Antidepressants: डिप्रेशन दूर करने में कारगर एंटी-डिप्रेसेंट दवाएं, जानिए इसके प्रकार और साइड इफेक्ट्स

Antidepressants Side effects: डिप्रेशन की ट्रीटमेंट के लिए ज्यादातर डॉक्टर एंटी-डिप्रेसेंट्स सेवन करने की सलाह देते हैं। आइए जानते हैं एंटी-डिप्रेसेंट्स के साइड इफेक्ट और प्रभाव।

Antidepressant
डिप्रेशन दूर करने में कारगर एंटी-डिप्रेसेंट दवाएं 

मुख्य बातें

  • डिप्रेशन दूर करने के लिए एंटी-डिप्रेसेंट दवाएं काफी मददगार होती हैं।
  • इसका इस्तेमाल पिछले 20 साल से किया जा रहा है।
  • जानिए इसके साइड-इफेक्ट्स और प्रभाव।

डिप्रेशन, एंग्जाइटी डिसऑर्डर, मानसिक तनाव जैसी बीमारियों के इलाज करने में एंटी-डिप्रेसेंट दवाएं काफी मददगार होती हैं। लेकिन इसे सेवन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना बहुत जरूरी है। बता दें कि समय के साथ डिप्रेशन की समस्या अब लोगों के बीच काफी आम हो गई है। यह बीमारी लोगों को धीरे-धीरे अंदर से खोखला कर देती है और आखिर में व्यक्ति खुद को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है। वहीं दिमाग में कैमिकल जिस तरह काम करता है एंटी डिप्रेसेंट्स उसे प्रभावित करता है। आइए जानते हैं एंटी डिप्रेसेंट्स के बारे में 

एंटी-डिप्रेसेंट की भूमिका

एंटी-डिप्रेसेंट दवाएं हैं जो ड्रिप्रेशन, मानसिक चिंता, डिस्टीमिया के साथ ही अन्य स्थितियों के लक्षणों को भी दूर करने में मदद कर सकती हैं। इस दवा का मकसद होता है दिमाग में न्यूरोट्रांसमीटर के रसायनिक असंतुलन को ठीक करना है जो मूड और व्यवहार में आए बदलाव के लिए जिम्मेदार होते हैं। पहली बार एंटी-डिप्रेसेंट को साल 1950 के दशक में विकसित किया गया था। इसका इस्तेमाल पिछले 20 साल से किया जा रहा है और अब यह लोगों के बीच काफी कॉमन है। वहीं रिसर्च के मुताबिक अमेरिका में 12 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और एंटी-डिप्रेसेंट का उपयोग करने का प्रतिशत 1999-2004 में 7.7 प्रतिशत से बढ़कर 12.7 प्रतिशत हो गया।

कितने प्रकार के होते हैं एंटी-डिप्रेसेंट
सेरोटोनिन और नॉरएड्रेनालाईन रीपटेक इनहिबिटर (SNRI)
सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीपटेक इनहिबिटर (SSRI)
ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट्स (TCAs)
मोनोमाइन ऑक्सीडेज इनहिबिटर (MAOI)
नॉरएड्रेनालाईन और विशिष्ट सेरोटोनिनर्जिक एंटीडिप्रेसेंट (NASSAs)

एंटी-डिप्रेसेंट के साइड इफेक्ट
सामान्य प्रभाव मतली और चिंता है, लेकिन यह ऊपर बताई गई दवा के प्रकार पर निर्भर करेगा। अगर साइड इफेक्ट्स की बात करें, तो अगर आपके दिमाग में आत्महत्या के ख्याल आ रहे हैं तो अपने डॉक्टर को इस बारे में जरूर बताएं। इसके अलावा इसका सेवन कुछ ऐसे प्रभाव देखें गए हैं, खासकर बच्चों और युवाओं के बीच।

मूड में अधिक बदलाव और व्यवहार में सक्रियता- इसमें उन्माद या हाइपोमेनिया शामिल हो सकते हैं। यह ध्यान रखें कि एंटीडिप्रेसेंट द्विध्रुवी विकार का कारण नहीं है, लेकिन वे एक ऐसी स्थिति का खुलासा कर सकते हैं जो अभी तक स्वयं प्रकट नहीं हुई है।

आत्मघाती विचार- कुछ रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया जाता है कि एंटीडिपेंटेंट्स का उपयोग करते समय आत्महत्या के विचार होने के जोखिम बढ़ जाते हैं। यह दवाओं या अन्य कारकों के कारण हो सकता है, जैसे कि दवा के काम करने में लगने वाला समय, या संभवतः एक अनजानी द्विध्रुवी विकार जिसके कारण उपचार के लिए एक अलग दृष्टिकोण की आवश्यकता हो सकती है।

वापसी लक्षण- कुछ दवाओं के उलट, एंटीडिपेंटेंट्स के साथ समान प्रभाव पाने के लिए खुराक को बढ़ाते रहना आवश्यक नहीं है। यह नशे की लत की तरह नहीं है। जब आप एंटीडिप्रेसेंट का उपयोग करना बंद कर देते आप एक ही प्रकार के वापसी के लक्षणों का अनुभव नहीं करेंगे, उदाहरण के लिए जैसे आप जब धूम्रपान छोड़ते हैं। हालांकि, एसएसआरआई और एसएनआरआई का इस्तेमाल करने वाले लगभग 3 में से 1 लोग उपचार को रोकने के बाद कुछ वापसी के लक्षणों की रिपोर्ट करते हैं। यह लक्षण दो सप्ताह से दो महीने तक रह सकते हैं। इन लक्षणों में एंग्जाइटी,सिर चकराना, बुरे सपने, फ्ले जैसे लक्षण इत्यादि। वहीं ज्यादातर मामले असामान्य हैं और उन्हें रोकने की अधिक संभावना है। 

एंटी-डिप्रेसेंट के प्रभाव
किसी व्यक्ति को एंटी-डिप्रेसेंट के प्रभाव को नोटिस करने में कई सप्ताह लग सकते हैं। बहुत से लोग उनका उपयोग करना बंद कर देते हैं क्योंकि उनका मानना ​​है कि दवाएं काम नहीं कर रही हैं। लेकिन लोगों में सुधार नहीं देखने के कई कारण हो सकते हैं जैसे:

  • दवा व्यक्ति के अनुकूल नहीं है।
  • स्वास्थ्य प्रदाता द्वारा निगरानी की कमी।
  • अतिरिक्त उपचारों की आवश्यकता, जैसे कि संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (सीबीटी)।
  • सही समय पर दवा लेना भूल गए।

डॉक्टर के संपर्क में रहने और लगातार फॉलो-अप लेने से दवा के काम करने की संभावना में सुधार होता है। यह हो सकता है कि खुराक को बदलने की आवश्यकता हो या कोई अन्य दवा अधिक उपयुक्त हो। वहीं इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। अधिकांश लोगों को पहले या दूसरे सप्ताह के दौरान कोई फायदा महसूस नहीं होगा। पूरी तरह से फायदा एक या दो महीने बाद होना शुरूो होता है। इसके लिए दृढ़ता महत्वपूर्ण है।

(डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए है, इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रुप में नहीं लिया जा सकता। कोई भी स्टेप लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर कर लें।)

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