बिहार, उत्तराखंड, झारखंड की हालत खराब, स्वास्थ्य सेवाओं पर नीति आयोग की रिपोर्ट में खुलासा

Niti Aayog Report: नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार जिला अस्पतालों में बेड की उपलब्धता के मामले में बिहार, डॉक्टरों के मामले में उत्तराखंड और नर्सों की उपलब्धता के मामले में झारखंड की सबसे खराब स्थिति है।

District Hospital Report
नीति आयोग ने जिला अस्पतालों की स्थिति पर रिपोर्ट जारी की है।  |  तस्वीर साभार: ANI

मुख्य बातें

  • प्रति एक लाख की आबादी पर जिला अस्पतालों में बिहार में 6, झारखंड में 9, तेलंगाना में 10, UP और हरियाणा में 13, महाराष्ट्र में केवल 14 बेड की उपलब्धता है
  • डॉक्टरों की उपलब्धता के मामले में उत्तराखंड, अंडमान और निकोबार ,गुजरात , हिमाचल प्रदेश की स्थिति खराब है
  • बेड की उपलब्धता में पुडुचेरी, डॉक्टरों और नर्सों की उपलब्धता के मामले में दिल्ली सबसे बेहतर स्थिति में है।


नई दिल्ली: देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच के मामले में बिहार, उत्तराखंड, झारखंड की स्थिति सबसे खराब है। इस बात का खुलासा नीति आयोग की एक रिपोर्ट में हुआ है। उसके अनुसार देश में प्रति एक लाख आबादी पर जिला अस्पतालों में औसतन 24 बेड की उपलब्धता है। लेकिन बिहार में एक लाख की आबादी पर केवल 6 लाख बेड उपलब्ध है। जबकि पुडुचेरी ऐसा राज्य है जहां पर 222 बेड की उपलब्धता है। इसी तरह डॉक्टरों की उपलब्धता मामले में उत्तराखंड की सबसे खराब स्थिति है। जबकि दिल्ली सबसे बेहतर स्थिति में हैं। वहीं तय मानकों के आधार पर दिल्ली में नर्सों की उपलब्धता सबसे अच्छी है तो झारखंड में सबसे खराब है।

बेड के मामले में बिहार सबसे खराब

नीति आयोग द्वारा भारत में जिला अस्पतालों के प्रदर्शन मूल्यांकन की रिपोर्ट  "जिला अस्पतालों के कामकाज की बेस्ट प्रैक्टिस" के अनुसार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 707 जिला अस्पतालों का इसके तहत मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट के तहत भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक (आईपीएचएस) 2012 दिशानिर्देश के आधार पर  जिला अस्पतालों में प्रति 1 लाख आबादी (2001 की जनगणना के आधार पर) पर कम से कम 22 बेड होने चाहिए। 

लेकिन देश में 15 ऐसे राज्य हैं जहां पर बेड की संख्या 22 के मानक से भी कम है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में 6, झारखंड में 9, तेलंगाना में 10, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में 13, महाराष्ट्र में 14, जम्मू और कश्मीर में 17, असम, आंध्र प्रदेश और पंजाब में 18, गुजरात , राजस्थान , पश्चिम बंगाल में 19 जबकि छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में 20 बेड की उपलब्धता है।

जबकि औसत से बेहतर वाले राज्यों में पुडुचेरी सबसे ऊपर है। रिपोर्ट के अनुसार पुडुचेरी में 222, अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 200, लद्दाख में150, अरुणाचल प्रदेश और दमन और दीव में 102, लक्षद्वीप में 78, सिक्किम में 70, मिजोरम में 63, दिल्ली में 59 , चंडीगढ़ में 57, मेघालय में 52, नागालैंड में49, हिमाचल प्रदेश में 46, कर्नाटक में 33, गोवा में 32, त्रिपुरा में 30, मणिपुर और उत्तराखंड में 24, केरल ,ओडिशा, और तमिलनाडु में 22 बेड उपलब्ध हैं।

डॉक्टरों के मामले में उत्तराखंड की स्थिति सबसे खराब

रिपोर्ट  के अनुसार आईपीएचएस 2012 मानकों के आधार पर डॉक्टरों की उपलब्धता का अनुपात, औसत मानक 1 के आधार पर उत्तराखंड और अंडमान निकोबार में सबसे कम है। इसके तहत उत्तराखंड और अंडमान निकोबार में यह औसत 0.48  है। इसके बाद गुजरात में 0.53, हिमाचल प्रदेश में 0.56  और झारखंड में 0.61 है। जबकि दिल्ली में यह सबसे बेहतर स्थिति में है। दिल्ली में यह 2.50, हरियाणा में 1.42, गोवा में 1.40 है।

नर्सों  के मामले में झारखंड की स्थिति सबसे खराब

इसी तरह आईपीएचएस 2012 मानकों के आधार पर नर्सों की उपलब्धता का अनुपात, औसत मानक 1 के आधार पर झारखंड में सबसे कम है। झारखंड में यह 0.27, जम्मू एवं कश्मीर में 0.32 और हिमाचल प्रदेश में केवल 0.32, वहीं उत्तराखंड में 0.35 है। जबकि दिल्ली में 1.41 है, जो देश में सबसे अच्छा है। इसके बाद चंडीगढ़ में 1.11, गोवा में 1.07  है।

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