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30 पार करते ही बढ़ने लगती है भूलने की बीमारी, दिमाग को हेल्दी- शार्प रखने के लिए अपनाएं ये टिप्स

30 की उम्र के बाद भूलने की आदत और ध्यान की कमी आम होती जा रही है। आयुर्वेद और विज्ञान बताते हैं कि सही नींद, संतुलित भोजन, हल्की गतिविधि, नई चीजें सीखना और तनाव को संभालना दिमाग को तेज रख सकता है। जानिए वे आसान आदतें जो 30 के बाद भी याददाश्त और सोचने की क्षमता को मजबूत बनाए रखती हैं।

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दिमाग को हेल्दी-शार्प रखने के टिप्स

30 की उम्र पार करते ही कई लोग भूलने की आदत, थकान और ध्यान की कमी को सामान्य मान लेते हैं। काम का दबाव, मोबाइल स्क्रीन और अनियमित दिनचर्या धीरे-धीरे दिमाग को कमजोर करने लगती है। आयुर्वेद और विज्ञान दोनों मानते हैं कि सही आदतों से दिमाग को लंबे समय तक तेज और संतुलित रखा जा सकता है। थोड़े-से बदलाव सोचने की क्षमता और याददाश्त को बेहतर बना सकते हैं।

आयुर्वेद और विज्ञान क्या कहते हैं

आयुर्वेद इस स्थिति को प्रज्ञापराध कहता है, यानी जब इंसान अपनी बुद्धि और शरीर की जरूरतों को नजरअंदाज करने लगता है। वहीं विज्ञान के अनुसार 30 के बाद तनाव, नींद की कमी और गलत लाइफस्टाइल का असर दिमाग की कोशिकाओं पर दिखने लगता है। दोनों इस बात पर सहमत हैं कि दिमाग वैसा ही बनता है जैसी उसकी रोज देखभाल की जाती है।

नींद की कमी से कमजोर होती याददाश्त

आयुर्वेद में नींद को भूतधात्री कहा गया है। गहरी नींद के दौरान दिमाग खुद को साफ और संतुलित करता है। 30 के बाद अगर नींद पूरी न हो, तो याददाश्त कमजोर होने लगती है और चिड़चिड़ापन बढ़ता है। रोज एक तय समय पर सोना और जागना दिमाग को स्थिर और शांत बनाता है।

हल्की गतिविधि रखती है दिमाग जवान

शरीर की हलचल से दिमाग तक खून का बहाव बढ़ता है, जिससे नर्व सेल्स मजबूत होती हैं। 30 के बाद भारी एक्सरसाइज जरूरी नहीं, लेकिन रोज टहलना, योग या स्ट्रेचिंग दिमाग को सक्रिय रखती है। इससे तनाव कम होता है और सोचने की क्षमता बनी रहती है।

जैसा खाना, वैसा मन

आयुर्वेद कहता है कि भोजन का सीधा असर मन पर पड़ता है। बहुत ज्यादा तला-भुना और मीठा खाने से दिमाग में सूजन बढ़ती है, जिससे ध्यान और याददाश्त प्रभावित होती है। प्रोटीन, अच्छे फैट, साबुत अनाज, सब्जियां, घी और पर्याप्त पानी दिमाग को ताकत और संतुलन देते हैं।

नई चीजें सीखना है जरूरी

दिमाग को रोज नई चुनौती चाहिए। आयुर्वेद इसे मेधा वृद्धि कहता है। पढ़ना, लिखना या कोई नया हुनर सीखना दिमाग की नसों को सक्रिय रखता है। सिर्फ मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताने से दिमाग सुस्त हो जाता है।

तनाव को समझना भी है इलाज

लगातार तनाव दिमाग को हमेशा खतरे की स्थिति में रखता है। गहरी सांस लेना, प्रकृति के करीब रहना और भावनाओं को समझना दिमाग को आराम देता है। तनाव को धीरे-धीरे संभालना ही असली मानसिक सेहत है।

Inputs: IANS

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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