अगर समय पर नहीं मिल पा रही है वैक्सीन की दूसरी डोज तो क्या करें? ये है डॉक्टर की राय

कई लोगों के साथ ऐसा होता है कि वो किसी भी कारणवश समय पर कोरोना वायरस वैक्सीन की दूसरी डोज नहीं ले पाते हैं। ऐसे में सवाल है कि उन लोगों को क्या करना चाहिए।

Vaccination in india
टीकाकरण अभियान जारी 

देश में कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान जारी है। अभी तक 35 करोड़ से ज्यादा डोज लग चुकी हैं। 6 करोड़ से ज्यादा लोगों को दूसरी डोज भी लग गई है। जहां कोवैक्सीन की दोनों डोज के बीच 28 दिन का गैप है वहीं कोविशील्ड की दोनों डोज के बीच 84 दिनों का अंतराल है। हालांकि कई बार वैक्सीन की कमी के चलते या अन्य कारणों से कई लोग समय पर दूसरी डोज नहीं ले पाते हैं। ऐसे में सवाल है कि दूसरी डोज का समय हो चुका है, लेकिन समय पर वैक्सीन नहीं मिल पाई है तो क्या करना चाहिए?

'आकाशवाणी समाचार' के अनुसार, एम्स में डॉक्टर डॉ. अंजन त्रिखा ने इस सवाल के जवाब में कहा है कि कोविशील्ड की दूसरी डोज के समय को बढ़ाया गया है, अब यह 84 दिन के बाद लगाई जा रही है। अगर दूसरी डोज का समय हो चुका है और उस दिन किसी कारणवश वैक्सीन नहीं लगवा पाए हैं तो उसके बाद जिन दिन भी स्लॉट मिले जाकर लगवाएं। ऐसे न सोचें कि अब तो 100 दिन हो गए हैं तो दूसरी डोज नहीं लगवानी है। दूसरी डोज जरूर लें।

उनसे एक और सवाल किया गया कि अभी भी सरकारी अस्पतालों के आईसीयू (ICU) में मरीजों की संख्या बनी हुई है, क्या कारण है?

इसके जवाब में उन्होंने कहा, 'जी हां, हमें लग रहा था कि संक्रमण की रफ्तार थमी है तो केस कम हो रहे हैं और आईसीयू के बेड भी खाली होंगे। दूसरी वेव में बहुत सारे मरीज नेगेटिव होने के बाद इलाज कराकर घर चले जाते हैं, लेकिन कई बार घर जाने के बाद भी उनका हार्ट की धड़कन बढ़ गई है, सेचुरेशन ठीक नहीं होता, फेफड़े का संक्रमण बना हुआ है। ऐसे में लोग पहले तो घर के पास के अस्पताल में ऑक्सीजन ले लेते हैं। फिर भी आराम नहीं मिलता तो वो सरकारी अस्पतालों के आईसीयू में भर्ती होते हैं। ये वायरस सिर्फ फेफड़ों पर ही नहीं बल्कि कई दूसरे अंगों को भी प्रभावित करता है। ऐसे लोग उम्र में भी थोड़ा ज्यादा होते हैं।' 

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