गुणों का भंडार है सदाबहार का फूल, डायबिटीज से छुटकारा पाने के लिये ऐसे करें प्रयोग

हेल्थ
Updated Aug 04, 2019 | 15:33 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

सदाबहार भारत में आमतौर पर पाया जाने वाला पौधा है। यह एक सदाबहार पौधा है जो सजावटी पौधे के रूप में और औषधीय प्रयोजनों के लिए काम में लाया जाता है।

Sadabahar
Sadabahar  

मुख्य बातें

  • यह फूल टाइप 2 मधुमेह के लिए प्राकृतिक औषधि के रूप में काम करता है
  • सदाबहार की ताजी पत्तियों को सुखा कर उसे फलों के रस के साथ पीएं
  • सदाबहार का पौधा मलेरिया, गले में दर्द और ल्यूकेमिया जैसी बीमारियों को भ दूर करता है

आयुर्वेद कई हर्बल उपचारों का खजाना है। कहा जाता है कि प्राचीन चिकित्सा विज्ञान में हर्बल उपचार और दवाएं शामिल हैं जो विभिन्न बीमारियों के उपचार को ठीक करने में मदद करती हैं। आयुर्वेद में कई ऐसी दवाइयां शामिल हैं जो ब्‍लड शुगर को कंट्रोल करने में मददगार साबित होती हैं। 

आयुर्वेद के अनुसार डायबिटीज एक मेटाबॉलिक कफ प्रकार का विकार है जिसमें अग्नि (पाचन अग्नि) कम होने लगती है ब्‍लड शुगर बढ़ने लगता है। ब्लड शुगर में स्पाइक्स को नियंत्रित करने के लिए आयुर्वेद सुझाव देता है कि सदाबहार नामक फूल जो कि एक जड़ी बूटी भी है, काफी फायदेमंद साबित होता है। यहां आपको इस जड़ी बूटी के बारे में बताया जाएगा कि यह किस तरह से मधुमेह को ठीक करती है। 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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सदाबहार क्या है?
सदाबहार भारत में आमतौर पर पाया जाने वाला पौधा है। यह एक सदाबहार पौधा है जो सजावटी पौधे के रूप में और औषधीय प्रयोजनों के लिए काम में लाया जाता है। इस फूल की पत्‍तियां चिकनी, चमकदार और गहरे हरे रंग की होती है जो कि टाइप -2 मधुमेह के लिए प्राकृतिक औषधि के रूप में काम करती है। सुबह में फूलों और पत्तियों से बनी हर्बल चाय बहुत ही लाभकारी साबित हो सकती है। 

मधुमेह को कैसे ठीक करता है सदाबहार का फूल 
सदाबहार को लंबे समय से आयुर्वेद और चीनी दवाओं में इस्तेमाल किया जाता आ रहा है। इसे मधुमेह, मलेरिया, गले में खराश और ल्यूकेमिया जैसी बीमारियों को ठीक करने के लिए हर्बल उपचार के रूप में प्रयोग किया जाता है। 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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मधुमेह के लिए सदाबहार का उपयोग कैसे करें?

  1. सदाबहार की ताजी पत्तियों को सुखाया जा सकता है, पीसा जा सकता है और एक एयर-टाइट कंटेनर में रखा जा सकता है। रोजाना एक कप ताजे फलों के रस या पानी के साथ इन सूखे पत्तों के पाउडर का एक चम्मच मिला कर सेवन करें। पाउडर में कड़वापन हो सकता है।
  2. पौधे की तीन से चार पत्तियों से अधिक न लें। आप पत्‍तियों को चबा भी सकते हैं। 
  3. सदाबहार पौधे के गुलाबी रंग के फूल लें और उन्हें एक कप पानी में उबालें। पानी को छान लें और इसे रोज सुबह खाली पेट पिएं।

सुनिश्चित करें कि आप किसी प्रमाणित आयुर्वेदिक विशेषज्ञ या मधुमेह रोग विशेषज्ञ से परामर्श करें। यदि आप मधुमेह और इस जड़ी बूटी के लिए एक साथ कोई दवा ले रहे हैं, तो संभावना है कि रक्त शर्करा का स्तर काफी गिर सकता है।

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