Herpes Simplex Virus: कोरोना काल में अवसरवादी संक्रमण, भारत में हर्पीज सिंपलेक्स वायरस का पहला केस

हेल्थ
ललित राय
Updated Jun 10, 2021 | 19:32 IST

कोरोना मरीज अलग अलग संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। भारत में हर्पिज सिंपलेक्स वायरस का पहला मामला सामने आया है।

Herpes Simplex Virus: कोरोना काल में अवसरवादी संक्रमण, भारत में हर्पीज सिंपलेक्स वायरस का पहला केस
कोरोना मरीज में हर्पीज सिंपलेक्स वायरस का पहला केस 

मुख्य बातें

  • हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस दो प्रकार के होते हैं - एचएसवी टाइप 1 और एचएसवी टाइप 2
  • फ्लू जैसे लक्षण, सूजी हुई लसीका ग्रंथियां, सरदर्द
  • घाव होठों पर और उसके आसपास या पूरे मुंह में हो सकते हैं

आप सभी लोगों ने अवसरवादी लोग, अवसरवादी सरकार, अवसरवादी व्यवस्था को देखा और सुना होगा। लेकिन क्या संक्रमण यावी इंफेक्शन भी अवसरवादी होता है। जी हां कोविड काल में अब संक्रमण भी अवसरवादी हो चुके हैं, वो अलग अलग नामों से और रूप में कोरोना मरीजों को शिकार बना रहे हैं। इसी कड़ी में हर्पीज सिंपलेक्स वायरस का नाम जुड़ा है और भारत में पहला केस भी मिला है। यह वायरस उन लोगों को शिकार बना रहा है जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है। 

इस तरह हर्पीज सिम्प्लेक्स का नाम आया सामने
दरअसल एक शख्स ने सोशल मीडिया पर अपील किया कि उसके पिता कोविड मरीज होने के साथ साथ हर्पिज सिंपलेक्स वायरस का सामना कर रहे हैं और उसे मदद की जरूरत है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक गाजियाबाद के एक अस्पताल में हर्पीज सिंपलेक्स वायरस का मामला मिला था और इसे बेहद खतरनाक भी बताया जा रहा है। 

हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस दो प्रकार के होते हैं - एचएसवी टाइप 1 और एचएसवी टाइप 2
सीडर सिनाई अस्पताल की वेबसाइट हरपीज सिम्प्लेक्स वायरस टाइप 1 (एचएसवी -1) का वर्णन करती है जो मुंह में संक्रमण का कारण बनती है मसलन एक ठंडा घाव या छाला। हरपीज सिंप्लेक्स वायरस इस कष्ट देने वाला है। दाद के घाव आमतौर पर एक सप्ताह से 10 दिनों तक रहते हैं। वे अक्सर होंठ, जीभ, मुंह की छत या मसूड़ों पर होते हैं। घाव पहले तरल पदार्थ से भरे फफोले के रूप में होते हैं जो फट जाते हैं । घावों से तरल पदार्थ निकलता है जिसमें वायरस है। कुछ दिनों के बाद घाव पपड़ी में बदल जाता है। वायरस अत्यधिक संक्रामक है और त्वचा से त्वचा के संपर्क से फैल सकता है।

हरपीज सिंप्लेक्स वायरस टाइप 2 (HSV-2) अक्सर जननांग दाद संक्रमण से जुड़ा होता है। हालांकि, दोनों प्रकार के एचएसवी मुंह और जननांगों दोनों को संक्रमित कर सकते हैं।एक बार संक्रमित होने के बाद, एक व्यक्ति को अपने पूरे जीवन के लिए हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस होगा। जब वायरस सक्रिय नहीं होता है, तो यह तंत्रिका कोशिकाओं के समूह में निष्क्रिय रहता है। कुछ लोगों में कभी भी वायरस के कोई लक्षण नहीं होते हैं जबकि अन्य में समय-समय पर संक्रमण का प्रकोप होता है।

हर्पीज सिंपलेक्स वायरस के लक्षण

  1. फ्लू जैसे लक्षण
  2. सूजी हुई लसीका ग्रंथियां
  3. सरदर्द
  4. घाव होठों पर और उसके आसपास और पूरे मुंह में हो सकते हैं।
  5. कुछ लोगों में बिल्कुल भी लक्षण नहीं होते हैं

कोविड महामारी के दौरान हर्पीज खबरों में क्यों है?
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, दाद के संक्रमण के दोबारा सक्रिय होने से लेकर बालों के झड़ने तक, ठीक होने के चरण में कई कोविड रोगियों को कम प्रतिरक्षा के कारण एक त्वचा संबंधी जटिलता का सामना करना पड़ रहा है, डॉक्टरों का कहना है। उनकी कमजोर प्रतिरक्षा के कारण, एचएसवी से दाद की तुलना में हर्पीस ज़ोस्टर जैसे अवसरवादी संक्रमण अधिक रिपोर्ट किए जा रहे हैं।

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