हाथ से खाने से नंगे पैर घास पर चलने तक - क्यों आज भी अपनानी चाहिए ये पुरानी देसी आदतें

खानपान और जीवनशैली में परिवर्तन के कारण आजकल हर दूसरा व्यक्ति अपने खानपान को लेकर लापरवाह हो गया है। आयुर्वेद में स्वस्थ जीवन के लिए कुछ सुझाव दिए गए हैं, जिसका हमारे पूर्वज सदियों से पालन करते आ रहे हैं। आइए जानते हैं।

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पुरानी भारतीय आदतों के फायदे 
मुख्य बातें
  • भारत में हाथ से भोजन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
  • आयुर्वेद में सुबह नर्म और हरी घास पर चलने की सलाह दी जाती है।
  • जूते चप्पल के अंदर मौजूद बैक्टीरिया आंतों को कर सकता है प्रभावित।

नई दिल्ली : अक्सर घर के बड़े बुजुर्ग समय से भोजन करने की सलाह देते हैं, लेकिन खानपान और जीवनशैली में परिवर्तन के कारण आजकल हर दूसरा व्यक्ति अपने खानपान को लेकर लापरवाह हो गया है। पुराने समय में लोग सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच ही भोजन करते थे, यही कारण था कि वह हमारी तुलना में कम बीमारियों से पीड़ित थे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार व्यक्ति को सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच ही भोजन करना चाहिए। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस यानी टीवी, कंप्यूटर और गेमिंग डिवाइस को अपने बेडरूम से दूर रखना चाहिए। नींद विशेषज्ञ बताते हैं कि यह मेलाटोनिन और सर्कैडियन लय को प्रभावित करता है, जिससे हमारी नींद प्रभावित होती है।

पुराने समय में लोग ना केवल समय से भोजन करते थे बल्कि हांथ से खाना खाते थे और नीचे बैठकर भोजन करते थे। हालांकि बदलते वक्त के साथ लोगों को बिस्तर पर या डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना खाने की आदत पड़ गई है। आयुर्वेद में स्वस्थ जीवन के लिए कुछ सुझाव दिए गए हैं, जिसका हमारे पूर्वज सदियों से पालन करते आ रहे थे। आइए जानते हैं।

हाथ से भोजन करने के फायदे

भारत में हाथ से भोजन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, यह ना केवल हमारी परपराओं का अभूतपूर्व हिस्सा है बल्कि खाने का सबसे आसान तरीका भी है। लेकिन बाजार में मौजूद फैंसी बर्तनों ने हमारे खाने का तरीका बदल दिया है, आजकल लोग हाथ के बजाए चम्मच से खाना पसंद करते हैं। लेकिन आपको शायद ही पता होगा कि हाथ से भोजन करने के सैकड़ों स्वास्थ्य लाभ हैं। यह मस्तिष्क, पेट और उंगलियों के बीच समन्वय का व्यायाम बन जाता है। साथ ही यह पाचनतंत्र को दुरुस्त कर गैस, कब्ज आदि समस्याओं से दूर रखता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हाथ से उंगलियों को जोड़कर भोजन करने से आपके हाथ की एक्सरसाइज भी होती है और आपका पेट भी जल्दी नहीं भरता। मार्थ स्टीवर्ट डॉट कॉम के अनुसार, एक वैज्ञानिक प्रयोग ने यह साबित कर दिया कि हाथ से खाने से भोजन अधिक स्वादिष्ट लगता है। शायद यही कारण है कि लोग बर्गर, पिज्जा, आदि हाथ से खाते हैं।

नंगे पांव घास पर चले के फायदे

स्वास्थ्य विशेषज्ञ अक्सर घास पर नंगे पांव चलने की सलाह देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जिस प्रकार मनुष्य को जीने के लिए सांस की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार हमारे पैरों को भी खुला रहना पसंद है। आयुर्वेद में भी सुबह नर्म और हरी घास पर चलने की सलाह दी जाती है। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है, इससे आप खुद को सैकड़ों बीमारियों से दूर रखते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि सुबह नंगे पांव घांस पर चलने से हमारे शरीर का पूरा दबाव पैर के तलवों पर पड़ता है, इससे आंख की रोशनी में सुधार होता है। साथ ही यह डायबिटीज और ब्लड प्रेसर वाले मरीजों के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है। 

मिलिट्री क्लीनिकल हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जरी विभाग के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि नंगे पांव घास पर चलने से मस्तिष्क अच्छे से कार्य करता है और यह ह्रदय के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है। पुराने समय में लोग अक्सर घर में नंगे पांव ही चलते थे।

जूते चप्पल घर के बाहर निकालें

अधिकतर घरों में अंदर प्रवेश करने से पहले जूते, चप्पल बाहर निकालने का चलन है। यह ना केवल स्वास्थ्य के लिए बल्कि वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टि से भी बेहद फायदेमंद होता है। न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक जूते चप्पलों में ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जो अंदर प्रवेश करने पर श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं तथा इससे पाचनतंत्र में भी गड़बड़ी उत्पन्न हो सकती है। एरिजोना विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में पाया गया कि जूते के अंदर मौजूद बैक्टीरिया आंतों को प्रभावित कर सकता है। वहीं इसमें मौजूद डिफ बैक्टीरिया पाचनंत्र में गड़बड़ी उत्पन्न सकता है।

शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के अनुसार जूते में स्टैफिलोफोकस ऑरियस (स्टैफ) बैक्टीरिया भी पाया जाता है। आपको बता दें बच्चों के लिए यह अधिक खतरनाक होता है। इसलिए घर में प्रवेश करने से पहले अपने जूते चप्पल बाहर निकाल दें।

(डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। )

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