हेल्थ

पीएम मोदी ने "मन की बात" में की बच्चों की सेहत की बात, बोले सभी स्कूल में जरूरी है शुगर बोर्ड

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 122वें एपिसोड में स्कूलों में 'शुगर बोर्ड' का जिक्र किया था। उन्होंने सीबीएसई द्वारा बच्चों के स्कूलों में शुगर बोर्ड लगाने वाले कार्यक्रम की प्रशंसा की है। प्रधानमंत्री से प्रशंसा पाने के बाद अब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने सभी स्कूलों में 'शुगर बोर्ड' लगाने का निर्देश दिया है। एक्सपर्ट्स से जानते हैं इसके फायदे...

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pm modi on sugar bord

सीबीएसई ने पूरे भारत में 24,000 से ज्यादा स्कूलों में 'शुगर बोर्ड' लगाने के निर्देश दिए हैं। इन बोर्ड पर आवश्यक जानकारी होगी, जैसे एक दिन में कितनी चीनी खानी चाहिए, सामान्य चीजों में कितनी चीनी होती है, स्वस्थ खाने के बेहतर विकल्प आदि। 'शुगर बोर्ड' को लेकर एम्स, नई दिल्ली के मेडिसिन प्रोफेसर डॉ. नवल विक्रम ने आईएएनएस से बात की। उन्होंने कहा कि यह पहल बच्चों को यह सिखाने के लिए है कि ज्यादा चीनी खाना उनके लिए कितना नुकसानदायक हो सकता है, जो बचपन में मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। जब बच्चों को बताया जाएगा कि एक दिन में कितनी चीनी खानी चाहिए और खाने-पीने की चीजों में कितनी चीनी होती है, तो इससे वे सेहत के लिए ज्यादा सचेत रहेंगे।

स्कूल में वर्कशॉप की सलाह

डॉक्टर ने कहा, "अगर इस पहल के साथ-साथ स्कूलों में वर्कशॉप कराई जाएं और माता-पिता को भी शामिल किया जाए, तो यह और ज्यादा असरदार होगा। यह सही समय पर उठाया गया कदम है जो बच्चों की सेहत को लेकर बहुत महत्वपूर्ण है। यह पहल दुनिया भर के पोषण से जुड़े लक्ष्यों के अनुरूप है। पहले टाइप-2 डायबिटीज सिर्फ बड़ों और बूढ़ों को ही होती थी। लेकिन अब यह बच्चों में भी तेजी से बढ़ रही है।"

सीबीएसई ने स्कूल प्रिंसिपलों को लिखे पत्र में बताया कि पिछले 10 सालों में बच्चों में मोटापा और डायबिटीज बढ़ने का जो खतरा दिख रहा है, उसकी एक बड़ी वजह है – ज्यादा चीनी खाना। यह स्कूलों में स्नैक्स, टॉफी, चॉकलेट, बिस्कुट जैसे खानों में आसानी से मिल जाती हैं। इसलिए जरूरी है कि स्कूल इस बात पर ध्यान दें।

फूड पैकेट्स पर लिखें चेतावनी

वहीं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण गुप्ता ने आईएएनएस से कहा, "मैं कहूंगा कि यह कदम अच्छा है, लेकिन सेहत के लिहाज से गलत चीजें कम करने के लिए और भी बहुत कुछ करना होगा। जैसे कि उन चीजों पर चेतावनी लिखनी चाहिए और जिन उत्पादों में ज्यादा फैट, नमक और चीनी (एचएफएसएस) होती है, उनके विज्ञापन पर पाबंदी लगानी चाहिए। खासकर स्कूलों में, कैंटीन को पूरी तरह से एचएफएसएस मुक्त बनाना चाहिए।"

सही समय पर सही पहल

फिक्की स्वास्थ्य सेवा समिति के अध्यक्ष डॉ. हर्ष महाजन ने इस कदम को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल सही समय पर की गई है और इसकी बहुत जरूरत थी ताकि बच्चों की सेहत बेहतर हो सके। अब बहुत छोटी उम्र के बच्चों में भी ऐसी बीमारियां होने लगी हैं जो आमतौर पर बड़े लोगों को होती थीं। लेकिन चिंता की बात यह है कि कई बार ये बीमारियां जल्दी पता नहीं चल पातीं और जब तक पता चलता है, तब तक शरीर को बहुत नुकसान हो चुका होता है, जिसे ठीक करना मुश्किल होता है। इसलिए, बच्चों की सेहत को समझने के लिए कुछ जरूरी टेस्ट्स कराते रहें।

इनपुट : भाषा

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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