में आ गई। इस कॉल से मिले सुराग के आधार पर मुंबई पुलिस की एंटी एक्सटॉर्शन सेल की टीम बोरीवली से सूरत पहुंची।सूरत पहुंचने के बाद पुलिस ने कैब ड्राइवर से पूछताछ की। पूछताछ में पता चला कि उसने आरोपियों को सूरत रेलवे स्टेशन पर छोड़ा था। इसके बाद पुलिस ने रेलवे स्टेशन के CCTV फुटेज और रिजर्वेशन चार्ट की जांच की। इस पड़ताल में खुलासा हुआ कि आरोपी सूरत से जयपुर जाने वाली ट्रेन में सवार हुए थे।
कोटा से पकड़े गए तीन मुख्य शूटर
बता दें कि सूरत रेलवे स्टेशन से मिले सुराग के बाद पुलिस ने कोटा और जयपुर रूट पर आरोपियों की तलाश तेज कर दी। जांच और ट्रैकिंग के बाद पुलिस की टीम ने राजस्थान के कोटा से तीन मुख्य शूटर्स को हिरासत में लिया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की ओर से की गई एक रेगुलर फोन कॉल ने उनकी फरारी के रूट का पता लगाने में अहम भूमिका निभाई। अगर यह कॉल नहीं होती, तो बोरीवली से सूरत तक आरोपियों की आवाजाही का पता लगाना पुलिस के लिए और मुश्किल हो सकता था।
