How Heatwave Impacts Kidney Health: तपती गर्मी अब लोगों के लिए सिर्फ पसीना और बेचैनी वाली परेशानी नहीं रह गई है। सोचकर देखिए कि क्या आपने भी कभी गर्मी में घंटों बाहर रहने के बाद ऐसा महसूस किया है कि शरीर बिल्कुल टूट गया हो? बार-बार पानी पीने के बाद भी कमजोरी जा नहीं रही हो, या फिर पेशाब बहुत कम आने लगा हो? अगर आप भी इस तरह की परेशानियों से जूझते हैं, तो आप अकेले नहीं हैं। गर्मी के दिनों की ये ज्यादातर लोगों को होने वाली आम समस्याएं हैं, लेकिन लोग इन बातों को सामान्य गर्मी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। मगर कहीं आप भी तो ये गलती नहीं कर रहे?
दोपहर की तेज धूप में बाहर निकलना या काम करना, आज बहुत से लोगों की मजबूरी है। उन्हें भरी दोपहरी में भी घर से निकलकर काम करना पड़ता है। ऐसे में उनके शरीर से लगातार पसीना निकलता रहता है। शाम होते-होते उनकी हालत ऐसी हो जाती है कि चक्कर आने लगते हैं, मानो उनके शरीर में जान ही नहीं बचती और बस ऐसा लगता है कि किसी तरह घर पहुंच जाएं। कई लोग घर जाकर ठंडा पानी पीते हैं और सोचते हैं कि सुबह तक सब ठीक हो जाएगा, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता।
कई लोगों की हालत अगले दिन और बिगड़ जाती है। पेशाब कम होने लगता है, शरीर सूखा-सूखा महसूस होता है और कमजोरी इतनी बढ़ जाती है कि खड़ा होना भी मुश्किल लगने लगता है। डॉक्टर बताते हैं कि यह सिर्फ गर्मी की थकान नहीं, बल्कि शरीर में पानी की भारी कमी का संकेत हो सकता है और लू यानी हीटवेव की चपेट में आने का संकेत हो सकता है, जिसका असर किडनी पर भी पड़ने लगता है। चलिए डॉक्टरों से जानते हैं आखिर हीटवेट हमारी किडनी को कैसे नुकसान पहुंचाती है।
गर्मियों के मौसम में लोग क्या करते हैं गलती
अमृता अस्पताल, फरीदाबाद की किडनी रोग विशेषज्ञ, सीनियर कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजी, डॉ. हर्षा मंडाडी बताती हैं, कि आमतौर पर लोग सोचते हैं कि लू लगने का मतलब सिर्फ सिर दर्द, चक्कर या बुखार होना है। लेकिन सच इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। डॉक्टर्स की मानें तो तेज गर्मी शरीर में पानी की कमी पैदा करती है और इसका सीधा असर किडनी पर पड़ता है। कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं कि किडनी धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। लगातार शरीर में पानी की कमी रहना, तरल पदार्थों का सेवन कम करना और लंबे समय तक धूप में रहना किडनी फेलियर तक की वजह बन सकता है। इसलिए हीटवेव को हल्के में लेना बड़ी गलती साबित हो सकती है।
इसके अलावा डॉ. बताती हैं कि डिहाइड्रेशन से गुर्दे की पथरी वाले मरीजों में नई पथरी बनने का खतरा भी कई गुणा बढ़ जाता है।
हीटवेव है किडनी के लिए खतरा
हीटवेव में किडनी पर असर क्यों पड़ता है
क्या आपने कभी सोचा है कि गर्मी लगने का असर सीधे किडनी तक कैसे पहुंच जाता है? दरअसल, हमारी किडनी शरीर की सफाई करने का काम करती है। यह शरीर से गंदगी और अतिरिक्त पानी को पेशाब के जरिए बाहर निकालती है। लेकिन जब गर्मी बहुत ज्यादा होती है और शरीर में पानी कम होने लगता है, तब किडनी पर दबाव बढ़ जाता है। सोचिए, अगर शरीर में पानी ही कम होगा तो किडनी ठीक से काम कैसे करेगी?
रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल, दिल्ली में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. साक्षी गोयल बताती हैं कि तेज गर्मी में शरीर से बहुत ज्यादा पसीना निकलता है। अगर इस दौरान सही मात्रा में पानी और जरूरी तरल चीजें न ली जाएं तो शरीर सूखने लगता है। इसका असर धीरे-धीरे किडनी पर पड़ता है और कई बार किडनी ठीक से काम भी नहीं कर पाती।
बार-बार शरीर में पानी की कमी होना है खतरनाक
गर्मी में थकान होना या कमजोरी लगना आम बात है, लेकिन सवाल यह है कि क्या हर बार इसे नजरअंदाज करना सही है? कई लोग दिनभर धूप में रहने के बाद जब कम पेशाब, ज्यादा थकान या चक्कर जैसी परेशानी महसूस करते हैं, तो सोचते हैं कि 'आराम' कर लेंगे तो ठीक हो जाएगा। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि शरीर बार-बार पानी की कमी झेलता है तो इसका असर अंदरूनी अंगों पर पड़ने लगता है।
डॉ. हर्षा मंडाडी कहती हैं कि लगातार तेज गर्मी और पानी की कमी शरीर को अंदर से कमजोर करने लगती है। खासतौर पर जो लोग घंटों धूप में काम करते हैं, उनमें यह परेशानी ज्यादा देखी जाती है। कई बार इंसान को पता भी नहीं चलता और किडनी धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है।
पेशाब का रंग भी देता है शरीर का परेशानी इशारा
शरीर हमें बार-बार संकेत देता है, लेकिन हम उन्हें समझ नहीं पाते। लेकिन अगर इन्हें समय रहते पहचान लिया जाए तो किसी भी तरह की गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। हमारा शरीर पेशाब के जरिए भी कुछ कई संकेत देते हैं जैसे -
- अगर पेशाब गहरा पीला आने लगे
- बहुत कम पेशाब हो
- बार-बार चक्कर आए
- या शरीर सूखा-सूखा लगे
तो इसे सामान्य गर्मी समझने की गलती न करें। ये संकेत बताते हैं कि शरीर में पानी की कमी हो रही है।
डॉ. साक्षी गोयल कहती हैं कि लोग अक्सर इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इसका असर किडनी पर भी पड़ सकता है। इसलिए शरीर क्या कह रहा है, उसे समझना बहुत जरूरी है।
हीटवेट का किन लोगों पर पड़ता है ज्यादा असर
हीटवेव से किन लोगों को सबसे ज्यादा किडनी प्रॉब्लम का रिस्क
डॉक्टर बताते हैं कि हर व्यक्ति पर गर्मी का असर एक जैसा नहीं होता। कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके लिए हीटवेव ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है, जैसे:
- डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
- पहले से किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोग
- बुजुर्ग, छोटे बच्चे
- और वे लोग जो घंटों धूप में काम करते हैं।
अब सोचिए, अगर शरीर पहले से कमजोर हो और ऊपर से तेज गर्मी पड़ जाए, तो परेशानी कितनी बढ़ सकती है। डॉ. हर्षा मंडाडी बताती हैं कि जिन लोगों की किडनी पहले से कमजोर होती है, उनमें हीटवेव के दौरान अचानक समस्या बढ़ सकती है। कई बार मरीज को अस्पताल में भर्ती तक करना पड़ जाता है।
सिर्फ पानी नहीं शरीर को आराम की भी जरूरत
ज्यादातर लोग गर्मी में सिर्फ ज्यादा पानी पीने पर ध्यान देते हैं, लेकिन क्या सिर्फ खूब पानी पी लेना ही गर्मी से बचने के लिए काफी है? डॉक्टर्स की मानें तो ऐसा नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि गर्मी में शरीर से सिर्फ पानी ही कम नहीं होता, बल्कि उसकी ताकत भी कम होने लगती है। ऐसे में शरीर को पानी के साथ आराम और सही खानपान की भी जरूरत होती है।
पानी के अलावा, नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी और ORS जैसी चीजें शरीर को राहत देती हैं। वहीं बहुत ज्यादा चाय, कॉफी या ठंडे मीठे ड्रिंक्स शरीर को और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए इनसे बचना चाहिए।
डॉ. हर्षा मंडाडी सलाह देती हैं कि अगर आपको धूप में बाहर रहना पड़ता है तो प्यास लगने का इंतजार न करें। थोड़ी-थोड़ी देर में पानी या कोई अन्य ड्रिंक (तरल चीज) लेते रहें। क्योंकि कई बार जब तक आपको प्यास लगती है, तब तक शरीर में पानी की कमी शुरू हो चुकी होती है।
हीट स्ट्रोक की स्थिति में तुरंत करें ये काम
अब सवाल ये है कि कैसे पहचानें कि हालत गंभीर हो रही है? डॉक्टर कहते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को तेज चक्कर, उलझन, बेहोशी, बहुत कम पेशाब या तेज बुखार जैसी समस्या हो रही है, तो यह हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
मरीज को तुरंत ठंडी जगह पर ले जाएं, शरीर को ठंडा करने की कोशिश करें और डॉक्टर की सलाह से पानी या ORS दें। लेकिन अगर व्यक्ति बेहोश हो रहा हो या लगातार उल्टी कर रहा हो, तो बिना देरी अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। क्योंकि ऐसी स्थिति में हर मिनट मायने रखती है।
हीटवेव में किडनी हेल्दी रखने के टिप्स
गर्मी में किडनी को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें
अब सवाल ये है कि आखिर ऐसी गर्मी में खुद को सुरक्षित कैसे रखा जाए, क्या सिर्फ AC में बैठना या ठंडा पानी पी लेना काफी है? डॉक्टर कहते हैं कि ऐसा नहीं है। ऐसे में कुछ छोटी-छोटी सावधानियां ही बड़ी परेशानी से बचा सकती हैं। डॉक्टर मानते हैं कि हीटवेव अब सिर्फ गर्म हवा या ज्यादा पसीना आने तक सीमित नहीं रही। इसका असर शरीर के अंदरूनी अंगों पर भी पड़ रहा है और किडनी उनमें सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले अंगों में से एक है। अच्छी बात यह है कि थोड़ी समझदारी और सावधानी से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आप -
- शरीर को हमेशा हाइड्रेट रखें
- समय-समय पर पानी पीते रहें
- नारियल पानी, छाछ और ORS जैसी चीजें लें
- दोपहर की तेज धूप में बाहर निकलने से बचें
- शरीर को पूरा आराम दें
- और शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें
गर्मी को हल्के में लेना अब सिर्फ छोटी लापरवाही नहीं, बल्कि सेहत पर बड़ा खतरा बन सकता है। इसलिए इस मौसम में जरूरी है कि आप सिर्फ काम का ही नहीं, अपनी बॉडी का भी पूरा ध्यान रखें।
