Gathia ka gharelu Upchar: गठिया के दर्द से हैं परेशान तो अपनाएं ये घरेलू उपचार, कम हो जाएगी परेशानी

Arthritis Pain: हड्डियों के जोड़ों में यूरिक एसिड जमा हो जाने या फिर हड्डियों में कैल्शियम की कमी से भी जोड़ों में सूजन या अकड़न आ जाती है। ऐसी परिस्थिति में गठिया को रोग हो जाता है। जानते हैं इसके घरेलू इलाज-

home remedies for arthritis pain
गठिया का घरेलू इलाज 

मुख्य बातें

  • लाइफस्टाइल और खान-पान में बदलाव होने के कारण गठिया की बीमारी आज आम हो गई है
  • हड्डियों में कैल्शियम की कमी हो जाने के कारण आम तौर पर ये समस्या होती है
  • पहले बुजुर्गों को होती थी ये बीमारी पर आज हर किसी को होने लगी है

आर्थराइटिस यानि जोड़ों का दर्द जिसे गठिया भी कहा जाता है ये आम तौर पर बड़े बुजुर्गों की बीमारी है। लाइफस्टाइल और खान-पान में बदलाव होने के कारण लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ी कई परेशानियों हो रही हैं। लोगों की हड्डियां, मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं। इस कारण उन्हें कई प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी ही एक बीमारी है आर्थराइटिस या जिसे गठिया भी कहते हैं। पहले आम तौर पर ये समस्या 50 साल के ऊपर के लोगों को होती थी लेकिन अब कम उम्र के लोगों को भी ये समस्या हो रही है। हड्डियों के जोड़ों में दर्द को ही गठिया कहते हैं।

क्या है कारण

इस बीमारी के मरीजों को चलने, उठने बैठने तक में काफी दिक्कत आती है। हड्डियों के जोड़ों में यूरिक एसिड जमा हो जाने या फिर हड्डियों में कैल्शियम की कमी से भी जोड़ों में सूजन या अकड़न आ जाती है। इससे जोड़ों में गांठ जैसा महसूस होने लगता है। इस बीमारी में जोड़ों में मौजूद टिश्यू टूटकर गिरने लगते हैं इसी अवस्था को गठिया कहा जाता है।

जोड़ों में कार्टिलेज नाम का एक टिश्यू होता है जो हड्डियों के लिए कवर का काम करता है इसके नष्ट हो जाने के बाग हड्डियां रगड़ खाने लगती हैं और इससे दर्द होने लगता है। इसी बीमारी को गठिया कहते हैं। यह अनुवांशिक भी हो सकती है। इसके अलावा मोटापा और संक्रमण के कारण भी गठिया की बीमारी हो सकती है। पहले 60 वर्ष के बुजुर्गों को ही ये बीमारी होती थी पर आजकल ये युवाओं को भी हो रही है।

गठिया के लक्षण

  • इससे जल्दी थकान होने लगती है।
  • पीड़ित व्यक्ति को बार-बार बुखार आता है।
  • शरीर के कुछ हिस्सों में सूजन के साथ-साथ दर्द शुरू हो जाता है। सुबह के समय ये समस्या ज्यादा होती है जिससे चलने फिरने में दिक्कत होती है।
  • जिस जोड़ में गठिया हुआ है वहां पर भारीपन का एहसास होता है। 
  • प्रभावित जगह लाल रंग की हो जाती है और शरीर का इम्यून सिस्टम भी खराब हो जाता है।

गठिया का घर्लू इलाज

हल्दी
हल्दी एक नेचुरल एंटीसेप्टिक है। खास तौर पर हड्डियों की बीमारी के इलाज में ये बेहद कारगर माना जाता है। इसमें करक्यूमिन नामक तत्व पाया जाता है जो हड्डियों के सूजन को कम करने में मदद करता है। दो-तीन ग्रीम हल्दी को पानी में डालकर उबाल लें। इसके बाद इस पानी के सामान्य हो जाने पर इसका सेवन करें।

मेथी
मेथी को एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटी आर्थराइटिक का प्रमुख स्रोत माना गया है। इसमें सैचुरेटेड और अनसैचुरेटेड फैटी एसिड भी होता है जो हड्डियों के सूजन व दर्द को कम करने में सहायक होता है। इसके लिए मेथी के दानों को पानी में उबाल लें। अब इस पानी को छान कर उसमें नींबू व शहद मिला दें और इसे दिन में 4 से 5 बार चाय की तरह पीएं। इसके अलावा आप मेथी के दानों को पीसकर पाउडर बनाकर इसे सूप में डाकर भी पी सकते हैं। इसके अलावा इसे भिगो कर अंकुरित कर स्प्राउट की तरह भी खा सकते हैं।

लहसुन
लहसुन कई बीमारियों को ठीक करने में बेहद गुणकारी माना जाता है। यह हड्डियों में कम होने वाले कार्टिलेज को सही करने में मदद करता है। इसलिए अगर आप गठिया के मरीज हैं तो आपको नियमित तौर पर लहसुन खाना चाहिए। ना केवल सब्जियों में बल्कि रोजाना सुबह अगर आप 4 से 5 लहुसन की कच्ची कलियां चबाकर खाते हैं तो ये आपकी हड्डियों के लिए रामबाण साबित हो सकता है।

आलू का रस
आलू का रस बेहद काम का होता है। शायद आपने इसके इस्तेमाल के बारे में ज्यादा सुना नहीं होगा लेकिन गठिया की बीमारी के लिए ये बेहद काम की चीज है। आलू के रस में कई प्रकार के मिनरल्स व कार्ब्निक मौजूद होते हैं जो शरीर में जमा होने वाले यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकाल देता है। ऐसा होने के बाद आर्थराइटिस की बीमारी में काफी आराम मिलता है। इसके लिए आलू को छीलकर बारीक टुकड़ों में काट लें इसके बाद इसे रातभर के लिए पानी में भिगो दें। सुबह उठकर आप इस पानी का खाली पेट में सेवन कर लें। इसके अलावा आप इस आलू और पानी को पीस कर भी इसे पी सकते हैं। 

(डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए है, इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रुप में नहीं लिया जा सकता। कोई भी स्टेप लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर कर लें।)

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