Vaccine बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी के CEO का सवाल- क्या भारत सरकार खर्च करेगी 80 हजार करोड़?

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Sep 26, 2020, 06:24 PM IST

Covid-19 Vaccine News: पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ आदर पूनावाला ने सरकार से पूछा है कि क्या उसके पास कोरोना वैक्सीन के लिए 80 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध होंगे।

Vaccine बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी के CEO का सवाल- क्या भारत सरकार खर्च करेगी 80 हजार करोड़?

नई दिल्ली: देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच कोरोना वैक्सीन का ट्रायल भी विभिन्न चरणों में चल रहा है। पुणे स्थित वैक्सीन बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने वैक्सीन को लेकर सरकार से कुछ सवाल पूछे हैं। अदार ने कहा है कि हर भारतीय को कोरोना टीका लगाने के लिए 80 हजार करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी तो क्या यह धनराशि सरकार के पास उपलब्ध होगी?

अदार के सवाल
अदार ने ट्वीट करते हुए कहा,'त्वरित प्रश्न: क्या भारत सरकार के पास अगले एक साल में 80 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध होंगे? क्योंकि वैक्सीन खरीदने और हर भारतीयों तक इसे पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय को इतनी धनराशि की आवश्यकता होगी। हमारे सामने अब यह अगली चुनौती है जिससे हमें निपटना है।' इस ट्वीट के साथ अदार ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भी टैग किया है।

2024 के अंत तक का समय
अपने अगले ट्वीट में अदार ने लिखा, 'मैंने यह सवाल इसलिए पूछा है क्योंकि भारत और दुनिया में वैक्सीन बनाने वाले और वितरित करने वालों को कार्ययोजना और मार्गदर्शन की आवश्यकता है।' आपको बता दें कि अदार पूनावाला ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि दुनिया में सभी के लिए कोरोना वायरस की वैक्सीन उपलब्ध कराने में कम से कम 2024 के अंत तक का समय लगेगा।

हर्षवर्धन ने दिया था ये बयान

आपको बता दें कि लोकसभा में नियम 193 के तहत कोविड-19 वैश्विक महामारी पर हुई चर्चा के दौरान स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन ने कहा कि दुनिया में कोविड-19 रोधी 145 टीका ‘प्री क्लिनिकल’ मूल्यांकन के स्तर पर हैं और इसमें से 35 का क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में 30 टीकों के लिये समर्थन दिया गया है जो विकास के विभिन्न स्तरों पर हैं । इसमें से 3 वैक्सीन ट्रायल के प्रथम, द्वितीय और तृतीय चरण में हैं । चार टीके ‘प्री क्लिनिकल’ मूल्यांकन के उन्नत चरण में हैं ।

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