Covid-19: स्कूलों में स्वच्छ जल व हाथ धोने की सुविधा का प्रबंध ज़रूरी

हेल्थ
एजेंसी
Updated Aug 14, 2020 | 15:25 IST

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख ट्रैडॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने बताया, जल, स्वच्छता, साफ़-सफ़ाई की सुविधाओं की सुलभता स्कूलों सहित हर स्थान पर संक्रमण की रोकथाम के असरदार उपायों के लिए बेहद अहम है।

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कोरोना महामारी के हीच हैंडवॉश बेहद जरूरी (Source: Pixabay)  |  तस्वीर साभार: Representative Image

नई दिल्ली : दुनिया में लगभग 82 करोड़ बच्चों के पास स्कूलों में हाथ धोने की बुनियादी सुविधाओं का अभाव है जिससे उनके कोविड-19 महामारी और अन्य संक्रामक बीमारियों से संक्रमित होने का ख़तरा ज़्यादा है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साझा निगरानी कार्यक्रम द्वारा गुरुवार को जारी नई रिपोर्ट के आँकड़े दर्शाते हैं कि विश्व के हर पाँच में से दो स्कूलों में महामारी से पहले ही इन मूलभूत सुविधाओं की कमी थी। यूएन एजेंसियों के मुताबिक साफ़-सफ़ाई का समुचित प्रबंध किया जाना स्कूलों को फिर खोले जाने की एक अनिवार्य शर्त है। 

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख ट्रैडॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने बताया, जल, स्वच्छता, साफ़-सफ़ाई की सुविधाओं की सुलभता स्कूलों सहित हर स्थान पर संक्रमण की रोकथाम के असरदार उपायों के लिए बेहद अहम है।

“मौजूदा विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के दौरान स्कूलों को फिर सुरक्षित ढँग से खोलने और संचालित करने की सरकारी रणनीतियों में इस पर प्रमुखता से ध्यान केंद्रित करना होगा। कोविड-19 महामारी के कारण शिक्षा के अवसरों में अब तक का सबसे बड़ा व्यवधान आया है जिससे 190 देशों में डेढ़ अरब से ज़्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं।

रिपोर्ट दर्शाती है कि पिछले वर्ष दुनिया के 43 फ़ीसदी स्कूलों में साबुन और जल से हाथ धोने की बुनियादी सुविधा नहीं था: महामारी के दौरान स्कूलों को सुरक्षित ढँग से खोलने के लिए यह एक अनिवार्य शर्त है। विश्व भर में 81 करोड़ से ज़्यादा बच्चों के पास स्कूलों में हाथ धोने की बुनियादी सुविधा नहीं है और इनमें से एक-तिहाई से ज़्यादा बच्चे सब-सहारा अफ़्रीका में हैं।

रिपोर्ट में ज़ोर देकर कहा गया है कि कोरोनावायरस पर क़ाबू पाने में जुटी सरकारों को सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को लागू करने की ज़रूरत और तालाबंदी से होने वाले सामाजिक व आर्थिक असर के बीच संतुलन साधना होगा। साझीदार संगठनों ने कहा है कि लम्बे समय तक स्कूलों के बन्द होने से बच्चों पर होने वाले नकारात्मक प्रभावों के तथ्य पहले दर्ज किए जा चुके हैं।

यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हेनरीएटा फ़ोर ने कहा, “कोविड-19 महामारी के शुरू होने के बाद से वैश्विक स्तर पर स्कूलों को बन्द होने से बच्चों की शिक्षा व कल्याण के लिए अभूतपूर्व चुनौती पैदा हुई है।”

“हमें बच्चों की पढ़ाई-लिखाई को प्राथमिकता देनी होगी। इसका अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल फिर से खोले जाने के लिए सुरक्षित हैं – हाथ साफ़ करने की सुविधा की सुलभता, स्वच्छ पेयजल और साफ़-सफ़ाई के प्रबंध के साथ।


रिपोर्ट में बताया गया है कि स्कूलों में कोविड-19 की रोकथाम व उस पर क़ाबू पाने के लिए किस प्रकार से और किन संसाधनों का उपयोग किया जा सकता है। इस क्रम में तात्कालिक कार्रवाई के 10 उपायों व सुरक्षा चैकलिस्ट को साझा किया गया है।

अप्रैल महीने में यूनीसेफ़ और उसके साझीदार संगटनों ने स्कूलों को फिर से खोले जाने के लिए कुछ दिशा-निर्देशों को जारी किया था और उसी को आधार बनाकर नई रिपोर्ट तैयार की गई है।

इन दिशा-निर्देशों में स्वच्छता बरते जाने के ख़ास उपायों, निजी बचाव सामग्री व उपकरणों के इस्तेमाल, साफ-सफ़ाई व कीटाणुओं को दूर करने और पेयजल, शौचालय और साबुन सहित हाथ धोने के लिए इन्तज़ाम करने के सबसे अच्छे तरीक़ों को साझा किया गया है। 

यूनीसेफ़ और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पर्याप्त जल, साफ़-सफ़ाई और स्वच्छता सम्बन्धी सेवाओं की न्यायोचित सुलभता सुनिश्चित करने के लिए अपना संकल्प दोहराया है।

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